आपकी नज़रस्तंभहस्तक्षेप

क़फ़स नहीं है कश्मीर

Randhir Singh Suman CPI

कश्मीर घाटी (Kashmir valley) में पिछले 43 दिन से सुलग रही आग पहले ही पीर पंजाल (Pir Panjal) और जम्मू क्षेत्र की चेनाब घाटी (Chenab valley of Jammu region) तथा कारगिल क्षेत्र (Kargil region) तक फैलनी शुरू हो चुकी है। मोदी (Modi) और उनके राजनीतिक गिरोह (political gang) के लोग कश्मीर में चल रही छाया युद्ध (shadow war) जैसी घटनाओं का समाधान निकालने में असफल हो रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी साहब समाधान की बजाये बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (Pak authorized Kashmir) अपनी नाकामियों को छिपाने के प्रयास कर रहे हैं। केंद्र व राज्य सरकार व उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पेट्रोल तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की बिक्री रोकने जैसे प्रशासनिक कदमों का इस्तेमाल कर ‘आंदोलन को कुचलने की’ कोशिश कर रहे हैं। जबकि इसके विपरीत आर्मी नेतृत्व की ओर से कहा जा रहा है कि अलग-अलग माइंडसेट वाले लोगों के बीच बातचीत होनी चाहिए।

तो अब सवाल यह उठता है कि आखिर हमारे नेता लोग ऐसा क्यों नहीं कर सके?

कश्मीर में हिंसा की वारदातें जारी रहने के बीच आर्मी ने बीते शुक्रवार को अपील की थी कि शांति बनाएं रखें। आर्मी की ओर से कहा गया था कि हर किसी को पीछे हटने की जरूरत है। आर्मी ने कहा था कि वर्तमान हालत से निपटने के लिए मिल बैठकर रास्ता निकालने की जरूरत है। जो काम राजनीतिक नेतृत्व को करना चाहिए, उसकी बात हमारी सेना कर रही है और राजनीतिक नेतृत्व कश्मीरी जनता को जेलखाने में बंद समझ कर हर बात मानने को मजबूर कर देना चाहता है।

राजनीतिक नेतृत्व के दिमागी दिवालियेपन से कश्मीर घाटी में आन्दोलन तेज पकड़ रहा है।

कल पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में एक बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिला। पूर्व मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख जीए मीर के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक, माकपा विधायक एम वाई तारिगामी और निर्दलीय विधायक हाकिम यासीन भी थे।

जब गैर राजनीतिक, गैर लोकतान्त्रिक संविधान की प्रस्तावना को न मानने वाले लोग सरकार पर काबिज हो गए हैं तो लोकतांत्रिक या राजनीतिक प्रक्रिया बंद होगी और हिटलर या मोसाद की नरसंहारी योजनायें लागू होंगी। यह देश के लिए दुर्भाग्पूर्ण स्थिति है।

कोई भी देश जनता से बनता है, रेखाओं से नहीं लेकिन नरसंहारी गिरोहों ने यह समझ रखा है कि जनता को मार-पीट कर गुलाम बना कर देश में रखा जा सकता है।

हमारी सेना लोकतान्त्रिक प्रक्रिया या राजनीतिक प्रक्रिया को समझती है इसीलिए कहती है  कि मिल बैठ कर रास्ता निकालो। जिसके लिए ये नरसंहारी गिरोह तैयार नहीं है।

रणधीर सिंह सुमन

Kashmir is not a cage

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