दिल्ली : पांच दिन से बेपानी शकरपुर के नल

दुःखद है कि बुनियादी ज़रूरत के ऐसे मसलों को लेकर मीडिया भी कोई ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं बनाता।...

अरुण तिवारी

संयुक्त राष्ट्र संघ की ताज़ा जल विकास रिपोर्ट - 2018 ने आपको डराया होगा। दिल्ली के शकरपुर वासियों को उनके नल से निकलता सीवेज का पानी डरा रहा है। मैं सुंदर ब्लॉक में रहता हूं। पिछले पांच दिन से सुंदर ब्लॉक और आसपास के क्षेत्र में पानी की बिल्कुल ही सप्लाई नहीं है। सुबह साढे़ छह बजे से सात बजे के बीच बूस्टर पंप चलाने पर सीवेज पाइप लाइनों से खिंचकर काला पानी आता है। इसके बाद यह भी नहीं।

गौर करने की बात है कि इस इलाके में बोर करने पर प्रतिबंध है। पुलिस, जल बोर्ड व स्थानीय प्रशासन को घूस दे दें, तो कोई प्रतिबंध नहीं है; लिहाजा, भ्रष्टाचार को बढ़ाने वालों के लिए कोई जल संकट नहीं है। मेरे जैसे जो सदाचार की टोपी पहनकर बैठे हैं, वे या तो बाज़ार से खरीदकर पी रहे हैं अथवा बीमार होकर इलाज में पैसे फूंकने को विवश हो रहे हैं।

20 हज़ार लीटर की ज़ीरो बिलिंग की केजरीवाल सरकार की योजना को कुछ तो मीटर रीडरों के खेल पलीता लगा रहे हैं और कुछ जलापूर्ति में लगातार बढ़ती लापरवाही। सीवर का पानी ओवर फ्लो होकर सड़कों पर बह रहा है, सो अलग बीमारी का घर है। यह लापरवाही, पानी बेचने वाली कंपनियों के साथ जलबोर्ड अधिकारियों अथवा नेताओं की भ्र्ष्ट मिलीभगत की वजह से भी हो सकती है ।  पिछले नौ महीने से समय-समय पर यही हो रहा है।

लोगों द्वारा शिकायत करने पर भी किसी के कान पर जूं नहीं रेंग रही। निगम पार्षद इसे जलबोर्ड का मसला बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं और विधायक महोदय तो फिलहाल पिक्चर से ही गायब हैं। विपक्षी दलों के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को खैर, ऐसे मसलों की सुध ही तब आती है, जब चुनाव सिर पर हों। दुःखद है कि बुनियादी ज़रूरत के ऐसे मसलों को लेकर मीडिया भी कोई ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं बनाता। लगता है कि सरकार, प्रशासन और मीडिया को जल के लिए किसी नये जनांदोलन का इंतज़ार है। क्या शकरपुरवासी एकजुट होंगे ?

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