आरएसएस नहीं चाहता मोदी 2019 के बाद पीएम रहें, घर बैठाया जाएगा मोदीजी को !

पीएम अपनी कोई उपलब्धि नहीं बता रहे, सिर्फ सफेद झूठ बोल रहे हैं। यानी 2018 में ही राजनीतिक उपलब्धियां बताने लायक मोदीजी के पास मसाला नहीं है।

जगदीश्वर चतुर्वेदी
Updated on : 2018-05-14 21:25:33

जगदीश्वर चतुर्वेदी

जब पीएम विकास, चुनाव घोषणापत्र, सामयिक यथार्थ, नोटबंदी, जीएसटी, बेकारी भूल जाएं तो छद्म अतीत याद आता है। मरे मसले याद आते हैं। पीएम अपनी कोई उपलब्धि नहीं बता रहे, सिर्फ सफेद झूठ बोल रहे हैं। यानी 2018 में ही राजनीतिक उपलब्धियां बताने लायक मोदीजी के पास मसाला नहीं है।

आरएसएस में 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद के ब्लूप्रिंट की तैयारी चल रही हैं। पीएम मोदी को 2019 के चुनाव तक इस्तेमाल किया जाएगा, यदि 2019 में भाजपा को सरकार बनाने का मौका मिलता है तो रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन को पीएम बनाकर आरएसएस अपनी नई इमेज पेश करने की तैयारी कर रहा है।

निर्मला के पक्ष में अनेक चीजें जाती हैं जिसके कारण वे आरएसएस की 2019 के बाद की रणनीति की प्रमुख किरदार बन सकती हैं।

आरएसएस नहीं चाहता कि मोदी 2019 के बाद पीएम रहें उनको पार्टी अध्यक्ष बनाकर रखा जा सकता है अथवा संयास देकर घर बैठाया जा सकता है।

कारण बहुत साफ हैं सन् 2002 के गुजरात के दंगे पीछा कर रहे हैं। आरएसएस मोदी को घर बैठाकर टेंशन मुक्त होना चाहता है, जिस तरह राममंदिर आंदोलन के मुखिया लालकृष्ण आडवाणी को घर बैठाकर मुक्त कर दिया गया, ठीक वैसे ही मोदीजी को घर बैठाया जा सकता है।

निर्मला सीतारमन आरएसएस की विचारधारा की संगति में एकदम फिट हैं। उनको लेकर कोई विवाद नहीं है, कोई हत्या, करप्शन आदि के आरोप नहीं हैं, ऊपर से वे स्त्री भी हैं और सक्षम हैं। इन सबसे बड़ी बात यह कि उनके पीछे कोई राजनीतिक बल भी नहीं है, एकदम निराधार और पूरी तरह आरएसएस के इशारों पर निर्भर हैं, उनकी इन्हीं विशेषताओं के कारण उनको रक्षामंत्री जैसा सबसे महत्व का पद दिया गया और वहां उन्होंने ठीक वही किया है जो संघ से आदेश मिला। इसके विपरीत मोदीजी के अनेक दंद-फंद हैं, आंतरिक चक्कर हैं। इस तरह की कोई चीज निर्मला सीतारमन के साथ नहीं है, वे एकदम निष्कलंक इमेज की नेत्री हैं, मंत्रीमंडल में जो लोग हैं उनमें बेहतर राजनीतिक समझ और अकादमिक योग्यता रखती हैं।

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