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Jharkhand has the highest number of sedition cases

जेएनयू या कश्मीर में नहीं झारखंड में बसते हैं सबसे अधिक देशद्रोही !

जेएनयू या कश्मीर में नहीं झारखंड में बसते हैं सबसे अधिक देशद्रोही !

Jharkhand has the highest number of sedition cases.

रांची से आलोका कुजूर

2017 से 2019 तक झारखंड में सबसे अधिक देशद्रोह के मामले दर्ज हैं। यहां प्रशासन और सरकार से बात करने से मीडिया भी डरता है। लगातार दमन का दौर जारी है।

खूंटी का इलाका कभी कांग्रेस का गढ़ रहा। बिरसा मुण्डा के जल जंगल जमीन की लम्बी लड़ाई का जहां संघर्ष अब तक जीवित है, कोयलकारो नदी पर बिजली उत्पादन को लेकर बहुचर्चित आंदोलन भारत में विजय वाला आंदोलन माना जाता रहा है। साइंस सिटी, तजना डैम, छाता नदी के अलावा वहां माओवादियों का लम्बा संघर्ष का इतिहास रहा है।

मुण्डा समुदाय की घनी आबादी वाले इलाके में मुण्डा समुदाय लगातार चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं। भारत की आजादी से लेकर राजनीति संघर्ष में यह इलाका कभी पीछे नहीं रहा।

उधर सरकार ने इस आंदोलन को लेकर लगभग 30 हजार लोगों पर केस दर्ज किया है। सबसे गम्भीर बात यह है कि एक एफआईआर 99/18 में खूंटी थाना में केस हुआ है, जिसमें 10 गांव और एक अन्य एफआईआर में एक गांव के ऊपर कुल 11 गांवों के ऊपर देशद्रोह के दर्ज हैं। इसी एफआईआर में 37 मोटरसाइकिल के ऊपर भी देशद्रोह का केस दर्ज है।

खूंटी जिला के अन्तर्गत 3 थाना अडानी थाना, खूंटी थाना, मूरूहू थाना में कुल 23 केस हुए हैं। जिसमें हमने 14 एफआईआर की स्टडी कर पाया कि अज्ञात लगभग 10,015 लोगों के ऊपर केस है।

अनुमान लगा सकते हैं कि 11 गांव की आबादी यदि 1000 भी माने तब 11 हजार और अज्ञात 10015 को जोड़ दे 21 हजार 15 लोगों पर केस हैं जिसमें नामजद 193 लोगों के ऊपर देशद्रोह का केस है। ऐसे में 14 एफआईआर 2207+37 मोटरसाइकिल= 22,44 लोगों के ऊपर केस का प्रमाण है। यदि 23 एफआईआर की स्टडी की जाए तब यह आंकड़ा 30 हजार से अधिक होगा।।

हर दौर के दमन के लिए सरकार ने तरह-तरह के हथकण्डे अपनाए। पीएलएफआई, जीएलटी जैसे सरकार संरक्षित संगठनों को दमन को कुचलने के लिए बनाया गया।

2018 में मुण्डा आदिवासी अपनी परम्परागत संस्कृति का एक हिस्सा पत्थलगड़ी कार्यक्रम कर रहे थे। यह कार्यक्रम वहाँ गाँव गाँव में चलता रहता है। जिसमें अपने गांव की सीमा पर 5-6 फीट से बड़ा पत्थर लगा कर गांव के संविधान, पांचवीं अनुसूची जो संविधान में दिए अधिकार को लिखते हैं। गांव की कितनी दूर सीमा है वह लिखा होता है। पंचायत के अंदर कितने गांव हैं, कितने आबादी है अंकित होता हैं। हर मुण्डा गांव में हर जगह लगा होता है।

2017 के पहले पत्थलगड़ी का क्रार्यक्रम चला जिसे रोकने के लिए सरकार ने दमन शुरू किया विरबांकी का इस इलाका में ग्रामसभा बहुत मजबूर है गांव में ग्रामसभा के अनुमति से योजना और अन्य काम होते हैं। लेकिन माओवादी को खोजने के नाम पर हजारों प्रशासन के लोग गांव में लगे बैरीकेटिंग तोड़कर गांव में प्रवेश कर गये। प्रशासन के वापस आने पर रास्ते में गोंव वाल ने प्रशासन को सम्मान पूर्व बैठा लिया और बताया कि गांव में ग्रामसभा के अनुमति के बगैर नहीं आते हैं। चेतावनी देकर छोड़ दिया।

प्रशासन ने वापस आ कर गांव के लोगों पर देशद्रोह का केस दर्ज किया। इससे पूरा विरबांकी के मुण्डा समुदाय भड़क गये।

देशद्रोह के इस मामले को लेकर मुण्डा समुदाय बैठक कर रहे थे। प्रशासन ने फिर से बैठक स्थल को घेर रखा था। बैठक खुली जगह हो रही थी। लोग अपनी बात कहने से कतरा रहे थे। ऐसी स्थिति में वहाँ प्रशासन को जनता ने घेर लिया।

गोदी मीडिया इस खबर को बड़ी प्रमुखता से प्रशासन और सरकार पक्ष में एक तरफा लिखने लगा। पत्थलगड़ी को प्रशासन केस में घसीट नहीं पा रहा था। तब प्रशासन अफीम के खेती होने की चर्चा कर गांव में छापा मारी करने लगे। वन भूमि पर अफीम खेती होने की बात कहकर अफीम की नष्ट करने चर्चा किया गया। यह खबर प्रशासन ने मिडिया को दी। केस दर्ज नहीं हुआ। इस मामले पर भी पत्थलगड़ी कर रहे लोगों पर केस दर्ज नहीं कर पाने पर अचानक गैंगरेप जैसी घटना होती है। इस रेप की घटना में पत्थलगड़ी से जुड़े लोगों को नामजद रेप में शामिल कर दिया।

जब पत्थलगड़ी चल रही थी उसमें गांव वालों को रोकने के लिए प्रशासन दमन कर रहा था, तब सोशलमीडिया में अनेकों लोगों ने पत्थलगड़ी का समर्थन और गैंगरेप की घटना को निंदा की थी। सरकार ने ऐसे 19 लोगों पर देशद्रोह का केस दर्ज किया है।

इस मामले को लेकर स्टेन स्वामी, विनोद कुमार, राकेश रौशन किंड़ो, आलोका ने हाई कोर्ट में क्वैश यनि केस समाप्त करने के लिए फाइल किया है। जैसे ही हाईकोर्ट में रिट दायर हुई वैसे ही एक महिने के अंदर इन लोगों के खिलाफ वारंट जारी होता है और फिर एक महिना के बाद स्टेन स्वामी का कुर्की जब्त का वारंट जारी होता है और तुरंत ही कुर्की कर ली गयी। कोर्ट में आदेश का इंतजार है, उधर खूंटी कोर्ट में जमानत के लिए कुछ लोगों ने आवेदन किया है ,वह भी जो सुरक्षित रखा गया है।

दूसरी ओर पत्थलगड़ी में शामिल उन आदिवासी के नाम देशद्रोह में डाले गये हैं, जिनकी भूमिका बहुत नहीं। कुछ लोग अलग-अलग जिला गांव राज्य के लोग हैं, जो वहाँ पत्थलगड़ी जैसे कार्यक्रम को चला रहे हैं। अभी भी यह जारी हैं।

यह लेख 14 एफआईआर के आधार पर लिखा गया है।

 

Most of the traitors reside in Jharkhand, not in JNU or Kashmir

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