बड़ी बात कह गए राहुल गाँधी

राहुल गांधी के विचारों की यह उदारता उस सांस्कृतिक, राजनीतिक विरासत की याद दिलाती है, जिस पर भारत गर्व किया करता था।...

हाइलाइट्स

याद करें कुछ महीनों पहले संपन्न उत्तरप्रदेश चुनाव को, जिसमें गधे-घोड़े, कब्रिस्तान-श्मशान सब चुनावी मुद्दे में शामिल कर दिए गए थे। खैर.. इस बार का गुजरात चुनाव #BJP के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है, तो कांग्रेस के लिए नए जीवन का।

#Rahul_Gandhi in Gujrat on #BJP

राजीव रंजन श्रीवास्तव

गुजरात विधानसभा चुनावों के मद्देनजर #Rahul_Gandhi लगातार वहां के दौरे कर रहे हैं, रैलियां कर रहे हैं और लोगों से मिल रहे हैं। किसी भी #विधानसभा_चुनाव के पहले राजनैतिक दलों के बड़े नेता ऐसा ही करते हैं। चुनावी सभाओं और उनमें दिए जाने वाले भाषणों में सत्ता में बैठे दल के लोग अपनी उपलब्धियां गिनाते हैं, और कुछ नए वादे करते हैं। जबकि विपक्ष के लोग शासक की खिंचाई करते, उनकी नाकामियों को दर्शाते नजर आते हैं। इन आरोपों-प्रत्यारोपों में जनता के हित की बात हाशिए पर चली जाती है, केवल मीडिया को कुछ नयी सामग्री मिल जाती है, जिस पर विशेषज्ञ 24 घंटे चर्चा करते हैं।

याद करें कुछ महीनों पहले संपन्न उत्तरप्रदेश चुनाव को, जिसमें गधे-घोड़े, कब्रिस्तान-श्मशान सब चुनावी मुद्दे में शामिल कर दिए गए थे। खैर.. इस बार का गुजरात चुनाव #BJP के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है, तो कांग्रेस के लिए नए जीवन का। लगातार तीन बार से सत्तारूढ़ #भाजपा, प्रधानमंत्री के इस गृहप्रदेश को किसी कीमत पर गंवाना नहीं चाहेगी। दूसरी ओर #Congress इस प्रदेश पर अगर सत्ता में आती है, तो यह उसके लिए बहुत बड़ी राजनीतिक जीत होगी। कुछ समय पहले #राज्यसभा से #Ahmed_Patel की जीत से कांग्रेस में उत्साह भरा था और अब #Rahul_Gandhi की एक के बाद एक गुजरात यात्रा से यह उत्साह बढ़ता जा रहा है। वे समाज के हर तबके के लोगों से मिल रहे हैं और मोदी सरकार की खामियां भी गिना रहे हैं। लेकिन उनके भाषणों में विरोध के बावजूद एक तरह की शालीनता नजर आ रही है, जो आज के राजनीतिक माहौल में बहुत कम दिखाई देती है।

राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी में #इमरजेंसी के बाद की #Indira_Gandhi जैसी झलक दिख रही है। तब चुनाव में करारी शिकस्त खाने के बाद #इंदिरा_गांधी ने खुद को और कांग्रेस को नए सिरे से जनता से जोड़ा था। आज राहुल गांधी भी खुलेआम स्वीकार कर चुके हैं कि #यूपीए-2 के बाद #कांग्रेस में घमंड आ गया था और इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। वे भी अब नए सिरे से जनता से जुड़ रहे हैं।

#वडोदरा में व्यापारियों और बुद्धिजीवियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 की हार पार्टी की मदद नहीं कर सकी. उन्होंने कहा, इतनी बुरी तरह हारे कि पिट-पिटकर अक्ल आ गई। सबके बीच ऐसी स्वीकारोक्ति बड़ी बात है। लेकिन इससे बड़ी एक और बात राहुल गांधी ने गुजरात में कही, जो लोकतंत्र के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, कि #भाजपा_आरएसएस की तरह मेरी विचारधारा नहीं है। मैं उनसे लडूंगा। लेकिन मैं #BJP और #RSS मुक्तभारत के बारे में नहीं सोच सकता।

इस एक वाक्य से राहुल गांधी ने #महात्मा_गांधी, #जवाहरलाल_नेहरू के राजनैतिक दर्शन को फिर से भारत के सामने रखा है, जिसमें सबके लिए सम्मानपूर्वक स्थान है। भाजपा जब कांग्रेसमुक्त भारत की बात करती है, तो वह न केवल अपने विरोधियों के प्रति नफरत को दिखलाती है, बल्कि #लोकतंत्र की भावना के खिलाफ भी जाती है। ऐसा केवल तानाशाही में होता है कि जहाँ सिर्फ एक व्यक्ति का बोलबाला रहे और सब उसकी बात मानते रहें। भारत में फिलहाल ऐसा ही माहौल बना हुआ है। कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वाली #मोदी और #Amit_Shah की जोड़ी दरअसल सारे विरोधियों से ही मुक्ति चाहती है। जब #अमित_शाह #अमेठी में राहुल गांधी पर वार करते-करते उनकी दादी, परनाना तक चले गए, उस वक्त राहुल गांधी गुजरात में कह रहे थे कि मैं भाजपा से विचारधारा की लड़ाई लडूंगा, क्योंकि मेरी विचारधारा कांग्रेस की है। लेकिन मैं कभी #बीजेपी मुक्त भारत की बात नहीं करूंगा, क्योंकि उसकी विचारधारा को मानने वाले लोग भी भारत के ही हैं।

राहुल गांधी के विचारों की यह उदारता उस सांस्कृतिक, राजनीतिक विरासत की याद दिलाती है, जिस पर भारत गर्व किया करता था। जिसमें परस्पर विरोधी विचारों के लिए पर्याप्त स्थान था। राहुल गांधी ने नफरत और गुस्से पर भी अपने विचार बताए कि जब उनकी दादी और पिता की हत्या हुई थी, तो उन्हें बहुत तकलीफ हुई थी। लेकिन जब उन्होंने अपने पिता के हत्यारे प्रभाकरण और उसके बेटे के शव देखे, तो उन्हें दुख हुआ। उनके परिवार के लिए दुख हुआ। राहुल गांधी के ये विचार #बुद्ध, #अशोक और #गांधी की शिक्षा को पुनर्जीवित करते हैं। राजनीति में इंसानियत जगाते हैं।

#RajeevRanjanSrivastava

 

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