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भक्तमंडली का नया नारा होगा – काला धन ज़िंदाबाद !

जीएसटी पर नोटबंदी की तरह ही नित नई अधिसूचनाएं, इसके वैसे ही अंजाम के संकेत हैं। जीएसटी का अपने मूल उद्देश्य में फ़ेल होना तय है।

अरुण माहेश्वरी

भारत में 1 जनवरी 2016 से ही पचास हज़ार के ऊपर के हर लेन-देन के लिये पैन नंबर जरूरी हो गया था। कहा गया था कि यह काला धन को रोकने की दिशा में एक महान कदम है।

लेकिन दो साल नहीं बीते, मोदी ने इसकी उल्टी दिशा में यात्रा शुरू कर दी है। अर्थात पहले काला धन पर रोक की दिशा में जो कदम उठाया गया था, अब उसे वापस लेकर काला धन को खुल कर खेलने देने की दिशा में कदम बढ़ा दिये गये हैं।

इसमें सबसे पहले उन्होंने सोना और जवाहरात के क्षेत्र को चुना है। सब जानते हैं, काला धन को दबा कर रखने का यह एक परंपरागत बदनाम क्षेत्र है। यहाँ तक कि जौहरियों को मनी लौंड्रिंग कानून के दायरे से ही बाहर कर दिया गया है। एक वाक्य में कहें तो जवाहरात के व्यापार को काला धन का घोषित अभयारण्य बना दिया गया है।

पेंडुलम की तरह एक सिरे से दूसरे सिरे तक डोलना, अर्थात एक अति से दूसरी अति तक जाना मोदी की मूल प्रकृति है। इसीलिये, जिसका शिकार करने निकले थे, अब उसी के रक्षक बन गये हैं। जौहरियों को मनि लौन्ड्रिंग कानून से घोषित रूप में छूट देकर बाकी सभी व्यापारियों को भी संदेश दिया गया है कि तुमको तो यह छूट पहले से ही हासिल है।

विदेशों से काला धन लाने की बात को तो इन्होंने पहले ही जुमला घोषित कर दिया था।

अब एक सवाल यह भी उठता है कि काला धन के प्रति मोदी-जेटली में पैदा हुई इस नई प्रीति का असली राज क्या है ? अर्थ-व्यवस्था की हालत ख़स्ता है। निजी पूँजी के निवेश का भारी टोटा पड़ रहा है। ऐसे में इस जुगल जोड़ी को लगता है कि अर्थनीति के ककहरे के पहले अक्षर का यह ज्ञान प्राप्त हुआ है कि धन का रंग काला हो या गोरा, जब वह अर्थ-व्यवस्था में निवेशित होता है तो उसका एक ही रंग होता है, जिसे ‘पूँजी’ कहते है। पूंजी है, तभी मुनाफ़ा है और तभी उससे मिलने वाला राजस्व, चतुर शासक की नज़र मुनाफ़े से कर वसूलने पर लगी होती है।

लेकिन यहाँ भी फिर एक बार इनका रास्ता ग़लत दिशा से शुरू हुआ है। इन्होंने काला धन को सोने और गहनों में खपाने का रास्ता खोल कर उसे पूँजी के बजाय मिट्टी में बदलने का रास्ता अपनाया है।

बहरहाल, यह तय है कि इस दिवाली का उत्सव मोदी और उनकी भक्त मंडली काला धन रूपी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के भव्य आयोजनों से मनायेंगे। भक्तमंडली का नया नारा होगा – काला धन ज़िंदाबाद !

जीएसटी पर नोटबंदी की तरह ही नित नई अधिसूचनाएं, इसके वैसे ही अंजाम के संकेत हैं। जीएसटी का अपने मूल उद्देश्य में फ़ेल होना तय है।

(एफबी से)

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