बक्सादुआर के बाघ-1

कर्नल भूपाल लाहिड़ी

अनुवाद : पलाश विश्वास

सुमन और अदिति पूरे मन से उनकी बातें सुन रहे थे। बक्सा दुआर वनांचल के मनुष्यों की कथा व्यथा। वे दूरदराज की बस्तिय़ों से आपबीती सुनाने आये हैं।

आदमा बस्ती के रमेश राय बता रहे थे कि कैसे जंगलात के अफसरान ने आदमा, लेपेचोखा,  ताशिगांव,  चूनाभट्टी,  ओछलुङ और लालबांग्ला बस्तियों के तीन सौ परिवारों को ब्रिटिश हुक्मरान की तरह आज भी अपना खरीदा हुआ गुलाम बनाये रखा है।

-फॉरेस्ट डिपार्मेंत के बाबू लोगों ने हम लोगों से नर्सरी तैयारी कराये रहे। नये एलाके में पौद लगाना, खर पतवार साफ सुफ करना, यानि कि जंगल की आग बुझाने परयंत तमाम काम जोर जबरदस्ती कराये रहे- एको पइसा न देत हैं। बस्ती के लोगों से कागज पर सही करवा लिये, परतेक परिवार को जंगल में एक एकड़ जमीन पे पेड़ लगावेक रहे-आउर इसके बदले तीन से पांच एकड़ फारेस्त की जमीन आबाद कर सकै हैं।

बीड़ी सुलगाकर रमेश बोलते रहे कि जिस कागज पे सही करवाये हैं, उसमें का का लिखा होवे, सुनो तो माथा गरम हुई जावै। आपको खेती वास्ते जो जमीन दिबे, उहां आप मुर्दाक दफना ना सकै हैं। न मंदिर मसजिद चर्च कोई धरमस्तान बना सकै हैं। फिन फारेस्त के हुक्मरान हुकुम करें तो पंद्रह दिनों के भीत्तर जमीन छोड़ देनी है। नहीं ना छोड़ा तो फारेस्त वाले कारिंदों से मार पीटाई करके भगाये दिबे।

आज सुबह यहां राजाभातखाओवा में बक्सा जंगलात में रिहायशी करीब सात सौ मर्दों और औरतों को लेकर जन सुनवाई शुरु हुई है। जो कल तक चलेगी। सुमन और अदिति कोलकाता से नवदिशारी नामक संगठन की ओर से इस जन सुनवाई में शामिल हैं। यह संगठन पिछले दस साल से जंगलात में रहने वाले लोगों के हकहकूक पर काम कर रहा है। इससे पहले कई दफा सुमन बक्सा आया हैं। अदिति पहली बार आयी है।

नवदिशारी के अलावा अलीपुर दुआर के एक और संगठन की इस जन सुनवाई में हिस्सेदारी है। इस मौके पर जलपाईगुड़ी जिला के डिस्ट्रिक्ट जज, चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट और अलीपुरदुआर अदालत के सारे जज और मजिस्ट्रेट हाजिर हैं। पश्चिम बंगाल लीगल एइड सर्विस के चेयरमैन जस्टिस अमरेश मजुमदार सभापतित्व कर रहे हैं। नोटिस देने के बावजूद बक्सा टाइगर रिजर्व के फील्ड डिरेक्टर या उनके किसी डिप्टी ने आने की तकलीफ नहीं उठायी।

इस जन सुनवाई का मकसद वन और वनांचल में रहने वाले मनुष्यों के संरक्षण के लिहाज से संसद में हाल में जो आईन कानून पास हुए हैं,  वास्तव में उन्हें किस तरह लागू किया जा रहा है, इसकी समीक्षा करना है और इसके साथ साथ जंगलात में रहने वाले मनुष्यों के अधिकारों का किस तरह और कितना उल्लंघन हो रहा है,  इस बारे में सारे तथ्य संग्रह करना है।

रमेश राय के बाद दक्षिण पोरो बस्ती के तिलेश्वर राभा अपनी आपबीती सुनाने को उठ खड़े हुए। उन्होंने कहा, आप जाने हैं कि राभा लोग आदत से शर्मिला और शांत हुआ करै हैं। इये सुयोग निया फारेस्तेर अफसर लोग अत्याचार चलाइतेछे। पोरो बस्तीक एक सौ बीस परिवार पर। हर रोज। साल के बाद साल। लगातार। बिना मजूरी जोर जबरदस्ती काम कराये नितेछे छह सौ माइनसेक दिया। हमरा गरीब मानुषगुलाक ना दिछे राशन कार्ड दिया, ना बीपीएल कार्ड। बस्तीर माइनसेक वोटर लिस्टे नाम नाई। बस्तीगुलात स्कूल नाई। साइस्थ्य केंद्र नाई । खेती बाड़ी खातिर जमीन नाई। ना खाया मानुषगुला मइरबार शुरु कइरछे। ।

     अगले दिन जन सुनवाई बक्सा रेंज के निमति गांव में शुरु हुई।

पहले ही राजाभातखाओवा इलाके के दक्षिण गारो बस्ती के वाशिंदा नीरज लामा बोलने के लिए खड़े हो गये। अपने घर में सोये हुए थे नीरज, हठात् आधी रात फारेस्ट वालों ने आकर उन्हें पुकारना चालू किया। फिर घर से निकलते ही अरेस्ट कर लिया। उन्हींके गांव के बाबूराम उरांव को पहले ही अरेस्ट कर लिया था और उन्हें साथ भी लाये थे। उन दोनों को उठाकर वे बैरागुरि ग्राम पहुंचे। फिर फारेस्ट के अफसरों ने वहां दो और लोगों शिवकुमार राय और दीपक राय को अरेस्ट कर लिया। फिर चारों को लेकर सीधे दमनपुर रेंज आफिस पहुंच गये। क्यों गिरफ्तार किया,  इस बारे में उन्हें कुछ भी नहीं बताया गया। इसके बदले रेंज आफिस का दरवाजा बंद करके बेधड़क मार शुरु हो गयी। मारने पीटने के बाद हरेक के हाथ कोरा कागज थमा दिया गया और रेंज आफिसर का हुक्म हो गया, सही कर दो।

अदिति सुमन के कान में बोली, कितनी भयंकर बात है! यह तो एकदम नील दर्पण का दृश्य है। फर्क इतना ही है कि चाबुक हाथ में लिये लाल रंग का कोट पहिने लालमुंहा ब्रिटिश अफसर की जगह काली चमड़ी वाला खाकी वर्दी पहने आजाद लोकतांत्रिक राष्ट्र के वन दफ्तर के अफसरान हैं ये।

अमानुषिक अत्याचार और कोरा कागज पर दस्तखत की रस्म पूरी हो गयी तो रेंज अफसर गरज कर बोला,  कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने कबूल कर लेना कि तुम लोग हाथी दांत चुरा रहे थे। वे इस पेशकश पर राजी न हुए तो एक दफा फिर मार कूटाई हो गयी। कोर्ट में मुकदमा शुरु होने के बाद जेल हाजत में उन्हें बाइस दिन बिताने पड़े। फिर भारी कवायद कसरत के बाद जमानत पर रिहा हुए। वह मुकदमा अभी चल रहा है। कब तक खत्म होगा,  नीरज लामा या दक्षिण गारो बस्ती के किसी को मालूम नहीं है।

इसके बाद अभियोग दायर करने की बारी उत्तर पोरो गांव के सुशील राभा की पत्नी बोलानी राभा की थी । उम्र बीस इक्कीस।

उन्होंने सिलसिलेवार बताया कि कैसे महज दो महीने पहले उन की कैसे बेइज्जती हुई बिना किसी जुर्म के।

उस दिन वे पति के साथ मछली पकड़ने नदी पर गयी थीं। बक्सा टाइगर रिजर्व के डिप्टी फील्ड डिरेक्टर एक और अफसर के साथ वहां से होकर गुजर रहे थे। दोनों को मछली पकड़ते देखकर उन्होंने सीधे भीषण पिटाई शुरु कर दी। बोलानी बुरी तरह जख्मी हो गयी। खबर मिलने पर गांव के लोग दौड़े दौड़े मौके पर पहुंचे और फिर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस सिलसिले में तालचिनि थाने में फारेस्ट अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया लेकिन आखिरकार पुलिस ने कोई तहकीकात नहीं की।

 

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