झारखण्ड के अनशनकारी किसानों को एनएपीएम का समर्थन

नई दिल्ली, 04 जून, 2017: जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) ने विगत 28 मई से (8 दिनों से) हजारीबाग के बड़कागांव स्थित जुगरा में आमरण अनशन कर रहे किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए रघुबर सरकार से मांग की है कि वो अनशनकारी किसानों से तत्काल वार्ता कर उनकी मांगों मानते हुए उन रैयतों की जमीन पर रास्ता बनाना बन्द कर, उस गाँव को अधिग्रहण से बाहर करे।

सामाजिक कार्यकर्ता और एनएपीएम नेत्री मेधा पाटकर ने कहा,

“आज आमरण अनशन के आठवें दिन किसानों की स्थिति बेहद खराब हैं, जो दिन प्रति दिन नाजुक होती जा रही हैं, कल अनशन के सातवें दिन भगलू साव उम्र 63 वर्ष, भुवनेश्वर साव उम्र 78 वर्ष व जगदीश गोप उम्र 80 वर्ष की खराब स्थिति देख प्रशासन द्वारा हजारीबाग सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं इधर मसोमात टुनकी देवी की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है और वह अनशन स्थल से तमाम कोशिशों के बाद भी कही नही जाने को तैयार है। वहीँ गाँव के तीन नए अनशनकारी अस्पताल गए लोगों के स्थान पर आमरण अनशन शुरू कर आन्दोलन को मजबूती दे रहे हैं।“

उन्होंने कहा,

“पूरा मामला करणपूरा बड़कागांव में NTPC पकरी बरवाडीह कोयला खनन परियोजना का है जिसका विरोध 2006 से अनवरत जारी है। इस परियोजना को केंद्र एवं राज्य की सरकारों ने अपनी नाक का सवाल बना लिया है। इसी कारण यहां अब तक तीन-तीन गोलीकांड हो चुके हैं। सरकार द्वारा हजारों किसानो एवं नेतृत्वकारी साथियों पर फर्जी मुकदमें भी किये गए हैं। जिस कारण शुरू से आज तक इलाके के कोई-न-कोई आंदोलनकारी साथी हजारीबाग जेल में पड़ा रहता है। प्रशासनिक पदाधिकारी किसानों को पद, बन्दूक, कानून एवं अधिनियम का नाम लेकर भयभीत करते रहते हैं। कंपनी को नियम विरुद्ध वन भूमि हस्तांतरित की गई है जिसमें अर्धसैनिक बल एवं कुछ अराजक गुंडा तत्वों की सहायता से जबरन खनन कार्य शुरु है।“

चिरूडीह से निकाली जा रहे कोयले की ढुलाई के लिए जुगरा आराहारा पथ का निर्माण किया जा रहा है। इसका विरोध ग्रामीण कर रहे हैं, “विरोध का कारण यह है कि यह पथ ग्रामीणों की रैयती जमीन पर बिना किसी अधिग्रहण के किया जा रहा है”।

लोगों ने हजारीबाग उपायुक्त पुलिस अधीक्षक एवं स्थानीय प्रशासन को यह कहा कि “कंपनी अपने अधिग्रहित वन भूमि में रास्ता बनावे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है परंतु वह रैयती जमीन से रास्ता बनाने नहीं देंगे क्योंकि उन्होंने तय किया है कि वह अपनी बहुफसली जमीन कंपनी को नहीं देंगे”।

एनएपीएम के मुताबिक  इसके जवाब में उपायुक्त हजारीबाग सहित तमाम पदाधिकारी गांव वालों से यह कहते हैं कि आपके गाँव को अधिग्रहित कर लिया गया है तथा रास्ता तो रैयती जमीन से ही बनेगा चाहे जैसे बने।

एनएपीएम के मुताबिक वर्तमान स्थिति यह है कि कंपनी का रास्ता प्रखंड पुलिस एवं अन्य अर्धसैनिक बल की उपस्थिति में बिना अधिग्रहित किए रैयती जमीन पर जबरन बनाया जा रहा है। इसी काम के खिलाफ 28 मई 2017 से गाँव के छह बुजुर्ग पुरुष तथा दो बुजुर्ग महिलाएँ आमरण अनशन पर बैंठे हुए हैं। 3 दिन तक तो कोई झांकने नहीं गया परंतु चौथे दिन थाना प्रभारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी अनशन स्थल पर गए परंतु वहां वही पुरानी राग अलाप कर चले आए कि “गांव की जमीन अधिकृत हो चुकी है और सभी जाकर अपना मुआवजा उठा ले व अनशन बंद कर दिया जाए। कोयला है तो खनन होगा ही तथा सड़क बनेगी चाहे जैसे बने और उसका परिणाम चाहे जो भी हो”।

एनएपीएम के मुताबिक गौरतलब है कि इस अनशन में सभी अनशनकारी 65 वर्ष से 85 वर्ष के बीच के हैं और उनकी मांगें निम्नलिखित हैं –

1.  रैयती जमीन से सड़क न बना कर कंपनी अपने अधिग्रहित वन भूमि जो इस भूमि के बगल में है उसमें सड़क निर्माण का कार्य करे, ग्रामीणों को आपत्ति नहीं होगी।

 2. जुगरा इस खनन परियोजना के दूसरे चरण में आता है इसलिए इस गांव को परियोजना से बाहर किया जाए।

अनशन अभी भी अनवरत जारी है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: