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मोदी के जनाधार के चरित्र को जानें

Narendra Modi An important message to the nation

मोदी के जनाधार के चरित्र को जानें

मध्यवर्ग की खूबी (Merit of middle class) है इसमें अधिकांश लोग विवेक से कम और मीडिया माहौल से ज्यादा संचालित होते हैं।

अधिकांश मध्यवर्गीय लोग अ-राजनीतिमें राजनीति (Politics in ‘non-politics’) में विश्वास करते हैं। इन लोगों की बदनाम राजनीतिक किस्सों में दिलचस्पी होती है लेकिन नीतियों पर बात करने से ये लोग किनाराकशी करते हैं।

मध्य वर्ग का खुदा है विज्ञापन। वह जो कहता है मध्य वर्ग वैसा ही करता है।

मध्य वर्ग के आंख-कान और दिमाग विज्ञापन कंपनियों के पास होते हैं। वे विज्ञापन के गुलाम हैं। असल में विज्ञापन कंपनियां (Advertising companies) मध्य वर्ग की संचालक और नियंता हैं।

Gossip is the greatest weakness in middle class

मध्य वर्ग सबसे बड़ी कमजोरी है गॉसिप। गॉसिप नहीं तो मजा नहीं।

हिंदी मध्यवर्ग में अनेक लोग गॉसिप को ही ज्ञान समझते हैं। यही वजह है उसके अंदर वाट्सएप की गॉसिप और साइबर सेल के असत्य की व्यापक खपत है। असत्य प्रेम के कारण ही उसे नरेंद्र मोदी प्रिय है, अपने इस जनाधार को खुश करने के लिए मोदी अहर्निश झूठ बोलते हैं, उससे यह वर्ग खुश रहता है। यही वह वर्ग है जिसमें आरएसएस का व्यापक जनाधार है।

मध्य वर्ग में झूठ और बेईमानी किस हद तक है यह जानना होतो फेसबुक व़ॉल देखो, नकली फोटो देखो, नकली एकाउंट देखो। काहे को ये बेईमानी कर रहे हैं! सत्य लिखेंगे तो इनका क्या घट जाएगा ?

असल में झूठ और बेईमानी को मध्यवर्ग के बड़े हिस्से ने अपना दैनंदिन संस्कार बना लिया है।

Know the character of Modi’s support

मध्यवर्ग में एक बड़ा हिस्सा मात्र उपभोक्ताओं का है। ये वे लोग हैं जो कमाते नहीं हैं, लेकिन खर्च करते हैं। इनमें युवा और औरतों का बड़ा समुदाय आता है। इन लोगों की परजीविता सामाजिक सचेतनता के निर्माण में बड़ी बाधा है। जो जितना बड़ा मध्यवर्गीय बेरोजगार वह उतना ही मुखर है कॉमनसेंस चेतना में।

मध्यवर्ग के बड़े अंश में जातिचेतना और अंधविश्वास गहरे तक जड़ें जमाए हैं। नए और पुराने किस्म की सामाजिक कुरीतियों से इस वर्ग का समूचा व्यक्तित्व बना है। परिवार, समाज, जाति आदि में फैले विषम संबंधों की यह वर्ग कभी चर्चा नहीं करता।

“खाओ-पीओ मौज करो” के नारे के तहत सामाजिक स्तर पर बने हुए वर्चस्वशाली संबंधों और कुरीति प्रेम को छिपाए रखता है, उनको जीता है। फलतः सामाजिक भेदभाव इसकी प्रकृति का स्वाभाविक अंग बन गया है और यही वर्ग है जिसको फ़ासिज़्म और मोदी पसंद है।

जगदीश्वर चतुर्वेदी

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