गुजरात में विकास सचमुच पागल हो गया है, उसे होश में लाने का समय आ चुका है

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अमित शाह आँखें तरेर कर कहते हैं - राहुल की इतनी हिम्मत कि गुजरात को मोदी के अवदान को चुनौती दें !...

हाइलाइट्स

यह है गुजरात को मोदी का अवदान ! उन्होंने राज्य की ओर से संगठित जन-संहार करवाया, किसानों को लूट कर, ग़रीब मज़दूरों की ज़िंदगी से हर प्रकार की सुरक्षा को ख़त्म करके दो-चार पूँजीपतियों की मुट्ठियाँ गर्म किया और नफरत के आधार पर वोटों की फ़सल काटी। बस ! इन सबका परिणाम आज सिर्फ गुजरात नहीं, पूरा देश भुगत रहा है। देश में तेजी से भुखमरी बढ़ रही है और उतनी ही तेजी से अंबानी अदानी की संपत्ति बढ़ रही है।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अमित शाह आँखें तरेर कर कहते हैं - राहुल की इतनी हिम्मत कि गुजरात को मोदी के अवदान को चुनौती दें !

-अरुण माहेश्वरी

राहुल गांधी ने मोदी के तथाकथित गुजरात मॉडल को पूरी तरह से ठुकराते हुए वहाँ के ‘पागल हो गये विकास’ को सुधारने का वादा किया है।

इस पर मोदी के सिपहसलार अमित शाह ने गुर्राते हुए कहा है कि राहुल की इतनी हिम्मत कि गुजरात में मोदी के अवदान पर सवाल उठाए !

सचमुच हम जानना चाहते हैं कि गुजरात में मोदी का कौन सा ऐसा मौलिक अवदान है जिसके लिये उन्हें सराहा जा सकता है ?

1. गुजरात में कृषि क्षेत्र में खास तौर पर सहकार के आधार पर दूध क्रांति का पूरा श्रेय कांग्रेस के शासन को जाता है। अमूल का जन्म भाजपा के शासन में नहीं हुआ है।

2. गुजरात में रिलायंस का पेट्रोकेमिकल्स प्रकल्प सीधे तौर पर धीरू भाई अंबानी को इंदिरा गांधी की भेंट रहा हैं। हम उस इतिहास के साक्षी है जब लाइसेंस-परमिट राज के दिनों में इन्दिरा गांधी ने सीमाई प्रदेश की थोथी दलील पर हल्दिया में पेट्रोकेमिकल्स को अनुमति नहीं दी थी और इस क्षेत्र में रिलायंस की इजारेदारी को संरक्षण दिया था।

3. गुजरात का परवर्ती औद्योगिक विकास पेट्रोकेमिकल्स के एंसीलियरी प्रकल्पों के जरिये ही हुआ। यहाँ तक कि टैरीकॉटन के सर्टिंग सूटिंग के कारख़ानों की श्रृंखला और सूरत का साड़ी उद्योग भी उसी से जुड़े उत्पादों के रूप में कांग्रेस के ज़माने में ही फैल गया था।

4. जहाँ तक अहमदाबाद के कपड़ा उद्योग का सवाल है, उसके विकास के समय तक तो भाजपा का जन्म भी नहीं हुआ था।

5. यहाँ तक कि समुद्री तट पर शिप-ब्रेकिंग का काम भी कांग्रेस के ज़माने में जिस तरह फला-फूला, उसमें इधर गिरावट ही आई है।

और जहाँ तक गुजरात को मोदी की देन का सवाल है :

1. उनका सबसे बड़ा योगदान गोधरा कांड की आड़ में 2002 का मुसलमानों का जन-संहार रहा है, जिसके बदनुमा दाग को गुजरात कभी नहीं धो पायेगा। इस जन-संहार से गुजराती समाज में जो सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ, मोदी ने सिर्फ उसी की राजनीतिक फ़सल काटी है, किसी विकासमूलक काम की नहीं।

2. जहाँ तक विकास के काम का सवाल है, इवेंट्स मैनेजर मोदी ने हर साल ‘रिसर्जेंट गुजरात’ के भव्य आयोजनों और लंबी-चौड़ी भाषणबाजियों के अलावा यह किया कि किसानों की ज़मीन को छीन-छीन कर अपने क़रीबी उद्योगपतियों के बीच मुफ्त में बाँट दिया। अडानी और टाटा को तटवर्ती मुंद्रा इलाक़े में बिजली प्रकल्पों के लिये हज़ारों एकड़ ज़मीन लगभग मुफ्त में दी और आज उन दोनों बिजली प्रकल्पों की हालत इतनी ख़स्ता है कि वे गुजरात सरकार से राहत के पैकेज माँग रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी ख़ज़ाने से उनको धन सौंपने पर रोक लगा दी है, वर्ना मोदी जी तो इसकी हरी झंडी दिखा चुके थे। अडानी को रीयल इस्टेट के लिये कौड़ियों के दाम पर हज़ारों एकड़ ज़मीन दिला दी। और सिंगुर से टाटा को भगा कर नैनो के लिये जो हज़ार एकड़ से ज्यादा ज़मीन दी, वह कारख़ाना आज बंद सा पड़ा है।

3. इसके अलावा गुजरात की भलाई के नाम पर रिलायंस टेलिकम्युनिकेशन और उसके जिओ को इस प्रकार की छूटें दे दी हैं कि दूसरी सभी टेलीकॉम कंपनियों की हालत ख़राब है। टाटा ने तो अपनी टेलिकॉम कंपनी को बंद कर देने का निर्णय ले लिया है। 

4.  मोदी ने अदानी और अंबानी से 2014 के चुनाव के वक्त इतनी अधिक मदद ली थी कि प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी विदेश यात्राओं के दौरान देश के हितों की तुलना में इन दो पूँजीपतियों के हितों की रक्षा के लिये ज्यादा तत्पर रहे हैं।

यह है गुजरात को मोदी का अवदान ! उन्होंने राज्य की ओर से संगठित जन-संहार करवाया, किसानों को लूट कर, ग़रीब मज़दूरों की ज़िंदगी से हर प्रकार की सुरक्षा को ख़त्म करके दो-चार पूँजीपतियों की मुट्ठियाँ गर्म किया और नफरत के आधार पर वोटों की फ़सल काटी। बस ! इन सबका परिणाम आज सिर्फ गुजरात नहीं, पूरा देश भुगत रहा है। देश में तेजी से भुखमरी बढ़ रही है और उतनी ही तेजी से अंबानी अदानी की संपत्ति बढ़ रही है।

और, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अमित शाह आँखें तरेर कर कहते हैं - राहुल की इतनी हिम्मत कि गुजरात को मोदी के अवदान को चुनौती दें !

राहुल ने बिल्कुल सही कहा है - गुजरात में विकास पागल हो गया है, उसे होश में लाना होगा।

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