नयी नीतियां बनाने के साथ वर्तमान नीतियों का क्रियान्‍वयन भी जरूरी : विशेषज्ञ

Along with making new policies, implementation of existing policies is also necessary: Expert मुंबई, 2 मार्च 2021.. विशेषज्ञों, सिविल सोसायटी तथा महाराष्ट्र के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (Department of Environment and Climate Change of Maharashtra) के अधिकारियों ने मंगलवार को अपनी तरह के पहले वर्चुअल सार्वजनिक विचार-विमर्श के दौरान राज्य की हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विस्तृत सुझाव …
नयी नीतियां बनाने के साथ वर्तमान नीतियों का क्रियान्‍वयन भी जरूरी : विशेषज्ञ

Along with making new policies, implementation of existing policies is also necessary: Expert

मुंबई, 2 मार्च 2021.. विशेषज्ञों, सिविल सोसायटी तथा महाराष्ट्र के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (Department of Environment and Climate Change of Maharashtra) के अधिकारियों ने मंगलवार को अपनी तरह के पहले वर्चुअल सार्वजनिक विचार-विमर्श के दौरान राज्य की हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विस्तृत सुझाव दिए। ज्यादातर विशेषज्ञों ने माना कि वायु प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए नई नीतियां बनाने के साथ-साथ मौजूदा नीतियों को बेहतर तरीके से अमलीजामा पहनाना होगा। 

टाउन हॉल कार्यक्रम (Town hall program) के माध्यम से आयोजित क्लाइमेट रेसिलियंट महाराष्ट्र (जलवायु के लिहाज से सतत महाराष्ट्र- Climate Resilient Maharashtra) का उद्देश्य आम नागरिकों, सरकारी इकाइयों, गैर सरकारी संगठनों और शोधकर्ताओं समेत विभिन्न हितधारकों के बीच एक आंदोलन खड़ा करने का है। इन सभी हितधारकों ने मंगलवार 2 मार्च 2021 को आयोजित इस वर्चुअल कार्यक्रम में पर्यावरण पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालने वाले पहलुओं पर समावेशी और सार्थक विचार विमर्श (Inclusive and meaningful discussions on the aspects that have the greatest impact on the environment) की अगुवाई की। इसका उद्देश्य केंद्रित सिफारिशों के जरिए एक सतत कार्य योजना तैयार कर जलवायु के प्रति विमर्श को और मजबूत करना भी है।

आगामी 5 जून को मनाए जाने वाले विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के मद्देनजर प्रस्तावित 4 टाउन हॉल कार्यक्रमों में से यह पहला कार्यक्रम क्लाइमेट वॉयसेस ने आयोजित किया है।

क्लाइमेट वॉयसेस दरअसल तीन संगठनों परपज, असर और क्लाइमेट ट्रेंड्स का संयुक्त उपक्रम है। इसमें महाराष्ट्र के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा शुरू की गई पहल माझी वसुंधरा का भी योगदान है। वातावरण फाउंडेशन और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने इसकी मेजबानी की।

टाउन हॉल का आयोजन परपज, असर और क्‍लाइमेट ट्रेंड्स के समूह क्लाइमेट वॉयसेस ने किया है। इसका उद्देश्‍य लोगों को साथ लेकर वायु की गुणवत्‍ता के बारे में चर्चा करना और समाधान निकालना है। इसमें महाराष्‍ट्र के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की पहल  माझी वसुंधरा (माई अर्थ अभियानभी साथ है। ‘अ टाउन हॉल ऑन एयर पोल्‍यूशन‘ एक अनौपचारिक जनसभा है जिसमें हितों के ऐसे साझा विषय शामिल किए गये, जो उभरते हुए मुद्दों के बारे में नागरिकों को जानकारी देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माध्यम का काम करते हैं।

इस विचार-विमर्श से यह अंदाजा लगाने में मदद मिली कि सुनिश्चित विषयों पर हमारा समुदाय कहां खड़ा है। साथ ही इस कवायद से प्रमुख मुद्दों पर क्रियान्वित किए जाने वाले समाधान की पहचान करने और उनके बारे में सुझाव देने का मंच भी मिला।

इस ऑनलाइन सभा में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों और नागरिकों ने महाराष्ट्र के नगरीय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के समाधान, प्रदूषण मुक्त अर्थव्यवस्था के निर्माण, बहुमूल्य पारिस्थितिकी संसाधनों के संरक्षण वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक पर्यावरण को सुरक्षित रखने आदि पर सरकारी तथा आम नागरिकों द्वारा उठाए जाने वाले कदमों के बारे में भी विचार-विमर्श किया।

इस कवायद के जरिए हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने की राज्य सरकार की जलवायु संबंधी योजना के लिए स्पष्ट सिफारिशों और मौजूदा महत्वपूर्ण जानकारियों का एक स्पष्ट खाका पेश किया गया। साथ ही इसके माध्यम से आम जनता के बीच इसके संदेश को बेहतर तरीके से पहुंचाने, समाचार मीडिया कवरेज कराने तथा सरकार और नागरिकों दोनों के ही द्वारा स्थानीय स्तर पर पैरोकारी (एडवोकेसी) संबंधी प्रयासों को जमीन पर उतारने की कोशिश भी की गई।

महाराष्ट्र के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रमुख सचिव मनीषा म्हाइसकर ने टाउन हॉल और राज्य के क्लाइमेट एक्शन प्लान के लिहाज से इसके क्या मायने हैं, इस बारे में कहा कि राज्य सरकार जलवायु परिवर्तन, क्लाइमेट रेसिलियंस तथा क्लाइमेट एक्शन के प्रति बहुत गंभीर है। अगर हम 2020 में जाएं तो हमने कोरोना महामारी के बीच माझी वसुंधरा अभियान का गठन किया। हम सभी का मानना है कि 2020 से शुरू हुआ यह दशक वह जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने के लिहाज से आखिरी दशक है। उसके बाद बहुत देर हो जाएगी। पूरी दुनिया से उठ रही आवाजें  कह रही हैं कि यह महामारी जलवायु परिवर्तन का परिणाम थी। कोविड-19 वायरस एक जूनोटिक वायरस है जो जानवरों से इंसान में पहुंचा है। ऐसा इसलिये सम्‍भव हुआ क्योंकि हमने जंगली जानवरों के निवास स्थानों पर कब्जा कर लिया।

21वीं सदी में एक खतरनाक रूप ले चुका है वायु प्रदूषण

 उन्‍होंने कहा ‘‘जहां तक वायु प्रदूषण का सवाल है तो मैं कहूंगी कि यह 21वीं सदी में एक खतरनाक रूप ले चुका है। कोविड-19, जीका, इबोला सभी जूनोटिक वायरस (Zoonotic virus) है और यह जानवरों से इंसान में दाखिल हुए लेकिन हमने इन संकेतों को गंभीरता से नहीं लिया। माझी वसुंधरा में हम विश्वास करते हैं कि क्लाइमेट एक्शन में हर किसी को साझीदार बनना होगा। बहुत से लोग अपने हिस्से की भूमिका निभाना चाहते हैं। माझी वसुंधरा के तहत पहला कदम उठाते हुए हमने लगभग 700 बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों और गांवों को भी साथ लिया है। दूसरी पहल के तहत 18 लाख लोगों को ई-प्रतिज्ञा दिलायी है, क्योंकि हर व्यक्ति फर्क पैदा कर सकता है। हम अपने रोजमर्रा की जिंदगी में भी अपनी छोटी-छोटी आदतों को बदलकर पर्यावरण का संरक्षण करने में योगदान कर सकते हैं। मांझी वसुंधरा की टीम ई-प्रतिज्ञा लेने वाले सभी लोगों को साथ लाकर उनके प्रतिज्ञा को पूरा करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है।’’

उन्‍होंने कहा ‘‘तीसरी पहल हमारी यह है कि माझी वसुंधरा पाठ्यक्रम शुरू किया जाए। अगर महाराष्ट्र के स्कूलों में शुरुआत में ही पाठ्यक्रम में प्रदूषणमुक्‍त क्रियाकलापों के बारे में पढ़ाया जाएगा तो बच्चे उन्हें अपने जीवन में उतारेंगे।’’

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव ने राज्य में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए प्रदेश की कार्य योजना पर रोशनी डालते हुए कहा कि हर वैज्ञानिक कहता है कि आप जिस चीज को नाप नहीं सकते उसे आप जान नहीं सकते। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नेटवर्क बढ़ रहा है। रेगुलेटरी एनालाइजर्स बहुत महंगे हैं। हमें स्‍थानीय स्‍तर पर निर्मित सेंसर की जरूरत है मगर उनके भरोसेमंद होने को लेकर कुछ समस्‍या है। हम इसका हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं। हम सभी सोर्स अपॉर्शनमेंट पर ध्यान दे रहे हैं लेकिन रिसेप्टर स्‍तरीय प्रदूषण पर भी ध्यान देने की जरूरत है। जब हम सोर्स अपॉर्शनमेंट पर देखते हैं तो पाते हैं कि खासतौर पर पावर प्लांट की वजह से प्रदूषण बढ़ रहा है। हम सभी जानते हैं कि प्रदूषण के स्रोत क्या हैं। जहां तक गाड़ियों से निकलने वाले धुएं का सवाल है तो हम मानते हैं कि इस दिशा में काफी प्रगति हुई है। हम इस मसले पर परिवहन विभाग के सम्‍पर्क में हैं। हम वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में विचार-विमर्श के लिए एक समिति गठित कर चुके हैं।

महाराष्‍ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संयुक्‍त निदेशक डॉक्‍टर वी. एम. मोटघरे ने कहा कि महाराष्ट्र के 18 जिले नॉन अटेनमेंट शहरों में शामिल हैं। महाराष्ट्र नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम को लेकर काफी गंभीर है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 42 कदम सुझाए थे। उन पर काम किया जा रहा है। महाराष्ट्र के लिए ई-वाहन नीति बनाने का काम अंतिम चरण में है। मुंबई में मॉनिटरिंग नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। सड़कों से उड़ने उड़ने वाली धूल की समस्या का समाधान किया जा रहा है। इसके अलावा ईंधन में सल्फर की मात्रा कम की जा रही है। होटल उद्योग में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल पर काम किया जा रहा है, वाहनों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित किया जा रहा है और कचरे तथा बायोमास को गलत जगह पर फेंकने और जलाने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की अधिशासी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने ऐसे 10 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का जिक्र किया जिन पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में वायु प्रदूषण के संकट के लिए अलग से बजट आवंटित किया गया है। यह एक अच्छा कदम है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021-22 के आम बजट में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए महाराष्ट्र को 793 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इनमें मुंबई को 488 करोड़, पुणे को 134 करोड़, नागपुर को 66 करोड़, नासिक को 41 करोड़ और औरंगाबाद तथा वसई-विरार को 32-32 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। मगर महाराष्ट्र के बाकी 13 नॉन अटेनमेंट शहरों को अपने-अपने यहां वायु की गुणवत्ता में सुधार के लिए बहुत कम रुपए दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के अमरावती, कोल्हापुर, नागपुर और सांगली जिलों को वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र से नहीं जोड़ा गया है जबकि रियल टाइम मॉनिटरिंग ग्रिड का विस्तार किया जाना चाहिए। इसके अलावा ग्रामीण तथा उपनगरीय इलाकों में वायु की गुणवत्ता की निगरानी की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में वायु प्रदूषण की स्थिति सुधारने के लिए प्रदूषण रहित ईंधन और प्रौद्योगिकी को अपनाना होगा, परिवहन व्यवस्था के स्वरूप में आमूलचूल बदलाव करना होगा, ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन की व्यवस्था मैं भी बुनियादी बदलाव करने होंगे। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जाने वाले कदमों के पैमाने और गति को भी बढ़ाना होगा। इसके अलावा वर्ष 2022 तक सभी नए थर्मल पावर प्लांट में प्रदूषण नियंत्रण संबंधी मानकों को सख्ती से लागू कराया जाना चाहिए। साथ ही साथ प्रदूषण नियंत्रण संबंधी मानकों को लागू करने के लिए संयंत्रवार कार्य योजना लागू करनी होगी।

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