वारेन हेस्टिंग्स का सांड : राष्ट्रपति की सुरक्षा में केवल राजपूत, जाट और सिख.. मनुस्मृति संविधान कीओर पहला कदम

जी हां, अब दलित राष्ट्रपति की सुरक्षा में, अंग्रजों की भाषा में, केवल लड़ाकू जातियों के जवानों -- राजपूत, जाट और सिख ही भर्ती किए जाएंगे.....

 

राजीव मित्तल

राष्ट्रपति की सुरक्षा में केवल राजपूत, जाट और सिख..

जी हां, अब दलित राष्ट्रपति की सुरक्षा में, अंग्रजों की भाषा में, केवल लड़ाकू जातियों के जवानों -- राजपूत, जाट और सिख ही भर्ती किए जाएंगे..

एक सौ पचास दस्ते वाले president's bodyguard का काम गाहे बगाहे तुरही बजाते हुए मार्च पास्ट करना है ताकि राष्ट्रपति भवन के मेहमान आनंद उठा सकें..

जब मामला सेरेमोनियल रिझाव का हो तो तो हर जवान की ऊंचाई ( साढ़े छह फुट के आसपास), बदन का शानदार गठन, वर्दी की कड़क, जूतों की हनक और सिर पर तुर्रेदार पगड़ी इन सबको सलीके से धारण करना कोई मज़ाक नहीं..

1773 में ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स के दिमाग की उपज है ये एक साइज वाले बॉडीगार्ड दस्ते.. उसके बाद इनके नाम और काम तो बदलते रहे पर स्वरूप वही रहा...

हालांकि लाल फ्रॉक वाली बंगाल आर्मी बनाने वाले रॉबर्ट क्लाइव ने अपनी पहली रेजिमेंट में पूराबियों, रुहेल पठानों को ही भर्ती किया था.. लेकिन उसके तुरंत बाद आए वारेन हेस्टिंग्स को अपनी सुरक्षा के लिए लड़ाकू जाति वाले राजपूत, जाट और जाट सिख इसलिए पसंद आए, क्योंकि वे लंब तड़ंग होते थे.. अब sc, St और बनिया बक्कालों और मुंशियों का उनसे क्या मुकाबला...

The President, Shri Ram Nath Kovind congratulating Shri M. Venkaiah Naidu after taking oath as the Vice President, at a Swearing-in-Ceremony, at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on August 11, 2017.Photo PIB

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