योगीजी, राममंदिर नहीं, रामराज्य चाहिए : गोरखपुर भी उसी यूपी में है जहाँ अयोध्या है

निजी आस्था का तमाशा किया जाएगा, तो सवाल क्यों नहीं उठने चाहिए। केवल अयोध्या तक आदित्यनाथ योगी का शासन नहीं है। गोरखपुर भी उन्हीं के प्रदेश में आता है, जहां सौ से ज्यादा मासूम बच्चे अस्पताल में मर गए।...

हाइलाइट्स

योगीजी को समझना होगा कि अयोध्या को आशंका की निगाह से लोग नहीं देखते, उस पर जो राजनीति होती आयी है, उससे समाज में शक पैदा हो गया है। अब तो वे राम की विशालकाय मूर्ति बनाने की घोषणा भी कर चुके हैं और बाबरी मस्जिद तोड़कर राममंदिर बनाना उनकी राजनीति का लक्ष्य ही था। अयोध्या में सरकारी खर्च पर दीवाली मनाने का ये सारा तामझाम इसी लक्ष्य के लिए तो किया जा रहा है।

राजीव रंजन श्रीवास्तव

पूरी #अयोध्या नगरी राममय है। घर-घर, गली-गली हर तरफ राम का नाम। सड़कें भगवा झंडे से पटी पड़ी हैं। सरकारी अमला राम की तैयारियों में जुटा पड़ा है। ..और आखिर में इस #कलियुग में #त्रेतायुग लाने की #मुख्यमंत्री #आदित्यनाथ_योगी की कोशिश सफल होती है और #दिवाली के एक दिन पहले ही अयोध्या में #राम का आगमन होता है। #पुष्पक_विमान असल में क्या था और कैसा था, यह तो किसी को नहीं मालूम। लेकिन बुधवार को छोटी दिवाली या नरक चौदस के दिन हमने देखा कि सरकारी हेलीकाप्टर भी पुष्पक विमान बन सकता है। उस पर #राम,  #लक्ष्मण और #सीता के भेष में सवार होकर #कलाकार आए और अयोध्या की प्रजा ने उन्हें ही साक्षात #भगवान मानकर पूजा-अर्चना की।

राम की माताओं की जगह #मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने उनकी आरती उतारी।

दरअसल, इस दौरान मुख्यमंत्री जी कई भूमिकाओं में थे। भरत की तरह खड़ाऊं भी उन्होंने संभाली थी और राजपुरोहितों की तरह राम के राज्याभिषेक का जिम्मा भी उन्हीं पर था।

यह देख कर दिल बाग-बाग हो गया कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं और एक साथ कई दायित्व वे अकेले निभाने में सक्षम हैं। बिल्कुल प्रधानमंत्री #नरेन्द्र_मोदी की तरह। #Modi  भी तो शिक्षक दिवस हो या विजय दिवस, खुद ही मोर्चा संभाल लेते हैं। #नोटबंदी या  #जीएसटी की घोषणा भी उन्होंने वित्त मंत्री को नहीं करने दी थी। विदेशमंत्री से ज्यादा विदेश यात्राएं प्रधानमंत्री खुद करते हैं और राज्यों में चुनाव हों तो स्टार प्रचारक बनकर खुद ही बार-बार जाते हैं। उत्तरप्रदेश की जीत में भी तो मोदीजी का बड़ा योगदान है। तब योगीजी थोड़े खिन्न थे, ऐसे समाचार थे। उस वक्त किसी को उम्मीद नहीं थी, कि उन्हें संसद से सीधे मुख्यमंत्री आवास पहुंचा दिया जाएगा। खैर... आदित्यनाथ योगी मुख्यमंत्री बने और तब से उनकी और मोदीजी की तुलना राजनीतिक हलकों में हो रही है।

अयोध्या में #दिवाली मनाने पर भी राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह #काशी की देव #दीपावली को टक्कर देगी?

बहरहाल, अयोध्या में राम मंदिर तो #BJP की राजनीति की नींव है। इसी मुद्दे को भुना-भुना कर फर्श से अर्श तक का सफर #भाजपा ने तय किया। लेकिन जो काम अटल-आडवानी और मोदी-शाह की जोड़ी नहीं कर पाई, उसे अब शायद आदित्यनाथ योगी करके दिखाना चाहते हैं। अयोध्या में दिवाली के एक दिन पहले पहुंच कर उन्होंने कहा कि कुछ लोग अयोध्या को आशंका की नजर से देखते हैं। अब अयोध्या पर शक की प्रवृत्ति खत्म होनी चाहिए। शायद उनका इशारा #राममंदिर निर्माण को लेकर था।

योगीजी को समझना होगा कि अयोध्या को आशंका की निगाह से लोग नहीं देखते, उस पर जो राजनीति होती आयी है, उससे समाज में शक पैदा हो गया है। अब तो वे राम की विशालकाय मूर्ति बनाने की घोषणा भी कर चुके हैं और बाबरी मस्जिद तोड़कर राममंदिर बनाना उनकी राजनीति का लक्ष्य ही था। अयोध्या में सरकारी खर्च पर दीवाली मनाने का ये सारा तामझाम इसी लक्ष्य के लिए तो किया जा रहा है। लेकिन जब विपक्ष सवाल उठाता है तो योगीजी को बुरा लगता है और वो कहते हैं कि यह मेरी व्यक्तिगत आस्था है उस पर विपक्ष कैसे हस्तक्षेप कर सकता है। सही बात है, आप किसी की भी पूजा करो, कोई सवाल क्यों उठाएगा? लेकिन अगर सरकारी खर्च पर निजी आस्था का तमाशा किया जाएगा, तो सवाल क्यों नहीं उठने चाहिए। आदित्यनाथ योगी अगर #त्रेतायुग की दिवाली मना रहे हैं, तो यह सवाल भी तो उठेगा ही झूठमूठ के राम को तो ले आए, लेकिन क्या वे रामराज्य ला पाएंगे? केवल अयोध्या तक आदित्यनाथ योगी का शासन नहीं है। गोरखपुर भी उन्हीं के प्रदेश में आता है, जहां सौ से ज्यादा मासूम बच्चे अस्पताल में मर गए। शायद उनके घरों में इस दिवाली एक भी दीया नहीं जलेगा। लेकिन योगी जी ने तो अकेले अयोध्या में दो लाख दीये जलाकर रिकार्ड बना डाले। बहुत से लोग राम की भक्ति करते हैं, क्योंकि उन्होंने मर्यादाओं और आदर्शों को नयी ऊंचाइयां दीं और ऐसे राज्य की स्थापना की, जहां जनता का हित ही सर्वोपरि था। शायद #गांधीजी भी इसी #रामराज्य की कल्पना करते थे। क्या हमारे देश में फिर से रामराज्य लौटेगा या राममंदिर की #राजनीति में रामराज एक सपना ही रहेगा?

DB Live

हस्तक्षेप मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। आप भी मदद करके इस अभियान में सहयोगी बन सकते हैं।

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।