और कातिल हुआ आधार, एक और बच्चे की ली जान,,, संतोषी के बाद बालकृष्ण

11 वर्षीय बालक कोरा बालकृष्ण ने फांसी लगाकर ख़ुदकुशी कर ली क्योंकि उसकी 3 उंगलियां जुडी होने से कई आधार केंद्रों पर कोशिश के बावजूद भी उसका आधार नहीं बन पा रहा था...

अतिथि लेखक

बिना आधार के स्कूल में पढ़ने का देशद्रोही काम

कातिल आधार

मुकेश असीम

विशाखापत्तनम जिले के दिगुवा कोलपुत गांव के 11 वर्षीय बालक कोरा बालकृष्ण ने फांसी लगाकर ख़ुदकुशी कर ली क्योंकि उसकी 3 उंगलियां जुडी होने से कई आधार केंद्रों पर कोशिश के बावजूद भी उसका आधार नहीं बन पा रहा था, जिसके लिए उस पर स्कूल भारी दबाव बना रहा था। आधार नहीं तो मोदी सरकार के महान राष्ट्रवादी नियमों से वह फर्जी बच्चा था तो बिना आधार के स्कूल में पढ़ने का देशद्रोही काम कर रहा था! आधार चक्र चला, फर्जी बच्चे रूपी राक्षस का वध कर दिया! वाह रे, देशभक्तों!

झारखंड की 11 साल की संतोषी कुमारी भी ऐसे ही फर्जी होकर राशन का खाना खाने का देशद्रोही कार्य कर रही थी, इतवारी देवी नाम की वृद्धा भी। ऐसे ही उत्तराखंड के 53 हजार अपंग, देश भर में करोड़ों बुढ़ापा पेंशन ही नहीं रिटायरमेंट पेंशन लेने वाले, राशन लेने वाले, स्कूलों में छात्रवृत्ति पाने वाले बच्चे, अपंग, वृद्ध, बीमार, असहाय, श्रमिक - सब फर्जी देशद्रोही क्योंकि या तो उनके पास कोई पहचान पत्र नहीं है, उनकी उंगलियां/हाथ नहीं हैं, या उनकी रेखाएं मिट गईं हैं, उनका आधार बनता ही नहीं; बना हो तो वे बायोमेट्रिक देकर खुद को मोदी की अफसरशाही के सामने असली सिद्ध करने किसी दफ्तर जाने में असमर्थ हैं, अगर किसी तरह चले भी जाएं तो वहां उनकी उंगलियां पहचानी नहीं जातीं, मशीन-नेटवर्क काम नहीं करता! बस हो गए फर्जी!

इसलिए ये सब फर्जी देशद्रोही हैं जिनको धराशाई कर बजट घाटा कम करने के लिए मोदी का आधार चक्र चल रहा है

असली सिद्ध होने के लिए तो दस, बीस, पचास हजार करोड़ रुपये की चोरी करनी होती है, तब असली देशभक्त घोषित होकर हुकूमत की ओर से बीस-पचास हजार करोड़ रु का और कोई ठेका भी दिया जा सकता है।

देखो अनिल अम्बानी को, असली देशभक्त है!

Visakhapatnam: 11-year-old Boy Commits Suicide as he Failed to Get Aadhaar

मुकेश असीम की एफबी टाइमलाइन से

 

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