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दुनिया बदल रही है और वतन ट्रंप के हवाले

पलाश विश्वास

कल दुनिया डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में होगी। कल्कि अवतार कम थे। अब सोने पर सुहागा। 20 जनवरी को बराक ओबामा की जगह राष्ट्रपति पद संभालने से पहले ही मैडम तुसाद म्यूजियम में डॉनल्ड ट्रंप ने ओबामा की जगह ले ली है।  अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की मोम की प्रतिमा का लंदन के मैडम तुसाद म्यूजियम में अनावरण किया गया। इस प्रतिमा में धूप में टैन हुई उनकी त्वचा और खास तरह से संवारे गए उनके बालों का दिखाया गया है।  

बहरहाल एजेंडे के मुताबिक दस लाख टके के सूट से बहुत मैचिंग है यह मोम की प्रतिमा। डर यही है कि अमेरिका में गृहयुद्ध और बाकी दुनिया में जो युद्ध घनघोर है और जिसमें फिर अमेरिका और इजराइल के साथ भारत पार्टनर है,  दिशा-दिशा में सुलगते ज्वालामुखियों की आग में दुनिया अगर बदल रही है तो दुनिया किस हद तक कितनी बदलेगी, क्या भगवा झंडा व्हाइट हाउस पर भी लहरायेगा और सर्वव्यापी इस भीषण आग में मोम की यह प्रतिमा कितनी सही सलामत रहेगी।

सूट भी मैचिंग और मंकी बातों का अंदाज भी वही। अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी सनसनीखेज घोषणाओं और आलोचना को लेकर टि्वटर पर छाए रहते हैं,  हालांकि उनका यह कहना है कि उन्हें ट्वीट करना बिल्कुल पसंद नहीं है लेकिन बेईमान मीडिया के खिलाफ अपने बचाव में यह करना पड़ता है।

खेती और किसान मजदूर कर्मचारी तबाह हैं। रोजगार आजीविका खत्म हैं। कारोबार, उद्योग धंधे भी मेकिंग इन इंडिया से लेकर नोटबंदी और डिजिटल कैशलैस इंडिया हवा हवाई है। तबाही के दिन शुरु हो गये और न जाने सुनहले दिन कब आयेंगे। अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप 20 जनवरी को शपथ लेंगे।

शपथ ग्रहण समारोह का थीम "मेक अमेरिका ग्रेट अगेन" है। इतिहास का यह पुनरूत्थान नस्ली सत्ता की चाबी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी निवेशकों को रिझाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं लेकिन कारोबार में जोखिम पर रिपोर्ट तैयार करने वाली एक एंजेंसी क्रॉल का मानना है कि भारत में अभी भी बिजनेस में फर्जीवाड़ा काफी ज्यादा है। हालांकि इस साल हालात पहले से बेहतर हुए हैं।

सर्वे के मुताबिक करीब 100 में 68 फीसदी निवेशकों ने माना है कि उनके साथ फर्जीवाड़ा हुआ है जबकि 73 फीसदी लोगों के साथ साइबर हैकिंग हुई है।  

हालात हमारे नियंत्रण से बाहर है। भारतीय रिजर्व बैंक के साथ भारतीय बैंकिंग का जो दिवालिया हाल है, बजट में भी कालाधन का राजकाज मजबूत होना है और नस्ली नरसंहार का सिलसिला थमने वाला नहीं है। बीमा का विनिवेश तय है। रेलवे का निजीकरण तेज है और रक्षा आंतरिक सुरक्षा विदेशी कंपनियों और विदेशी हितों के हवाले है।

यही संघ परिवार का रामराज्य है औऱ उनका राम अब डोनाल्ड ट्रंप हैं। कल जिनके हवाले दुनिया है।

रोहित वेमुला की बरसी पर उसकी मां की गिरफ्तारी भीम ऐप और नोट पर गांधी के बदले बाबासाहेब का सच है। संविधान के बदले मनुस्मृति विधान है।

संघ एजेंडा में बाबासाहेब का वही स्थान है जैसा कि डोनाल्ड ट्रंप के कुक्लाक्सक्लान का नया अश्वेत सौंदर्यबोध का सत्ता रसायन  है। पहले ही वे जूनियर मार्टिन लूथर किंग से मुलाकात करके भारत में अंबेडकर मिशन की तर्ज पर मार्टिन लूथर किंग के सपने को जिंदा ऱकने का वादा किया है और नस्ली नरसंहार के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल करने वाले अब्राहम लिंकन की विरासत पर दावा ठोंक दिया है जो काम हमारे कल्कि अवतार का भीम ऐप है और जयभीम का विष्णुपद अवतार है और तथागत का तिरोधान परानिर्वाण है।

गौर करें,  अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप शुक्रवार (20 जनवरी) को 2 बाइबल का इस्तेमाल करते हुए शपथ ग्रहण करेंगे,  जिनमें एक बाइबल वह होगी,  जिसका इस्तेमाल अब्राहम लिंकन ने अपने पहले शपथ ग्रहण में किया था,  जबकि दूसरी बाइबिल ट्रंप के बचपन के समय की है। यह बाइबिल 12 जून 1955 को उनकी मां ने उन्हें भेंट की थी।

उत्तराखंड में एनडी तिवारी और यशपाल आर्य की संघ से नत्थी हो जाने पर पहाड़ों का क्या होना है, यह सोचकर दहल गया हूं तो यूपी में भी नोटबंदी के करिश्मे के बीच मूसलपर्व के अवसान बाद आखिरकार चुनाव नतीजे में जनादेश का ऊंट करवट बदलने के लिए कितना स्वतंत्र है, यह फिलहाल अबूझ पहेली है। पंजाब में भी संघी अकाली सत्यानाश का सिलसिला खत्म होते नजर नहीं आ रहा है।

ग्लोबल हालात के साथ साथ भारत में भी नस्ली कुक्लाक्स क्लान केसरिया है। ओबामा केयर (स्वास्थ्य सेवा से संबंधित कार्यक्रम) को रद्द करने की ट्रंप की धमकी से वैसे दो करोड़ अमेरिकियों को सदमा लगा है,  जो उससे लाभान्वित हो रहे हैं। उनका मंत्रिमंडल सफल अरबपति व्यावसायियों और वाल स्ट्रीट अधिकारियों के एक क्लब की तरह लगता है,  जिनकी संयुक्त संपत्ति 12 अरब अमेरिकी डॉलर है!

भारत में मीडिया एक दामाद के कथित कारनामों का राग अलापता रहता है,  लेकिन अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति को इस संदर्भ में किसी तरह की नैतिक दुविधा का कष्ट नहीं भुगतना पड़ रहा।  उन्होंने अपने दामाद जारेड कशनर को अपना वरिष्ठ सलाहकार नामित किया है।

हालात का मिलान करके आजमा लीजिये कि युगलबंदी का नजारा जलवा क्या है। हमारे यहं नोटबंदी है तो वहां ओबामा केयर बंद है।

आज सुबह नींद खुलते ही टीवी स्क्रीन पर लावारिस किताबों और स्कूल बैग के बीच बच्चों की लाशों के सच का सामना करना पड़ा है।

एटा की दुर्घटना में स्कूली बच्चों की लाशों की गिनती से कलेजा कांप गया है और रोज तड़के बच्चों को नींद से जगाकर स्कूल भेजने वाले तमाम मां बाप देश भर में इस दृश्य की भयावहता से जल्द उबर नहीं सकेंगे।

उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी है और कुहासा घनघोर है। ऐसे में कुहासा के मध्य स्कूलों को जारी रखने का औचित्य समझ से परे हैं, जिस वजह से यह दुर्घटना हो गयी।

सोदपुर में सुबह सुबह रेलवे स्टेशन पर अफरा तफरी, तोड़ फोड़ और रेल अवरोध का सिलसिला देर तक जारी रहा और सियालदह से रेलयातायात बाधित हो गयी।

थ्रू ट्रेन की सूचना न मिलने की वजह से सरपट दौड़ती ट्रेन की चपेट में एक वृद्ध की यहां सुबह ही मौत हो गयी है और यह रोज-रोज का रोजनामचा कहीं न कहीं दोहराया जाता है।

इन तमाम हादसों में सबसे भयानक हादसा अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का उत्थान है जो फिर हिरोशिमा और नागासाकी का अनंत सिलसिला है और नस्ली नरसंहार का यह ग्लोबल हिंदुत्व पूरीतरह जायनी विपर्यय है, जिसके खिलाफ अमेरिकी जनता प्रतिरोध के मिजाज में ओबामा की विदाई के साथ-साथ सड़कों पर लामबंद है और इसके विपरीत भारत में और अमेरिका में भी बजरंगियों में जश्न का माहौल है। जश्न में नाचने गाने वाले भी खूब हिंदुस्तानी हैं, स्टार सुपरस्टार, ब्रांड एबेसैडर है।

कल अपनी विदाई प्रेस कांफ्रेस में बाराक ओबामा ने अब तक का उनका सर्वश्रेष्ठ भाषण दिया है और अमेरिकियों को उम्मीद भी है कि उनका सपना मरा नहीं है।

बाराक और मिसेल ने बहुलता और विविधता का लोकतंत्र बचाने के लिए जाते जाते अमेरिका में सुनामी रच दिया है, ऐसा राजनीतिक प्रतिरोध हमारे देश में फिलहाल अनुपस्थित है।

प्रेजीडेंट चुने जाने के बाद से शून्य से पांच सात डिग्री सेल्सियस के नीचे तापमान से बेपरवाह ट्रंप महल के सामन खुले आसमान के नीचे बर्फवारी के बीच जनता का हुजूम अब भी चीख रही हैः नाट आवर प्रेजीडेंट। कल उनके शपथ ग्हणके बाद महिलाएं उनके खिलाफ मार्च करेंगी। अमेरिकी इतिहास में वे सबसे अलोकप्रिय अमेरिकी राष्ट्रपति हैं और जिनका चेहरा फासिस्ट और नात्सी दोनों है। फिर भी भारत में उनके पदचाप का उत्सव है।

बहरहाल, अमेरिकी प्रेस एसोसिएशन ने कल शपथ ले रहे अमेरिकी हिटलर के नस्ली राजकाज के खिलाफ कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि आप हद से हद आठ साल तक व्हाइट हाउस में होंगे लेकिन प्रेस अमेरिकी लोकतंत्र का हिस्सा है, जो रहा है और रहेगा। हम क्या छापेंगे, क्या नहीं छापेंगे, यह हमारे विवेक पर निर्भर है और आप क्या बतायेंगे या नहीं बतायेंगे, यह आपकी मर्जी होगी लेकिन सच कहने से आप हमें रोक नहीं सकते और न आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी तरह का अंकुश सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप के हवाले दुनिया है तो उस दुनिया में निरंकुश सत्ता के नस्ली नरसंहार के खिलाफ इंसानियत का प्रतिरोध भी तेज होने वाला है। हम अपने यहां ऐसा नहीं देख रहे हैं। न आगे देखने के कोई आसार हैं।

इस बुरे वक्त के लिए यह सबसे अच्छी खबर है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण करने से पहले अमेरिकी प्रेस कोर ने साफ तौर पर कह दिया है कि ट्रंप उन पर फरमान जारी नहीं कर सकते बल्कि पत्रकार अपने एजेंडा खुद सेट करेंगे।

काश! भारतीय मीडिया निरंकुश सत्ता को इस तरह की कोई चुनौती दे पाता।

समझा जाता है कि नये अमेरिकी राष्ट्रपति प्रेस को व्हाइट हाउस से बाहर रखने की तैयारी कर रहे हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप आगामी शुक्रवार को शपथ ग्रहण करने के बाद 40 फीसदी लोगों के समर्थन के साथ हाल के समय के सबसे कम लोकप्रियता वाले राष्ट्रपति होंगे। मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा के मुकाबले ट्रंप की लोकप्रियता का आंकड़ा 44 अंक कम है।  सीएनएन-ओरआरसी के नए सर्वेक्षण के अनुसार हाल के तीन राष्ट्रपतियों से तुलना करें तो ट्रंप की लोकप्रियता उनके मुकाबले 20 अंक कम हैं। ओबामा ने 2009 में जब दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली थी तो उनकी लोकप्रियता का ग्राफ 84 फीसदी तक था।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनते ही डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आपको हिंदुत्व का बड़ा प्रशंसक बताते हुए कहा कि अगर वह राष्ट्रपति बनते हैं तो हिंदू समुदाय व्हाइट हाउस के सच्चे मित्र होंगे।

ट्रंप ने पीएम मोदी को महान शख्सियत करार देते हुए कहा कि वह भारतीय प्रधानमंत्री के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।

ट्रंप ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है,  वह अमेरिका का स्वाभाविक सहयोगी है।

ट्रंप ने आतंकवाद के खिलाफ भारत द्वारा चलाए जा रहे मुहिम को बेहतरीन बताते हुए कहा कि इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका भारत के साथ है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर वह राष्ट्रपति बनते हैं तो भारत के साथ दोस्ती को और मजबूत करेंगे।

इस बीच प्रतिष्ठित भारतीय-अमेरिकी विद्वान एश्ले टेलिस ने चेतावनी दी है कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट की नीति भारत और अमेरिका के संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती है।

साथ ही उन्होंने कहा कि ट्रंप को चीन से मिल रही चुनौतियों से निपटने के लिए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की जरूरत है।

एक शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक के सीनियर फेलो टेलिस ने कहा कि ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट की रणनीति अमेरिका-भारत के रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकती है।  ट्रंप को चीन से मिलने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ संबंध मजबूत करने चाहिए।

अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार आगामी ट्रंप प्रशासन टेलिस को भारत में अमेरिका का अगला दूत बनाने पर विचार कर रहा है। अभी टेलिस और ट्रंप की टीम ने इन खबरों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

दो साल पहले मोदी से आसमानी उम्मीदें थीं। अब दो साल हो गए हैं। तो कितनी उम्मीदें पूरी हुईं। मेक इन इंडिया का क्या हुआ? कितना डिजिटल हुआ इंडिया? कितना स्वच्छ हुआ भारत? अर्थव्यवस्था में कितना सुधार हुआ? अच्छे दिन कोई हकीकत है या अब भी ख्वाब है?

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