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मासिक धर्म स्वच्छता दिवस 28 मई : मासिक धर्म अपशिष्ट का निपटान, समाज द्वारा सामना की जा रही सबसे बड़ी चुनौती

Menstrual Hygiene Day May 28th

हैदराबाद, 27 मई। तर्कसंगत सोच और वैज्ञानिक विकास के युग में, मासिक धर्म से जुड़ी वर्जना (
taboo associated with menstruation ), मासिक धर्म के स्वास्थ्य और स्वच्छता पर ज्ञान की कमी ( lack of knowledge on menstrual health and hygiene  ) और महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण पर संबंधित जोखिमों के बारे में चुप्पी अखरती है। यह देखना बेहद निराशाजनक है कि मासिक धर्म, महिलाओं के मासिक धर्म की स्वच्छता और महिलाओं के यौन-प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य पर बातचीत, अभी भी शर्म का विषय समझी जाती है।

मासिक धर्म स्वच्छता दिवस (28 मई) (Menstrual Hygiene Day (May 28th) की पूर्व संध्या पर बीती शाम सारथ सिटी कैपिटल मॉल में रविवार को ‘सेलिब्रेट द ब्लड’ थीम (The one day seminar, ‘Menstrual Festival‘, with the theme ‘Celebrate The Blood’,) के साथ स्वास्थ्य देखभाल विशेषज्ञों व पेशेवरों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं की संस्था गुड यूनिवर्स द्वारा ‘मेन्सुरल फेस्टिवल’ मनाया गया। फेस्टिवल के भाग के रूप में मासिक धर्म में शामिल विभिन्न हितधारकों को शामिल करने के लिए एक संगोष्ठी, मासिक धर्म, महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य और स्वच्छता पर आयोजित की गई थी।

सेमिनार में एलीफेंट्रा एंटरप्राइजेज प्रा लिमिटेड; के सीईओ अरुण कुमार, Mr Arun Kumar, CEO, Elemantra Enterprises Pvt. Ltd; ने कहा कि मासिक धर्म अपशिष्ट का निपटान, समाज द्वारा सामना की जा रही सबसे बड़ी चुनौती है और दिन-ब-दिन विकराल होती जा रही है। खासकर शहरों में यह एक बड़ा खतरा बन रही है और आने वाले दिनों में एक बड़ा सामाजिक मुद्दा बन सकती है।

उन्होंने कहा कि उचित निपटान तंत्र की अनुपस्थिति में, शहरी क्षेत्रों में इस अपशिष्ट के निपटान के लिए शौचालय में इसे बहा देना सबसे आसान उपाय है, लेकिन इसके कारण नालियां और सीवर जाम हो जाते हैं। या फिर यह जहां सीवर गिरता है उस जलाशय में तलछट में जमा हो जाती है, जिससे जलाशय का प्रदूषण बढ़ जाता है, जो सभी वनस्पतियों और उनसे जुड़े अन्य जीवों के लिए स्वास्थ्य खतरे पैदाकर संक्रमित करता है। दूसरा विकल्प इसे कचरे में फेंक देना है, लेकिन इससे सैनिटरी कर्मचारी या कचरे में घूमने वाले जानवर संक्रमित हो सकते हैं और इस संक्रमण को और फैला सकते हैं।

हालांकि आज के पैड विभिन्न सामग्रियों से बने होते हैं, कुछ बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बने होते हैं, जो पर्यावरण को बहुत नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, लेकिन कुछ में इस्तेमाल किए जाने वाले जैल या पॉलिमर विघटित नहीं होते हैं और यदि उन्हें छोड़ दिया जाए तो उन्हें विघटित होने में 40 से 50 साल लगते हैं।

श्री कुमार ने कहा कि इससे छुटकारा पाने का एकमात्र उपाय मासिक घर्म अपशिष्ट का जलाना है। हालांकि इसे खुले में जलाना सुरक्षित नहीं है, क्योंकि इससे प्रदूषण होता है और जिस ताप पर इसे जलाया जाता है, वह सिर्फ 500 से 6000 के आसपास होता है, उस तापमान पर रोगजनक और हानिकारक बैक्टीरिया समाप्त नहीं होते हैं। इस अपशिष्ट को जलाने के बाद छोड़ दी गई राख हानिकारक है, इसे संभालने वाले सफाई कर्मचारी को संक्रमण हो सकता है। इसलिए इसे एक क्रीमेटोरिअम में वैज्ञानिक रूप से नष्ट करने की आवश्यकता होती है, जिसमें एक नियंत्रित दहन होता है और 9000 का जलता हुआ तापमान हो सकता है। उस तापमान पर बैक्टीरिया और रोगाणु नष्ट हो जाते हैं और इससे निकलने वाली राख को संभालना सुरक्षित होता है।

मासिक धर्म स्वच्छता दिवस 28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन के महत्व को उजागर करने के लिए एक वार्षिक जागरूकता दिवस है। यह 2014 में जर्मन-आधारित एनजीओ वाश यूनाइटेड (German-based NGO WASH United) द्वारा शुरू किया गया था और इसका उद्देश्य दुनिया भर में रक्तस्रावी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाना है।

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