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Dr Satnam Singh Chhabra Director of Neuro and Spine Department of Sir Gangaram Hospital New Delhi
Dr Satnam Singh Chhabra Director of Neuro and Spine Department of Sir Gangaram Hospital New Delhi

लो बैक पेन का आधुनिक इलाज

नई दिल्ली, 13 जुलाई 2019 : आज कल अधिकांश लोगों में लो बैक पेन
(Low back pain) यानी
कमर दर्द की शिकायत (Waist Pain Complaint) बड़ी आम हो चली है. विशेषज्ञ इसके कई
कारण बता रहे हैं. लेकिन एक बड़ा कारण (cause of
low back pain and hips)
आज की आधुनिक जीवन शैली है. कमर दर्द का पहले दर्दनाशक दवाओं व
बेडरेस्ट के अलावा कोई कारगर इलाज (Treatment of Waist Pain) नहीं था. लेकिन आज लो बैक पेन प्रबंधन (Low Back
Pain Management
) की नई चिकित्सा सुविधाएं देश में
उपलब्ध हो गयी हैं. आज कल लो बैक पेन की शिकायत इस कदर आम हो गईं है कि आप का कोई
न कोई परिचित इससे परेशान अवश्य मिल जायेगा.

एक विज्ञप्ति में नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के न्यूरो एंड स्पाइन डिपाटर्मेंट के निदेशक डॉ. सतनाम सिंह छाबड़ा (Dr Satnam Singh Chhabra, Director of Neuro and Spine Department of Sir Gangaram Hospital, New Delhi) ने कहा है कि आज महानगरों की अरामपसंद जीवनशैली, गलत रहन-सहन, शारीरिक श्रम की कमी, बैठने व सोने के बेतुके ढंग, भीड़ भरी सड़कों पर अधिक समय तक गाड़ी चलाने आदि के कारण युवाओं में भी रीढ़ ‘स्पाइन’ संबंधी बीमारी महामारी की तरह फैल रही है. आज 15 से 30 वर्ष के अधिकांश युवा रीढ़ के विकारों से ग्रस्त हैं.

रीढ़
की हड्डी में खराबी के कारण या तो पीठ या कमर में असह्य दर्द होता है. उसमें
स्पाइन के मरीजों की तादाद में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है. गांव की अपेक्षा शहरों
में स्पाइन के रोगियों की संख्या अधिक है.

डॉ.
छाबड़ा के मुताबिक स्पाइन, जिसका खुद का वजन काफी कम होता है, पूरे स्थल के बीच डिस्क बहुत ही व्यवस्थित ढंग
से फिट रहती है और डिस्क बर्टिबा पर अंकुश कायम रखती है. अगर किसी कारण से
बर्टिब्रा के आगे की दिशा यानी पेटी की तरफ या पीछे की दिशा ‘पीठ की तरफ’ खिसक
सकता है. इसमें जब डिस्क पीठ की तरफ 
खिसकती है तो वह मरीज के लिए बहुत घातक होता है.

डॉ.
सतनाम सिंह छाबड़ा का कहना है कि लो बैक पेन की अधिकांश शिकायत एल-4 व एल-5 या एल-5
व एस-1 के लेवल पर होती है.

उन्होंने
बताया कि स्पाइन सर्जरी (रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन –Spine
Surgery)

में मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग ‘एम.आर.आई.’ (Magnetic
Resonance Imaging ‘MRI’)
की
महत्वपूर्ण भूमिका है। ऑपरेशन
से पूर्व स्लिप डिस्क ( Slip disk ) की स्थिति का पता लगाना आवश्यक होता है. साथ
ही यह भी जानना जरूरी होता है कि स्लिप्ड डिस्क किन नसों पर दबाव डाल रही है।

एम.आर.आई
ही एक ऐसा यंत्र है जो स्पाइन संबंधी गड़बड़ी की सही और कई गुण संबंधित तस्वीर दिखा
सकता है. आज इसके इलाज के लिए जो आधुनिक प्रबंध मौजूद हैं, उनमें एंडोस्कोपी
(इंडोस्कोपी – Endoscopy) प्रमुख है. इसमें इंडोस्कोप की सहायता से
ऑपरेशन करते हैं. यहां चिकित्सक की आंखें तो मॉनीटर पर होती हैं, लेकिन हाथ अपना काम कर रहे होते हैं. आज कई तरह
के इंडोस्कोप (Endoscope)
उपलब्ध हैं और विभिन्न-विभिन्न ऑपरेशनों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.

डा.
सतनाम सिंह छाबड़ा के अनुसार स्लिप्ड डिस्क के मरीज जो कमर व पैर की दर्द से पीडित
हैं, उसमें तो इंडोस्कोप कारगर हैं ही, साथ ही कई अन्य बीमारियां जैसे टी.बी. ट्यूमर, बीच संक्रमण इत्यादि में भी इंडोस्कोप का
इस्तेमाल कर के ‘जिसमें केवल एक छिद्र किया जाता है’ बड़े ऑपरेशन से रोगियों को
बचाया जा सकता है. जब कि पहले पूरा पेट या सीना खोलकर ही ऐसे ऑपरेशन संभव हुआ करते
थे.

एंडोस्कोपी का फायदा (Advantages
of endoscopy
) यह होता है कि एक 4 एम.एम. के
टेलीस्कोप को हम अंदर डालकर टेलीविजन पर अंदर कर दृश्य 20 गुना बड़ा करके देख सकते
हैं जिसमें कि गलती होने की संभावना नहीं होती है. यह पूरी सर्जरी मरीज खुद भी
अपनी आंखों से देख सकता.

डॉ. छाबड़ा के मुताबिक एंडोस्कोपी में खून कम से कम बहता है और पहले की तरह टांका-पट्टी करने की जरूरी नहीं और परिणाम काफी बेहतर आता है. केवल लोकल एनेथेस्यिा देकर भी यह ऑपरेशन किया जा सकता है और मरीज अगले दिन ही वापस लौट जाता है. सर्जरी का कोई निशान भी नहीं आता है.



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