हम मर्द औरतों को सताते हैं, क्योंकि हम उनसे डरते हैं

उज्ज्वल भट्टाचार्या

मुझे पता है कि हिन्दुओं के मुक़ाबले मुसलमानों के बीच तलाक़ के मामले बहुत कम होते हैं.

मुझे पता है कि तीन तलाक़ के मामले तो लगभग नहीं के बराबर होते हैं.

मुझे यह भी पता है कि मुसलमानों के बीच तलाक़ दिये बिना पत्नी का परित्याग लगभग असंभव है, जबकि हिन्दुओं में अक्सर ऐसा देखा जाता है.

और मैं तीन तलाक़ के ख़ात्मे के पक्ष में हूं. यह धार्मिक नियम के दुरुपयोग को ख़त्म करेगा, मुस्लिमों को भरोसा देगा, समूचे मुस्लिम समुदाय को आधुनिक युग के अनुरूप बनाएगा.

मुझे पता है कि यह काम कानून लादकर नहीं किया जा सकता है, समुदाय के अंदर से आवाज़ें उठनी चाहिये.

ऐसी आवाज़ें उठ रही हैं. मैं उनका स्वागत करता हूं. मैं उनका समर्थन करता हूं.

जहां तक अनुदारवादी विरोध का सवाल है, वह स्वाभाविक है - हर मसले पर हर समुदाय में होता रहा है.

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