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2020 का मानबहादुर सिंह लहक सम्मान कान्तिकुमार जैन और मधुरेश को

2020 का मानबहादुर सिंह लहक सम्मान कान्तिकुमार जैन और मधुरेश को

कोलकाता से प्रकाशित चर्चित पत्रिक लहक द्वारा दिया जाने वाला मानबहादुर सिंह लहक सम्मान (Manbahadur Singh Lahak Samman) अगले वर्ष मधुरेश (Madhuresh) और कान्ति कुमार जैन (Kanti Kumar jain) को प्रदत्त किया जाएगा। यह सम्मान पुरस्कार नहीं है। न ही इसमें किसी तरह की रचनाएँ आमन्त्रित की जाती हैं। न चयन की औपचारिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। चयन कमेटी स्वतः लेखकों के जीवन व रचनाकर्म का मूल्यांकन करती है और परखती है।

यह उन लेखकों का सम्मान (Respect of authors) है जिन्होंने ईमानदारी से आजीवन साहित्य की सेवा (Service of literature) की जीवन भर प्रतिबद्ध रहते हुए मौलिक व जरूरी काम किया। वह लेखक जो अपने रचना कर्म के आधार पर जरूरी थे मगर साहित्य की पुरस्कार खोर व सत्ता से जुड़ी संस्थाओं की गुलाम बन चुकी व्यवस्था ने उन्हें जानबूझकर हाशिए पर रखा। लहक ऐसे लेखकों को उनके घर जाकर सम्मानित करती है। तथा ऐसे लेखकों पर निरन्तर आलोचनात्मक संवाद करती है।

सम्मान के विषय में जानकारी देते हुए मानबहादुर सिंह लहक सम्मान के सचिव उमाशंकर सिंह ने बताया कि यह सम्मान अपने उन अग्रजों का स्मरण है जिनके अध्ययन व उनके योगदान को जाने बगैर हम साहित्य की वर्तमान चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर सकते हैं। यह उस परम्परा का सम्मान है जिनके द्वारा लोकधर्मिता का दायरा बढ़ा।

यह सम्मान अब तक नीलकान्त, महेन्द्रभटनागर, धनंजय वर्मा, मलय को दिया जा चुका है।

मानबहादुर सिंह लहक सम्मान चयन कमेटी – इसमें पाँच सदस्य हैं

सुधीर सक्सेना ( वरिष्ठ कवि / पत्रकार )

नासिर अहमद सिकन्दर ( वरिष्ठ कवि )

निर्भय देवयांस ( संपादक लहक )

शिवेन्द्र सिंह ( मानबहादुर सिंह के परिजन )

उमाशंकर सिंह परमार ( सचिव मनबहादुर सिंह लहक सम्मान )

कौन हैं मधुरेश Who is Madhuresh

हिन्दी कथा साहित्य के होलटाईमर आलोचक के रूप में विख्यात रामप्रकाश शंखधार उर्फ़ मधुरेश हिन्दी साहित्य को लगभग साठ वर्ष का रचनात्मक जीवन दे चुके हैं, आज वह अस्सी पार हैं। 10 जनवरी 1939 को जन्म हुआ था। वर्ष 1962 में पहला आलोचना आलेख “लहर” में छपा था। चार दर्जन आलोचनात्मक कृतियाँ लिख चुके मधुरेश बहु पठित आलोचक हैं। वह अभी भी रचनात्मक रूप से सक्रिय हैं। उनकी ताजा कृति जो ऐतिहासिक उपन्यासों पर है अभी आधार प्रकाशन पंचकुला से प्रकाशित हुई है।

मधुरेश की चर्चित कृतियां Popular books of Madhuresh

मधुरेश की चर्चित कृतियों में हिन्दी कहानी विचार और प्रतिक्रिया, हिन्दी उपन्यास -संवेदना और विकास, देवकीनन्दन खत्री, रांगेय राघव, राहुल का कथा कर्म, हिन्दी कहानी अस्मिता की तलास, मेरे रामविलाश शर्मा, हिन्दी प्रगतिशील आलोचना और शिवदान सिंह चौहान, आलोचक का आकाश, शिनाख्त, संवाद और सहकार, हिन्दी कहानी का विकास, हिन्दी उपन्यास का इतिहास, हिन्दी आलोचना प्रतिवाद की संस्कृति, हिन्दी आलोचना का विकास। अपने समय की चर्चित कृतियाँ रहीं।

मधुरेश जी ने जितना लिखा उतना ही उपेक्षित भी रहे और आज की पीढ़ी उन्हें लगभग विस्मृत कर चुकी है कारण रहा कि वह कभी भी पुरस्कारों और सत्ता व अकादमिक जगत की गैर साहित्यिक राजनैतिक उठापटक के फेर में नहीं पड़े, न ही मठों और पीठों की परिक्रमा की।

कौन हैं कान्तिकुमार जैन Who is Kantikumar Jain,

हिन्दी संस्मरण विधा के एकछत्र लेखक / आलोचक कान्तिकुमार जैन आज नब्बे पार हैं। 1932 में जन्मे जैन 1992 में सागर विश्वविद्यालय से सेवा निवृत्त हुए थे। बुन्देली भाषा और साहित्य व छत्तीसगढ़ की जनपदीय बोलियों पर इनका काम बेहद जरूरी व विस्तृत काम रहा। हरिशंकर परसाई पर इनकी आलोचना कृति तुम्हारे परसाई आज तक की सभी समीक्षाओं मे सर्वाधिक विश्वसनीय आलोचनात्मक कृति है। संस्मरण के अतिरिक्त निबन्ध, लघुकथा, आलोचना, यात्रा वृत्त, लगभग सभी गद्य विधाओं पर लिखा महत्वपूर्ण कृतियों में छत्तीसगढ़ी बोली व्याकरण और कोश, भारतेंदु पूर्व हिंदी गद्य, कबीरदास, इक्कीसवीं शताब्दी की हिंदी, छायावाद की मैदानी और पहाड़ी शैलियाँ, शिवकुमार श्रीवास्तव : शब्द और कर्म की सार्थकता,सैयद अमीर अली ‘मीर’, लौटकर आना नहीं होगा, तुम्हारा परसाई, जो कहूँगा सच कहूँगा, बैकुंठपुर में बचपन, महागुरु मुक्तिबोध : जुम्मा टैंक की सीढ़ि‍यों पर,पप्पू खवास का कुनबा से लगभग सभी पाठक परिचित हैं।

कान्तिकुमार जैन इस समय चल फिर नही पाते व्हील चेयर में बैठे रहते हैं सागर में रह रहे हैं।

मधुरेश और कान्ति जैन दोनों ईमानदार लेखन के प्रतीक हैं। ये दोनों रचनाकार आज साहित्य अकादमी व ज्ञानपीठ से बहुत आगे बढ़ चुके हैं। बडे कद के ये दोनों लेखक जिसका लेखन मौलिकता के सन्दर्भ में कथित पुरस्कृतों के समक्ष बीस ठहरता है, इस सत्ता आश्रित छद्म प्रगतिवादी कुलीनतन्त्र द्वारा जानबूझकर कैसे उपेक्षित किया जाता है मधुरेश और कान्तिकुमार जैन इसके साक्षात उदाहरण हैं। जीवन भर लिखा रचा और आज भी इमानदारी से लिख रहे हैं।

मानबहादुर सिंह लहक सम्मान कमेटी के सभी सदस्यों ने आपसी सहमति से वर्ष 2020 का मानबहादुर सिंह लहक सम्मान दोनों रचनाकारों को प्रदत्त करने का निर्णय लिया है।

यह सम्मान जनवरी 2020 में बरेली और सागर में लहक द्वारा  आयोजित कार्यक्रमों में प्रदत्त किया जाएगा। इस वर्ष इन दोनों रचनाकारों पर लहक में विशेष बहस का कालम चलाया जाएगा तथा जिस जिस माह सम्मान दिया जाएगा, उस महीने का लहक विशेषांक इन दोनों रचनाकारों पर केन्द्रित रहेगा। आयोजन तिथियों की घोषणा बाद में की जाएगी।

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