तीसरा मोर्चा अगर बना तो भाजपा की जीत की सम्भावना बढ़ जायेगी

अगर असदुद्दीन ओवैसी और चंद्रबाबू नायडू जैसे लोगों की मदद से तीसरा मोर्चा बन गया तब भी भाजपा को 2019 जीतना आसान हो जाएगा

शेष नारायण सिंह
Updated on : 2018-06-10 12:08:30

अगर असदुद्दीन ओवैसी और चंद्रबाबू नायडू जैसे लोगों की मदद से तीसरा मोर्चा बन गया तब भी भाजपा को 2019 जीतना आसान हो जाएगा

शेष नारायण सिंह

असदुद्दीन ओवैसी तीसरे मोर्चे की बात कर रहे हैं। अब मुझे लगने लगा है कि उन लोगों की बात में दम है जो कहते हैं कि असदुद्दीन ओवैसी की सेवाएँ भाजपा को उपलब्ध हैं। तीसरा मोर्चा अगर बना तो उससे भाजपा को ही फायदा होगा। उसके विरोध में पड़ने वाले वोट बंट जायेंगें।

तीसरे मोर्चे की जब बात उछाली गयी थी तो शरद पवार ने साफ़ कह दिया था कि जो जहां मज़बूत होगा वह उसी राज्य में भाजपा के खिलाफ लड़ेगा। इसीलिये लोगों ने चंद्रबाबू नायडू को खारिज कर दिया था क्योंकि वह भी तीसरे मोर्चे की बात कर रहे थे। आरोप लगाया गया था कि उन्होंने चालाकी और मिली भगत के ज़रिये अपने आपको एन डी ए से अलग किया है और तीसरे मोर्चे की बात करके वे भाजपा के लिए ही काम कर रहे हैं। इस खूंखार हमले के बाद ही वे बेंगलूरू में भाजपा विरोधी ताक़तों के साथ फोटो खिंचाने गए थे।

वैसे अगर सभी भाजपा विरोधी पार्टियों का पूरे देश में एक ही गठबन्धन बन गया तो नरेंद्र मोदी की जीत निश्चित है। उस हालत में वे उस गठबंधन के संभावित नेता के रूप में राहुल गांधी को पेंट करके जिताऊ रणनीति बना लेंगे। अगर असदुद्दीन ओवैसी और चंद्रबाबू नायडू जैसे लोगों की मदद से तीसरा मोर्चा बन गया तब भी भाजपा को 2019 जीतना आसान हो जाएगा। लेकिन अगर शरद पवार का फारमूला चला और अलग-अलग राज्यों में भाजपा विरोधी पार्टियों ने मिलकर नरेंद्र मोदी को चुनौती दी तो उनके लिए 2019 मुश्किल होगा। मसलन उत्तर प्रदेश में मायावती-अखिलेश, बिहार में लालू यादव-कांग्रेस, मध्य प्रदेश में कांग्रेस-मायावती-गोंडवाना विकास पार्टी, राजस्थान में कांग्रेस-मायावती, गुजरात में कांग्रेस-हार्दिक-जिग्नेश, महाराष्ट्र में एन सी पी -कांग्रेस या एन सी पी-शिवसेना, तमिलनाडु में डी एम के -कांग्रेस, दिल्ली में केजरीवाल-कांग्रेस ने मिलकर चुनौती दी तो एन डी ए के लिए राह बहुत ही मुश्किल हो जायेगी।

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