कहानी दो भारत की : इंसान भारत, शैतान भारत

अतिथि लेखक
कहानी दो भारत की : इंसान भारत, शैतान भारत

फ़िरोज़ खान

टोरंटो, (कनाडा)

भारत के केरल में सदी की सब से अधिक बारिश हुई. केरल बाढ़ में तबाह हो गया. भारत भर से लोग दिल खोल कर सहायता कर रहे हैं. मानवता की पुकार पर हर छोटा, बड़ा दौड़ा आ रहा है. हर कोई अपनी, अपनी जेब में हाथ डाल कर जो बन सकता है सहायता कर रहा है. सहायता करने वालों की बातें दिल खुश कर दे रही हैं.

मंदिर, मस्जिद, मदरसा और गिरजा घरों ने बिना नात, जात, धर्म देखे सब के लिए अपने दरवाजे खोल दिए. भारतवासियों ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि हम भले ही नात, जात और धर्मों में बंटे हों लेकिन मुश्किल समय में हम सब मानवता, इंसानियत के धागे से बंधे हुए हैं. मछुआरों ने विपदा में घिरों कि जो सेवा की वह बेमिसाल है. उस मछुआरे को भला कौन भूला सकता है जिस ने औंधे मुंह लेट कर लोगों को अपनी पीठ का इस्तेमाल कर नाव में चढ़ने दिया. और फिर उस मासूम बच्ची को कौन भूला सकता है जिस ने कई सालों तक साईकिल खरीदने के लिए पैसे जमा किये थे और वही पैसे आफत से घिरों के लिए दान कर दिए.

ऐसे तो कई लोग हैं जिन्होंने मुसीबत के समय में इंसानियत को ज़िंदा रखा. परदेस में बसे भारतीय और अन्य लोगों ने भी अपनी, जेब में हाथ डाला और जिस से जो बन सका दिया. अब भी दे रहे हैं. दूसरे मुल्कों की सरकारें भी सहायता करने से पीछे नहीं रहीं. इंसानियत की मिसालें पेश कर रही हैं.

दूसरी ओर एक और भारत की तस्वीर भी उभर कर सामने आयी. यह तस्वीर न केवल नाराज़ करने वाली थी बल्कि बड़ी भयानक थी. पहले वाली तस्वीर इंसानियत की मिसाल पेश करती है तो दूसरी वाली शैतानियत और हैवानियत को उजागर करती है.

कुछ दरिंदो ने सहायता न देने के सन्देश सोशल मीडिया पर रखे. उन का कहना था कि केरल धनी राज्य है उसे सहायता की आवश्यकता नहीं है! कुछ चवन्नी छाप नेताओं ने कहा कि केरल के लोग, मुस्लिम, ख्रीष्टी है और गौ मांस खाते हैं, इस लिए उन्हें सहायता नहीं करनी चाहिए. कुछ ने कहा सबरीमाला के मंदिर में महिलाओं को जबरन प्रवेश दिलाया गया इस लिए भगवान् नाराज हो गए और उन्होंने अतिवृष्टि कर केरलवासियों को सजा दी! कुछ ने कहा कि केवल हिन्दू संस्थाओं को ही सहायता दी जाए ताकि सहायता केरलवासी हिन्दुओं को ही पहुंचे!

क्या सोच है? इन्हें विपदा के मारों में भी धर्म नजर आता है. यह लोग मेरे हिसाब से तो इंसान हो नहीं सकते. शैतान के मुरीद, भक्त अवश्य हो सकते हैं.

मोदी जी ने भी केरल और केरलवासियों के साथ सौतेलापन दिखाया. अपनी सरकार की ओर से केवल 500 करोड़ देने की घोषणा की. जहाँ हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है, वहां केवल 500 करोड़. इस से बहुत कम नुकसान हुए राज्य जहाँ बीजेपी की सरकारें हैं कई अधिक की सहायता की. आखिर यह सौतेलापन क्यों? क्या केरलवासी भारतवासी नहीं है? क्या वे शुल्क नहीं देते? मोदी जी का यह कदम बिलकुल सही नहीं है. दक्षिण भारत के चार या पांच राज्य यदि कल को अलग होने की मांग करे तो इनमे उन का कसूर नहीं होगा. दबे-दबे शब्दों में ही सही लेकिन कुछ लोगों ने इस मांग को उठाया है.

मोदी जी की सरकार न खुद सही सहायता कर रही है बल्कि बाहर के देश जो सहायता करना चाहते है उन के रास्ते में भी रोड़े डाल रही है. बहुत गलत कर रही है.

सोशल मीडिया पर बाढ़ में सहायता कर रहे संघी स्वयंसेवकों की तस्वीरें रखी जा रही हैं. यह तस्वीरें या तो पुरानी हैं या फिर फोटोशॉप की हुई हैं. एक ऒर सहायता नहीं करना, सहायता करने वालों के रास्ते में रोड़े डालना और दूसरी ऒर अपने स्वयंसेवकों की सहायता करनेवाली तस्वीरें डालना लोगों को बेवक़ूफ़ बनाने वाली बात है. लोग भी समझ रहे हैं.

भारत की दो तस्वीरें. इंसान भारत, शैतान भारत. इंसान भारत की ही जीत होगी.

लेखक टोरंटो, (कनाडा) स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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