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अटल जी से आज उन्हें क्या सबसे ज्यादा सीखने की ऐतिहासिक जरूरत है जो RSS/BJP से लड़ने का दावा कर रहे हैं

Mayawati shared with Narendra Modi and Atal Bihari Vajpayee

अटल जी से आज उन्हें क्या सबसे ज्यादा सीखने की जरूरत है जो RSS/BJP से लड़ने का दावा कर रहे हैं

स्वर्गीय अटल जी से सीखने की ऐतिहासिक जरूरत

आलोक वाजपेयी

राजनीति के दो अहम हिस्से हैं – राजनीतिक सोच/ विचारधारा और उस सोच/ विचार को फलीभूत करने के लिए ठोस रणनीति। इन दोनों अवयवों पर अटल जी से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

राजनीतिक दल को अपनी विचारधारा को जड़ सूत्र रूप में लोगों के सामने नही रखना चाहिये। समाज बहुत बड़ा समुद्र है, इसमें बस आपकी सोच मानने वाले लोग ही नही रहते, भांति-भांति के लोग व विचार समाज मे हैं। ज्यादातर तो ऐसी सोच वाले ही होते हैं जो आपकी सोच से इत्तेफाक नही रखते होंगे, वो आपको संशय से देखेंगे, बिदकेंगे। उन्हें अपनी ओर मिलाना उनकी सहानुभूति पाना राजनीतिक कौशल है। अगर आप केवल like minded लोगों के बीच ही अपनी राजनीतिक सोच को रखेंगे तो भले ही आप स्वयं में सन्तुष्ट रहें लेकिन आपकी सोच समाज के वृहत्तर लोगों में नही जा पाएगी। साथ ही, कुछ समय बाद आपकी राजनीतिक सोच अपने ही लोगों के बीच सिर फुटौवल के रूप में तब्दील हो जाएगी। like minded लोगों के बीच ही फालतू के संघर्ष होने लगेंगे, आप कभी बड़े उद्देश्य के लिए एकजुट हो ही नही पाएंगे। जैसा कि भारत में और बाहर भी कम्युनिस्ट विचारधारा की राजनीतिक पार्टियों के साथ हुआ।

राजनीतिक सोच/ राजनीतिक विचारधारा को बहुत ही जटिल और तरल रूप में ले के चलना होता है, उसमें तमाम सम्भावनाएं रखनी होती हैं ताकि समाज के तमाम वर्गों के साथ भी उसका सम्बन्ध बनाया जा सके और एक सूत्रता कायम रखी जा सके। अटल जी का राजनीतिक सफर इसका प्रमाण है।

अटल जी के बारे में ये जो कथन है कि व्यक्ति अच्छे हैं उनकी पार्टी बुरी है, वास्तव में अटल जी की राजनीति पर सर्वश्रेष्ठ प्रशंसा है। उन्होंने अपनी राजनीतिक विचारधारा को फैलाने के लिए हठवादी straight forward भाषा नहीं चुनी बल्कि हिंदी भाषी जनता की सांस्कृतिक चेतना के मद्देनजर एक विशिष्ट शैली विकसित की जिससे आरएसएस की सोच को राजनीतिक धरातल पर व्यापक होने फैलने में मदद मिली। विचार के फैलाव के लिए विचारधारात्मक संघर्ष अनिवार्य है।

अटल जी ने विचारधारात्मक संघर्ष के लिए बहुत बारीक तरीके से लंबे समय तक काम किया और उन्हें सफलता भी मिली।

रणनीति, राजनीति का ऐसा बिंदु है जिस पर बुद्धिजीवी प्रायः ध्यान ही नहीं देते। असलियत यह कि आप अपनी अच्छी सोच पकड़े बैठे रहो, अगर आपके पास अपनी सोच को समाज में स्वीकृत बनाने की रणनीति नहीं है तो या तो आप अपनी ऊर्जा व्यर्थ करेंगे या स्वान्तः सुखाय एक्टिव होने का भरम पाले रहेंगे।

अटल जी की रणनीति को पोलिटिकल एक्शन के क्षेत्र में कम, बल्कि विचारधारात्मक संघर्ष और वर्चस्व कायम करने के क्षेत्र में समझना चाहिए।

एक आखिरी बात, आप हिंदी क्षेत्र के किसी शहर कस्बे में चले जाइये। आपको अटल जी से मिलने वाले लोग, उनके निजी संस्मरण मिल जाएंगे। जनता से एक सतत् सम्वाद उनकी विशेषता रही। अपने से अलग लोगों से किस प्रकार रिश्ते बनाये जाएं, कैसे उन्हें अपने घेरे में लाया रखा जाए, ये अब अटल जी से सीखा जा सकता है।

आप किसी भी राजनीतिक सोच के हों अटल जी से ये सीख सकते हैं। अटल जी से सीखने कि आज उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत है जो पार्टियां आरएसएस भाजपा से लड़ने का दावा कर रही हैं

(आलेक वाजपेयी, लेखक इतिहासकार हैं।)

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