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एक और व्यापम की तैयारी… जो बोलेगा उसका जस्टिस लोया की तरह का अंत हो सकता है

वीरेन्द्र जैन

आपको पैदा करने बाली दाई का नाम बताइये

क्रूर और निर्मम भ्रष्ट व्यवस्था के पंजे कितने शक्तिशाली और निर्मम हैं यह mppsc की हाल में जारी हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के आवेदन करने बाले आवेदकों को पता चला है. तीन दशकों से परीक्षा का इंतजार कर रहे लाखों आवेदक सर पकड़कर बैठ गए जब उन्होंने उक्त परीक्षा का ऑनलाइन आवेदन करना शुरू किया. आवेदन में 20 – 30 साल पहले दी गईं दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में प्रवेश की तिथि और T C की तिथि पूछी जा रही है जो कि प्रायः किसी के पास नही होती.

महाविद्यालयों में प्रवेश की लंबी प्रक्रिया चलती है और इस तरह के रिकॉर्ड का व्यवस्थित संधारण भी नही होता न ही जरूरत होती है. कभी भी किसी भी लोक सेवा आयोग ने इस तरह की जानकारी कभी नही मांगी है और न ही mppsc ने कभी इस तरह की कोई जानकारी मांगी है.

वर्ष 2014 और 2016 में mppsc इसी विज्ञापन को जारी कर के निरस्त भी कर चुकी है और उसने भी यह ऊलजलूल जानकारी नही मांगी थी. 2016 में तो परीक्षा ठीक परीक्षा तिथि के पहले ही रद्द हो गई थी वरना भर्ती प्रक्रिया अब तक पूरी हो गई होती.

Mppsc के अधिकारी भी इन समस्याओं का कोई संतोषजनक जबाब देने के बजाय अभ्यर्थियों को गुमराह कर रहे हैं. कक्षा 9 वीं से 12वी तक प्रवेश तिथि एक भी हो सकती है और अनेक भी. अगर कोई अभ्यर्थी एक ही कक्षा में एक से अधिक वर्ष अध्ययनरत रहा है तो प्रवेश की कौन सी तिथि मानी जायेगी ? यही नहीं कई अभ्यर्थी प्राइवेट तौर पर भी अध्ययनरत रहते हैं वे ये जानकारी कैसे भरेंगे.

देश भर में हर अभ्यर्थी आम तौर पर अपनी मार्कशीट ही सम्हाल कर रखता है, और उसी का हर जगह उपयोग किया जाता है. मार्कशीट की वैधता का परीक्षण सम्बंधित बोर्ड में किया जा सकता है . मगर प्रवेश या उत्तीर्ण होने की कोई निश्चित तिथि नही वरन वर्ष या सत्र ही होता है. ऐसी स्थिति में mppsc मनमाने तरीके से किसी भी अभ्यर्थी की अभ्यर्थिता का अधिकार छीन सकती है या दे सकती है.

ये सब क्यों किया जा रहा है किसी से छुपा नही है. जाहिर है एक और व्यापम की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है. जब न्यायालयों के न्यायाधीश ही न्याय के लिए जनता की अदालत में आ रहे हों तो ये बेचारे अर्धबुजुर्ग अभ्यर्थी कहाँ जाएँ जिन्हें अपनी पढाई पूरी किये 20 और 30 वर्ष हो गए और कॉलेजों की भर्ती के इंतजार में ये 50 की उम्र पर पहुँच गये हैं. कोई सुनने बाला नहीं कोई बोलने बाला नही. और बोलेगा तो जस्टिस लोया की तरह का अंत उसका हो सकता है. प्रार्थना है कि इस धूर्त स्क्रिप्ट को देश भर तक पहुंचाएं की किस तरह एक और व्यापम की तैयारी की जा चुकी है.

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