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Rajeev mittal राजीव मित्तल, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।
राजीव मित्तल, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

कश्मीर हमारा कश्मीरी तुम्हारा…. लानत है हम पर…

#कश्मीर_हमारा_कश्मीरी_तुम्हारा (तीन साल पहले लिखा था..आज फिर जरूरत है इसकी)

आज़ादी के बाद से ही दिल्ली की सरकारों की कमोबेश यही सोच रही है। 1948 में खूंखार कबाइलियों की घुसपैठ और फिर पाक सेना के हमले में भारतीय सेनाओं का खुल कर साथ देने वाले कश्मीरी और कश्मीर हम भारतवासियों के दिलजोई का सामान बन कर रह गए…… और केंद्रीय राजनीति के लिए कश्मीर गुड्डे गुड़ियों का खेल।

शुरुआत हुई कश्मीर के सर्वमान्य नेता शेख अब्दुला के अहम को सैनिक बूटों से कुचलने और उन्हें कैद में डाल कश्मीर पर एक के बाद एक भ्रष्ट मुख्यमंत्री थोपने से। और जब सालों साल चले कश्मीर – कश्मीर खेल में नाकामी हासिल हुई तो शेख अब्दुला को रिहा कर फिर मुख्यमंत्री बना दिया गया, लेकिन केंद्र की राजनीति इस कदर मूढ़ निकली कि उसे यह पता ही नहीं चला कि न तो डल झील का पानी पहले जैसा निर्मल है, न कश्मीर, न कश्मीरी और न ही खुद शेख अब्दुल्लाह।

1947 में कश्मीर को भारत में मिलाने के लिए महाराजा हरि सिंह की फ़ौज के आगे सीना तान कर खड़े हो जाने वाले कश्मीर के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रवादी नेता शेख अब्दुला रिहाई के बाद सौदेबाज़ी पर उतर आये और उनकी सौदेबाज़ी में अब पकिस्तान भी था…. और आम कश्मीरी भी अब उनको पहला सा मान नहीं दे रहा था….. न ही उनमें पाकिस्तान के प्रति 1948 वाली कड़वाहट रह गयी थी।

कुल मिलाकर कश्मीर हमारे लिए केसर, बादाम, अखरोट और सेब….. बॉलीवुड के लिए बेहतरीन लोकेशन (पहले कभी)…. और हाँ “कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है” जैसे नारों से ज़्यादा कभी कुछ नहीं रहा। बस हमें कश्मीर नाम के भूभाग से मतलब है कश्मीरी चाहे चूल्हे में जाए या पाकिस्तान के हाथों में खेलें, तभी तो उनके लिए यह देश ….. तुम्हारा हिन्दुस्तान है।

हम सत्तर सालों में इतना ही कर पाये हैं कि कश्मीर को फ़ौज के बल पर जबरन अपने साथ रखा जाए …. लानत है हम पर…

राजीव मित्तल

Topics – Kashmir, Kashmiri, infiltration of the tribes, Sheikh Abdula, Maharaja Hari Singh.

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