अच्छे दिन : 12 लाख दिल्लीवासियों की रोजी-रोटी छिनने का खतरा

नई दिल्ली, 4 फरवरी। राष्ट्रीय राजधानी (National capital) के छोटे दुकानदारों (National capital) के सामने इन दिनों उनकी दुकानों से निकाले जाने का खतरा मंडराने लगा है। करीब चार लाख कारोबारियों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने पगड़ी देकर दुकान किराए पर (shop rent) ली थी। कम से कम 10 लाख लोग पगड़ी की दुकान से बाहर निकाले जाने से प्रभावित होंगे। इससे 20-30 लाख मजदूर और सप्लायर भी प्रभावित होंगे। छोटे दुकानदारों से जुड़े व्यापारी संगठनों का कहना है कि दिल्ली किराया कानून (delhi rent act) में संशोधन कर दुकानदारों को राहत दिलाई जाए। अगर 15 दिनों में केंद्र सरकार दिल्ली के दुकानदारों को राहत देने के लिए कोई कदम नहीं उठाती तो वे मतदान से दूर रहेंगे और चुनाव में नोटा का बटन दबाएंगे।

व्यापारी संगठनों ने सोमवार को एक बयान में कहा कि 'राजधानी पगड़ी किरायेदार संगठन' के बैनर तले उन्होंने इस मुद्दे पर दिल्ली के सांसदों से कई बार मुलाकात की। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महेश गिरि, डॉ. हर्षवर्धन, डॉ. उदित राज और मनोज तिवारी जैसे सांसदों ने तत्कालीन शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू के सामने व्यापारियों को उनकी दुकान से बाहर निकालने का मामला सामने रखा था।

बयान के अनुसार, संगठन के पदाधिकारियों ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से पिछले चार सालों में कम से कम 15 बार मुलाकातें की हैं। 2016 में अमित शाह ने यह आश्वासन भी दिया कि एक हफ्ते में कानून को पगड़ी देकर दुकान किराए पर लेने वाले दुकानदारों के पक्ष में संशोधित किया जाएगा, लेकिन जमीन माफिया से जुड़े लोगों के दबाव के कारण कोई फैसला सरकार ने नहीं लिया।

बयान में कहा गया है कि सैकड़ों दुकानदार अपनी रोजी-रोटी का साधन छिनने के डर से हार्ट अटैक एवं स्ट्रोक के शिकार हो चुके हैं। दसियों हजार परिवार दुकान से बाहर निकाले जाने के डर से डिप्रेशन में जिंदगी बिता रहे हैं।

दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने केंद्रीय शहरी विकास और आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई भाजपा नेताओं से पिछले साल मुलाकात की, लेकिन उनकी समस्या दूर नहीं हुई।

व्यापारी संगठनों ने कहा है कि देश के सभी राज्यों में पगड़ी किरायेदार सुरक्षित हैं, पर दिल्ली के पगड़ी किरायेदार के साथ सौतेला व्यव्हार हो रहा है।

बयान में कहा गया है कि दिल्ली के लगभग सभी व्यापारी संघों की मांग है कि इस बजट सत्र में सरकार तुरंत एक संशोधन विधेयक लाकर उसे तुरंत पारित भी करें। अगर विधेयक पारित नहीं होता है तो अध्यादेश लाकर व्यापारियों को राहत दें।

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