रवीश बेजोड़ हैं. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि रवीश ईमानदार हैं

उनसे पहले जो बड़े पत्रकार हुए हैं, वे ईमानदार रहे हैं, नहीं भी रहे हैं. फ़र्क़ यह है कि रवीश पत्रकारिता की ईमानदारी को अपनी पत्रकारिता की ताक़त के रूप में देखते हैं....

हाइलाइट्स

उनसे पहले जो बड़े पत्रकार हुए हैं, वे ईमानदार रहे हैं, नहीं भी रहे हैं. फ़र्क़ यह है कि रवीश पत्रकारिता की ईमानदारी को अपनी पत्रकारिता की ताक़त के रूप में देखते हैं.

उज्ज्वल भट्टाचार्य

आधे से अधिक समय जर्मनी में रहता हूं. भारत में भी टीवी शायद ही देखता हूं. यानी रवीश के कार्यक्रम भी बहुत कम देख पाया हूं. लेकिन उसके बारे में सोचता रहता हूं, अपनी राय बनाने की कोशिश करता रहता हूं. स्पष्ट राय अभी तक नहीं बनी है, लेकिन कुछ एक बातें सामने रखना चाहूंगा.

कम से कम पांच दशकों से भारत के बड़े-बड़े पत्रकारों को देखने-सुनने-पढ़ने का मौक़ा मिला है. इनमें से कई रवीश से बड़े रहे हैं, बेहतर रहे हैं. लेकिन इस बीच मुझे लगता है कि रवीश ने भारत में पत्रकारिता के इतिहास में अपने लिये एक बेजोड़ जगह बना ली है. पत्रकारों की आने वाली पीढ़ियां इसके बारे में बात करेंगी.

पत्रकारिता को अगर कौशल या कला के रूप में देखा जाय तो रवीश में कोई बहुत ख़ास बात नहीं है. यह ज़रूर है कि पत्रकारिता को ज़मीन पर उतार लाने, आम आदमी की सोच की भाषा के स्तर पर उतार लाने के लिहाज से रवीश एक पायोनियर हैं. लेकिन उनकी यह क्षमता भी विकसित हो रही है. मुझे पूरा विश्वास है कि उसका उत्कर्ष, उसका विस्फोट देखना अभी बाक़ी है.

एक दूसरे लिहाज से रवीश बेजोड़ हैं. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि रवीश ईमानदार हैं. शायद हैं, शायद नहीं हैं. उनसे पहले जो बड़े पत्रकार हुए हैं, वे ईमानदार रहे हैं, नहीं भी रहे हैं. फ़र्क़ यह है कि रवीश पत्रकारिता की ईमानदारी को अपनी पत्रकारिता की ताक़त के रूप में देखते हैं. आज़ादी से पहले के पत्रकारों में यह बात देखी जा सकती थी. लेकिन वे खुलेआम कहते थे कि वे स्वतंत्रता संग्राम के प्रति प्रतिबद्ध हैं. रवीश किसी प्रतिबद्धता का दावा नहीं करते.

एक दूसरी ख़ासियत यह है कि रवीश बौद्धिकता को नकारते हुए पत्रकारिता करते हैं, भले ही वह ख़ुद बुद्धिजीवी हों. बड़ी बात यह है कि वह इस अबौद्धिक पत्रकारिता को बिना स्तर गंवाये प्रतिष्ठित कर सके हैं. इसके अलावा शोर-गुल और कुत्सित चीख के इस दौर में उन्होंने मद्धिम आवाज़ की गरिमा को प्रतिष्ठित किया है.

रवीश बहुत आगे बढ़ेंगे. लेकिन जितना कुछ वह हासिल कर चुके हैं, उसके लिये भी उन्हें याद किया जाता रहेगा.

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