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मोदी के बयान ने साफ किया यूपी की फर्जी मुठभेड़ें गुजरात मॉडल पर- रिहाई मंच

UP fake encounters Gujarat model

मोदी के बयान ने साफ किया यूपी की फर्जी मुठभेड़ें (UP fake encounters) गुजरात मॉडल (Gujarat model) पर, रामनगर बाराबंकी में हुई मुठभेड़ पर रिहाई मंच ने उठाए सवाल, जारी की रपट

मंच ने सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से 2017-18 में बाराबंकी में हुई समस्त मुठभेड़ों की जांच कराए जाने की मांग की

फर्जी मुठभेड़ : यूपी गुजरात की राह पर

लखनऊ/बाराबंकी 16 जुलाई 2018। रिहाई मंच ने बाराबंकी रामनगर मुठभेड़ पर रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि आजमगढ़ में मोदी के बयान ने साफ कर दिया है कि फर्जी मुठभेड़ों के मामले में यूपी गुजरात की राह पर है। जिस तरह इशरत जहां, सादिक जमाल मेहतर जैसी मुठभेड़ों को लेकर मोदी पर सवाल हैं, उसी तरह यूपी में योगी पर हैं।

रिहाई मंच ने बाराबंकी के चैकाघाट मरकामऊ रोड पर सिलौटा मोड़ के पास बहलोलपुर पुलिया पर हुई पुलिसिया मुठभेड़ के कथित स्थल का दौरा करते हुए पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

योगी आदित्यानाथ ने महादेवा में कहा था कि ‘देवा को बिजली मिलती थी महादेवा को नहीं’ इसके दो दिनों के भीतर पुलिस द्वारा इमरान और मुशीर के मुठभेड़ में मारे जाने और दो के पकड़े जाने को मंच ने राजनीति से प्रेरित करार दिया।

मंच ने कहा है कि एक तरफ तो बिजली जैसी मूलभूत जरुरत के नाम पर सांप्रदायिकीकरण किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ फर्जी मुठभेड़ों के नाम पर कानून व्यवस्था के चुस्त-दुरुस्त होने का दावा किया जा रहा है। मारे गए कथित बदमाशों के आपराधिक रिकार्ड 2018 के हैं। तो क्या पहले आपराधिक रिकार्ड बनाया, ईनाम घोषित किया और फिर मार दिया ?

मंच ने कहा है कि इस आपरेशन के मुख्य अधिकारी धर्मेन्द्र रघुवंशी का पुराना रिकार्ड सामने है- शाहजहांपुर में मिर्जापुर थानाध्यक्ष रहते हुए कलुआ नाम के किसी शख्स को मारने के बाद उनको आउट आफ टर्न प्रमोशन दिया गया था। आखिर जिन दो व्यक्तियों को पुलिस ने मारने का दावा किया था वो वहां किसी वारदात किस साधन से गए थे क्योंकि किसी गाड़ी की कोई बरामदगी नहीं हुई है। घटनास्थल रामनगर मुख्य रोड से 9 किलोमीटर अंदर है ऐसे में 50-50 हजार के ईनामी कैसे वहां पहुंचे ?

शांत इलाके में डर का माहौल बन गया

Encounter in Ramnagar Barabanki

रिहाई मंच का प्रतिनिधि मंडल ने घटना स्थल पर गुजर रहे राहगीरों से घटना के बारे में जानने का प्रयास किया। पहले-पहल लोग वहां रुकने से और बोलने से हिचक रहे थे। शाम का वक्त था और आदमकद खून का धब्बा सड़क पर फैला हुआ था- डरवाना सा माहौल था।

मोटर साइकिल सवार जलपापुर गांव के राम निवास ने बताया कि यह इलाका बड़ा शांत था, रात बिरात आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं होती थी। पर इस घटना के बाद एक डर का माहौल बन गया।

मरकामऊ के मुहम्मद युनुस बहुत मुश्किल से बोले और वो भी बस इतना कि लोग बता रहे हैं कि भोर में गोलियों की कुछ आवाजें आईं थीं।

सिलौटा गांव के सहीराम बताते हैं कि परसाल भी एक लाश यहां मिली थी, किसी आटो रिक्सा वाले की थी, कोठी उस्मानपुर का कोई आदमी था।

संतोष कुमार बताते हैं कि डकैती जैसी घटना का कोई माहौल नहीं है। यहां सब खेती-बाड़ी करने वाले लोग हैं। इतना पैसा नहीं रहता कि बैंक में रखें तो क्या घर पर रखेंगे।

बहलोलपुर के प्रवीण बताते हैं कि सुबह यहां पानी की कुछ बोतलें और गिलास पड़े थे। सुबह सबेरे के समय दो सिपाही यहां पर थे लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुजरने लगा पुलिस की गाड़ियां आने लगीं। लोगों को पास में आने की मनाही थी।

सिलौटा गांव के कमालुद्दीन कहते हैं कि इतने सुबह की घटना है, कोई क्या बता सकता है, जब तक पता चलता, पुलिस आ गई और वो जगह घेर ली।

मरकामऊ के मोहित बताते हैं कि एक दिन पहले, 6 को मुख्यमंत्री जी आए थे उसके बाद हुई इस घटना के बाद तो पूरा इलाका शांत सा हो गया। जो सुबह यहां से गुजरे उन्होंने बस दो लाश और दो सिपाही देखा, कोई बाइक नहीं।

इस खबर की चर्चा है कि पुलिस ने यहां से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर 25-26 जुलाई 2001 की भोर में तिहरे एनकाउंटर को अंजाम दिया था। तीन युवकों को मारने वाले इस मुठभेड़ के जिम्मेदार रामनगर थानाध्यक्ष सुभाष तिवारी समेत आधा दर्जन दरोगा और एक दर्जन के करीब सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया था। मुकदमा दर्ज कर जेल भी भेजा गया था।

बाराबंकी पुलिस के मुताबिक मुखबिर से सूचना मिलने के बाद रामनगर, टिकैतनगर, देंवा, बदोसराय के साथ ही स्वाट सर्विसलांस टीम के प्रभारी मय फोर्स 6 बदमाशों को रामनगर थाना क्षेत्र के बहलोलपुर पुलिया (सिलौटा) के पास घेराबंदी करके ललकारा। बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग शुरु कर दी तो पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की जिसमें दो बदमाश घायल हुए और 4 अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। घायल बदमाशों को पुलिस सीएचसी रामनगर लेकर पहुंची तो डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।

कैसे भागे चार बदमाश ?

पुरानी मीडिया रिपोर्टस से मालूम पड़ता है कि 2 जून 2018 को बाराबंकी पुलिस ने बावरिया गिरोह के 6 लोगों की गिरफ्तारी की थी। इनमें इब्राहिम के पिता मो0 रजी और मुशीर की पत्नी साजिया भी शामिल थीं जो जेल में हैं। जिस मुठभेड़ में इमरान उर्फ इब्राहिम और मुशीर को मारने का दावा किया गया और केके मिश्रा, अनुराग उपाध्याय इंस्पेक्टर, रामकृष्ण मिश्रा सिपाही के घायल होने की बात कही गई उसमें चार बदमाश कैसे भागे जबकि वहां पर किसी मोटर साइकिल की बात नहीं है।

रामनगर थाना क्षेत्र में दो इनामी डकैतों को मुठभेड़ में मार गिराने के बाद पुलिस का ‘गुडवर्क’ जारी रहा। पुलिस के मुताबिक अगले दिन हैदरगढ़ थाना ने मुठभेड़ में दो इनामी बदमाशों को चोरी की मोटर साइकिल और असलहों के साथ धर दबोचा। रात करीब 1 बजे कोतवाली हैदरगढ़ के प्रभारी परशुराम ओझा गश्त पर थे तभी उनको बाइक सवार दो युवक नजर आए। दोनों को रोकने का प्रयास किया तो वे अपाची गाड़ी से औसानेश्वर मार्ग से निकल भागे। औसानेश्वर मंदिर से पहले मोड़ पर बदमाशों ने अपने बचाव के लिये पुलिस पर फायरिंग शुरु कर दी। बदमाशों की फायरिंग में प्रभारी निरीक्षक के साथ मौजूद पुलिसकर्मी गौतम घायल हो गया। पुलिस ने जवाबी फायरिंग में एक बदमाश के पैर में गोली लगी, दोनो जंगल की तरफ निकल भागे। लेकिन पुलिसकर्मियों ने नाकाबंदी करके दोनो बदमाशों को धर दबोचा। पकड़े गये दोनो बदमाशों में से एक बदमाश जनपद अमेठी के थाना शिवरतनगंज क्षेत्र के तिवारीगंज सेमरौटा निवासी वसीम पुत्र पप्पू और दूसरा बदमाश जनपद रायबरेली के थाना शिवगढ़ क्षेत्र के ग्राम कुमरावां निवासी शाकिर अली पुत्र सैय्यद अली है। पकड़े गये बदमाशों के ऊपर 2500-2500 रुपये का ईनाम था।

वहीं सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट जांच दल को मिली जिसमें पोस्टकर्ता सुशील सिंह कह रहे हैं कि ‘…अभी और एंकाउंटर करेंगी बाराबंकी की बहादुर पुलिस! ??? बीते 7 जुलाई 2018 को रामनगर एंकाउंटर में फरार 4 मुल्जिम पुलिस के कब्जे में हैं। सूत्र बताते हैं कि ये चारों जिलें के पुलिस थानों में बने किसी ‘‘काजी हाउस’’ में बंद हैं, अभी पता लगना बाकी है। …’’

 इस तरह के पोस्ट पुलिस की पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाते हैं। वहीं पुलिस कप्तान जो इन मुठभेड़ों पर पुलिस को बधाई देते मीडिया में नजर आ रहे हैं उन पर भी गंभीर सवाल है कि क्या यह सब उनकी देखरेख में हो रहा है। नहीं तो यह कैसे हो सकता है कि किसी को पुलिस पकड़े और सवाल उठे कि वो पुलिस की गिरफ्त में है और उस पर एसपी की कोई प्रतिक्रिया न हो। ऐसा तो नहीं कि सभी पुलिस की पकड़ में थे और योगी जी के आने के इंतजार था।

योगी का महादेवा दौरा-मुठभेड़-आउट ऑफ टर्न प्रमोशन

योगी सरकार आने के बाद मुठभेड़ों का जो सिलसिला शुरू हुआ उसमें फरवरी 2018 में जहांगीराबाद में चार लोगों की गिरफ्तारी की गई। प्रेस नोट में पांच व्यक्तियों जिक्र था। जनवरी 2018 में आजमगढ़ सरायमीर थाने के पेडरा गांव के रईस के उठाया गया। इसपर सवाल उठने के कई दिनों बाद जैदपुर बराबंकी थाने के एसओ ने उसके पैर में गोली मारकर मुठभेड़ दिखा दी। फरवरी में जहांगीराबाद के पास जिन बदमाशों को गिरफ्तार करने का दावा किया गया उन्हें सीतापुर का बताया गया। उनमें से एक को फरार बताया गया।

पुलिस की फायरिंग के खोखों पर सवाल उठने पर पुलिस ने कहा कि वो जगंल में हैं ढूंढे़ जा रहे हैं। मुठभेड़ में दिखाई गई रईस की बाईक का कारबोरेटर बाहर की तरफ निकला हुआ था और वह चलने की स्थिति में नहीं थी। वहीं जिन तीन पुलिस वालों को अस्पताल में भर्ती बताया गया, उनके बारे में मीडिया के लोगों ने पूछा तो डाक्टर ने कहा कि एडमिट नहीं रेस्ट कर रहे हैं। वहीं रईस की पत्नी ने बताया था कि 30 दिसंबर को कोहरे की रात में साढ़े सात के करीब आबिद नाम का एक आदमी ने रईस को बुलाकर ले गया। एसओ जैदपुर बाराबंकी गाड़ी लगाकर खड़ा किए थे।

रईस को जबरन गाड़ी में लाद लिया। रईस ने महाप्रधानी (जिला पंचायत सदस्य) का चुनाव लड़ा और 1100 के तकरीबन वोट भी पाया था। 30 दिसंबर 2017 को उठाने के बाद अंबारी के पास भेड़िया के पुल के पास मारने के लिए ले गए। यह स्थान इस इलाके का एनकाउंटर जोन है। पर थाने से लेकर जगह-जगह खबर फैल गई ऐसी स्थिति में पुलिस ने मारा तो नहीं लेकिन 5 दिन बाद पैर में गोली मारकर बाराबंकी में फर्जी मुठभेड़ में पकड़ने का दावा किया। 100 नंबर पर भी उस दिन फोन करके सूचित किया गया था। थाने पर भी इसकी शिकायत है।

मुशीर अहमद (27) पुत्र अहमद निवासी नया ईदगाह मकनपुर थाना बिल्हौर जनपद कानपुर नगर व इमरान उर्फ इब्राहिम (25) पुत्र रजी निवासी ग्राम पारा, थाना मौरावां जनपद उन्नाव के बारे मालूम चला है कि इमरान का परिवार पारा में कुछ महीने पहले तक रहता था। एक दिन पुलिस बड़ी संख्या में गई और उन सभी को वहां से उठवा लिया जिसके बाद गिरफ्तारियों का यह सिलसिला जारी है।

आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाने की वजह फर्जी मुठभेड़

प्रतिनिधिमंडल ने मानवाधिकारों के प्रति गंभीर बाराबंकी के अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन से मुलाकात की तो उन्होंने प्रथम दृष्टया इसे फर्जी मुठभेड़ और आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाने की वजह बताया। लखनऊ जोन में पहली बार 50-50 हजार के ईनामी बदमाषों को मारने वाली पुलिस को यह भी बताना चाहिए कि कैसे सिर्फ 2018 में उनपर मुकदमें लादे गए और उनका आपराधिक रिकार्ड तैयार किया गया।

7 जुलाई 2018 को बाराबंकी में मुशीर और इमरान के एन्काउंटर पर गंभीर सवाल उठे-

पहला कि उन्नाव से इमरान और मुशीर अपने साथियों के साथ डकैती डालने आते हैं और पुलिस मुठभेड़ में मारे जाते हैं। घटना स्थल पर किसी वाहन के होने का जिक्र नहीं है। ऐसे में रामनगर से 9 किलोमीटर अंन्दर कोई क्या कोई शातिर बदमाश पैदल जाएगा? वहीं यह भी सवाल उठता है कि उन्नाव से ये कैसे आए? अगर उनके पास कोई साधन नहीं था तो पुलिस उनको पकड़ सकती थी तो आखिर में इनकाउंटर क्यों किया गया?

दूसरा कि पुलिस कह रही है कि मुठभेड़ में मारे गए लोगों ने बताया कि उनके चार साथी भाग गए। हालात बताते हैं कि पुलिस ने जो गोली कनपटी पर मारी वो सड़क पर भी चोट कर गई। ऐसे में साफ प्रतीत होता है कि उनको बहुत पास से गोली मारी गई। आखिर जब वे पुलिस की पकड़ में आ गए थे तो पुलिस ने उन्हें क्यों मारा? क्या ऐसा है कि पुलिस उन्हें पकड़कर लाई, सड़क पर लिटाया और मार दिया?

तीसरा कि रामनगर, मसौली व क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा पिछली 2 जून को भी 6 बदमाशों को पकड़ने का दावा किया गया था। इसमें इब्राहिम के पिता मो0 रजी और मुशीर की पत्नी साजिया शामिल थीं। पारा जिस गांव से इब्राहिम के होने की बात कही जाती है वहां से मालूम हुआ कि कुछ महीनों पहले पुलिस वहां गई थी और इन सभी को वहां से उठा लिया था। ऐसे में कहीं यह तो नहीं कि यह सब पुलिस की निगहबानी में थे और जैसे-जैसे पुलिस को जरुरत हुई वैसे-वैसे उनको दिखाते गए। इस बात को दम वहां फिर मिलता है जब पुलिस कहती है कि दोनों को मारने के बाद 4 भाग गए। इस पर मीडिया में भी सवाल उठता है तो दूसरे दिन हैदरगढ़ में दो को गिरफ्तार करने का दावा किया जाता है। 

चौथा कि मुशीर और इमरान पर कुल तेरह आपराधिक मामले दिखाए गए हैं। जहां दोनों पर मामले एक साथ हैं तो वहीं यह सब आपराधिक रिकार्ड 2018 का है। जिनमें बाराबंकी के थाना रामनगर के 2, जैदपुर, सफदरगंज और कोतवाली नगर का एक-एक मामला है। फैजाबाद के थाना पटरंगा का दो, मवई और रुदौली थाने का एक-एक मामला है। वहीं सीतापुर के महूदाबाद थाने के दो मामले और कोतवाली उन्नाव और कोतवाली नगर उन्नाव के एक-एक मामले हैं। मामलों की संख्या पुलिस की थ्योरी को मदद करती है पर वहीं सवाल यह भी उठता है कि 50-50 हजार के ईनामी अपराधियों की आपराधिक सूची सिर्फ 2018 की। या तो पहले के अपराधों को पुलिस जांच नहीं कर पाई या फिर इन सब पर साजिशन अपराध मढ़ती गई और दरोगा जी ने एक और आउट ऑफ टर्न प्रमोशन का मौका निकाल लिया।

पांचवा कि चार थाना प्रभारियों के साथ स्वाट सर्विसलांस प्रभारी यानी कुल 5 प्रभारी छ बदमाशों से मोर्चा ले रहे थे। जिनके पास 315 बोर का तमंचा, 8 जिंदा कारतूस दो खोखा कारतूस यानी कुल 10 कारतूस थे। वहीं दूसरे व्यक्ति के पास पिस्टल के 12 जिंदा और 3 खोखा कारतूस यानी कुल 15। ऐसे में 5 प्रभारियों के मौजूदगी में चार बदमाश पुलिस को चकमा देकर भाग गए, यह आसान बात नहीं है।

छठवां कि कथित बदमाशों के पास से कुल 5 खोखा कारतूस बरामद हुआ। यानी 5 गोलियां बदमाशों ने चलाईं थी जिससे टिकैतनगर एसओ, एक दरोगा और एक सिपाही घायल हो गए। पुलिस के दावे के अनुसार मुठभेड़ रात में हुई थी तो ऐसे में अगर बदमाशों का निशाना इतना सटीक था तो पुलिस का बचना ऐसे में मुश्किल था।

सातवां कि पुलिस ने घटना का वक्त 3:30 के करीब का बताया है। इस वक्त उजाले वाली रात होती है। पुलिस की 5 गाड़ियों की लाइट, पुलिस की टॉर्चों के बावजूद चार बदमाश इतने कटे हुए क्षेत्र से भाग जाएं। ऐसा संभव नहीं है। 

आठवां पुलिस ने बावरिया गिरोह का इन्हें बताया है। बावरिया गिरोह के अपराधों के बारे में जांच दल के सदस्य पूर्व डीआईजी वजीह अहमद का कहना है कि यह राजस्थान की एक जनजाति होती है। जिनके बारे में है कि वो लूट-पाट की घटनाओं को अंजाम देते हैं और जरूरत पड़ने पर लोहे या किसी भी वस्तु से सिर पर प्रहार करते हैं। ऐसे में पुलिस द्वारा मारे गए युवकों के पास मौजूद असलहे शक पैदा करते हैं। वहीं इस इलाके में ही इमरान के पिता और मुशीर की पत्नी अगर जेल में बंद हों तो ऐसे में यह लोग इस इलाकें में आए और वो भी आधार कार्ड के साथ यह शक को और बढ़ाता है।

रिहाई मंच ने आजमगढ़ में दिए गए प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर कि बड़े-बड़े अपराधियों की आज क्या हालत है और इस पर मुख्यमंत्री योगी की ‘गर्वीली मुस्कान’ पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे फर्जी मुठभेड़ करने वालों का मनोबल बढ़ाने की आपराधिक कोशिश करार दिया है। मंच ने सवाल किया कि ऐसा कैसे है कि दलित, पिछड़ा और मुसलमान ही फर्जी मुठभेड़ में मारा जा रहा है तो कहीं भारत बंद के नाम पर उत्पीड़ित हो रहा है तो कहीं रासुका में निरुद्ध किया जा रहा है

समस्त मुठभेड़ों की जांच कराए सुप्रीम कोर्ट

जांच दल में पूर्व डीआईजी वजीह अहमद, सृजनयोगी आदियोग, विनोद यादव, अनिल यादव, वीरेन्द्र गुप्ता और राजीव यादव शामिल थे

रिपोर्ट जारी करते हुए मंच ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से अपील की कि 2017-18 में बाराबंकी में हुई समस्त मुठभेड़ो की जांच कराई जाए।

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