ममता ने हमें झूठ का आदी बनाया मोदी ने उस पर हरी-भरी खेती की

राजनीति में संगठित और नियोजित झूठे प्रचार अभियानों को पहचानने का नजरिया विकसित किए बिना मोदी-ममता-केजरीवाल आदि से मुक्ति संभव नहीं है।...

ममता ने हमें झूठ का आदी बनाया मोदी ने उस पर हरी-भरी खेती की

झूठ को समझो मित्र ! Who is mamata didi

जगदीश्वर चतुर्वेदी

झूठा प्रचार करके धराशाही करने का नया तूफान बंगाल के वाममोर्चे के खिलाफ “ममता बनर्जी” ने 2007-08 से शुरू किया। सिंगूर-नंदीग्राम से उसे नई बुलंदियों तक पहुँचाया।

ममता Mamata Banerjee के प्रचार से सब प्रभावित हुए। वाम शासन और वाम का बंगाल में पतन और भयानक उत्पीड़न हुआ, वाम संगठनों पर अभूतपूर्व हमले हुए, ममता शासन में आई, लेकिन आज तक किसी वाम मंत्री-मुख्यमंत्री के खिलाफ एक भी भ्रष्टाचार का आरोप सिद्ध नहीं कर पाई, जबकि सारा मीडिया, मानवाधिकार संगठन, भाजपा, स्वतंत्र वाम आदि सब उसके सुर में सुर मिला रहे थे, यहां तक कि स्वतंत्र-वाम बौद्धिकों का बड़ा समूह उसके प्रचार से प्रभावित हो गया, किसी ने ममता के प्रचार पर अविश्वास नहीं किया। सब यही मानकर चल रहे थे कि ममता जो बोल रही है सच बोल रही है सच के अलावा कुछ नहीं बोल रही।

झूठ का प्रचंड प्रचार अभियान था ममता बनर्जी का चुनाव अभियान

Mamta Banerjee's election campaign was a huge campaign of lies

वाम के खिलाफ झूठ के प्रचंड तूफान को सभी रंगत के वाम विरोधियों ने सहयोग और समर्थन दिया। मेरी जानकारी में राजनीति में झूठ का यह प्रचंड प्रचार अभियान था। ममता को सफलता मिली, वाम हारा, उसके हजारों कार्यकर्ता विभिन्न तकलीफों से गुजरे, संगठन तोड़ दिया गया। ममता सफल रही उसे सत्ता मिल गयी, लेकिन वाम के खिलाफ लगाए एक भी आरोप को वो आज तक सिद्ध नहीं कर पाई।

झूठ की आंधी में पहले वाम लुढ़का, फिर कांग्रेस लुढ़की

ममता के झूठे प्रचार की सफलता ने आरएसएस को गहरे प्रभावित किया और नए फॉरमेट के साथ 2007-08 में मोदी को निर्मित किया गया, बाद में मनमोहन सरकार के खिलाफ प्रचंड झूठ की आंधी चलाई गई। परिणाम सामने है, झूठ की आंधी में पहले वाम लुढ़का, फिर कांग्रेस लुढ़की।

हम सब झूठ को सच मानने के तब तक आदी हो चुके थे, ममता ने आदी बनाया मोदी ने उस पर हरी-भरी खेती की। अब हम सब परेशान है हाय मोदी ने मारा, हाय मोदी ने मारा, लेकिन कभी ममता के बारे में नहीं बोलते कि ममता ने मारा, ममता ने झूठ बोला।

कहने का आशय यह कि राजनीति में संगठित और नियोजित झूठे प्रचार अभियानों को पहचानने का नजरिया विकसित किए बिना मोदी-ममता-केजरीवाल आदि से मुक्ति संभव नहीं है।

झूठे प्रचार प्लस माफिया गिरोहों के हमले प्लस साइबर सेना की बमबारी ने सामान्य नागरिक का सारे देश में जीना दूभर कर दिया है। पता नहीं मित्र लोग यह समझने की कोशिश भी करेंगे या नहीं।

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