दुनिया के बड़े उद्योगों में से हर पांचवां नेट ज़ीरो होने के लिए तैयार

One-fifth of the world’s largest companies now have net-zero targets: Report Minimum criteria required for participation in the Race to Zero campaign नई दिल्ली, 24 मार्च 2021. दुनिया के 61 प्रतिशत देश, दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रदूषण करने वाले देशों में 9 प्रतिशत राज्य और 50 लाख की आबादी से अधिक वाले 13 प्रतिशत शहर …
दुनिया के बड़े उद्योगों में से हर पांचवां नेट ज़ीरो होने के लिए तैयार

One-fifth of the world’s largest companies now have net-zero targets: Report

Minimum criteria required for participation in the Race to Zero campaign

नई दिल्ली, 24 मार्च 2021. दुनिया के 61 प्रतिशत देश, दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रदूषण करने वाले देशों में 9 प्रतिशत राज्य और 50 लाख की आबादी से अधिक वाले 13 प्रतिशत शहर अब नेट जीरो कार्बन एमिशन (Net zero carbon emission) के लिए प्रतिबद्ध हैं। यही नहीं, लगभग 14 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार करने वाली दुनिया की 2,000 सबसे बड़ी सार्वजनिक कंपनियों में से हर पांचवी कम्पनी (21% कंपनियां) ने भी नेट ज़ीरो कार्बन एमिशन का लक्ष्य हासिल करने का इरादा कर लिया है।

Energy and Climate Intelligence Unit (ECIU) and Oxford Net Zero Report

इन बातों का ख़ुलासा हुआ ऊर्जा और जलवायु इंटेलिजेंस यूनिट (ECIU) और ऑक्सफोर्ड नेट ज़ीरो की एक ताज़ा रिपोर्ट से।

इतना ही नहीं, इनमें से ज़्यादातर कंपनियों के पास न सिर्फ़ एक अंतरिम लक्ष्य है बल्कि एक प्रकाशित योजना और एक रिपोर्टिंग तंत्र भी है। बड़ी जल्दी ही इन सबने एक ‘जबरदस्त मानदंड’ का पूरा सेट भी तैयार कर लिया है। लेकिन इस रिपोर्ट के लेखक ये चेतावनी भी देते है कि यदि एक अच्छी गवर्नेंस, पारदर्शिता और एक भरोसेमंद ऑफ़सेटिंग को प्राथमिकता न दी गयी तो इन देशों और संस्थानों पर लापरवाही के आरोप भी लग सकते हैं।

अपनी तरह की पहली खास रिपोर्ट

टेकिंग स्टॉक : अ ग्लोबल असेसमेंट ऑफ़ नेट जीरो टारगेट्स शीर्षक की यह अपनी तरह की पहली रिपोर्ट तमाम देशों, सब-नेशनल सरकारों और प्रमुख कंपनियों में नेट जीरो की ज़िम्मेदारी का पहला व्यवस्थित विश्लेषण करती है (‘Taking Stock: A global assessment of net-zero targets’ is the first systematic analysis of net-zero commitments across countries, sub-national governments and major companies)।

इस रिपोर्ट के ज़रिये इस बात को भी ठीक से बताया गया है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित किए गए ‘रेस टू जीरो’ अभियान में इन नेट जीरो लक्ष्यों का एक न्यूनतम निर्धारित मानदंड क्या है, या शुरुआती लाइन क्या है जो इसे लक्ष्य तक पहुंचाती है, इस सबका भी उल्लेख है।

फ़िलहाल 20 फ़ीसद ही मौजूदा नेट जीरो लक्ष्यों का को हासिल कर पाए हैं और ऐसे में COP 26 के पहले करने को बहुत कुछ बच जाता है।

What is Race to Zero

The Race to Zero is an umbrella campaign—driven by science—that aggregates net zero commitments from a range of leading networks and initiatives across the climate action community.

ECIU (ऊर्जा और जलवायु इंटेलिजेंस यूनिट) में वरिष्ठ सहयोगी और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक रिचर्ड ब्लैक कहते हैं, “हालांकि अब तक नेट जीरो कार्बन एमिशन की अवधारणा अपनी प्रारंभिक अवस्था में ही है, और इनकी नीतियों में बदलाव भी हो रहा है। लेकिन स्पष्ट रूप से दुनिया के ग्लोबल जलवायु लक्ष्यों को पटरी पर रखने के लिए हमें अधिक से अधिक देशों, राज्यों, क्षेत्रों और कंपनियों को साइन अप करना होगा और मौजूदा वायदों और नीतियों में सुधार करना होगा।

वो आगे कहते हैं,

“एक लक्ष्य निर्धारित करने और फिर उसको प्राप्त करने के लिए एक योजना और रिपोर्टिंग मेकनिज़्म्स बनाने की ज़रुरत है, लेकिन कंपनियों और देशों को समान रूप से COP के साथ साथ गति बनाये रखने के लिए लगातार कार्य करने की भी आवश्यकता होगी। जापान और अमेरिका जैसे देशों को 2030 तक नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने की अपनी महत्वाकांक्षाओं बनाये रखने के वायदे पर कायम रहने की ज़रुरत होगी।”

Companies with net zero targets, companies committed to net zero,

रिपोर्ट में इस स्पष्टता की कमी की भी पहचान की गई है कि किस तरह से देश और कंपनियां लक्ष्य को पूरा करने के लिए ऑफसेटिंग का इस्तेमाल या दुरूपयोग कर रहे हैं। साथ ही, इसमें यह चेतावनी भी दी गयी है कि प्रकृति-आधारित ऑफसेट की एक सीमा होती है इसलिए इस पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रह सकते।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑक्सफ़ोर्ड के ब्लावात्निक स्कूल के सह-लेखक डा थॉमस हेल बताते हैं, “हालाँकि नेट जीरो कार्बन एम्मिशन लक्ष्यों में तेजी से वृद्धि होना उत्साहजनक है, लेकिन हमें इस कार्य को करने वालों से बहुत अधिक स्पष्टता की ज़रुरत है कि वे कैसे अपने लक्ष्य तक पहुंचने की योजना बनाते हैं। यह विशेष रूप से ज़रूरी है कि इस कार्य को करने वाले ऑफसेट करने के लिए अपने दृष्टिकोण को साफ़ करें । हालांकि कुछ क्षेत्रों में तथाकथित “अवशिष्ट उत्सर्जन” के लिए कुछ ऑफसेट की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन सबसे ज़्यादा ज़रुरत है कि जल्द से जल्द उत्सर्जन में कमी की जाये। अगर हर कंपनी और देश ऑफसेट पर ही निर्भर करते हैं बजाय इसके कि वास्तविक उत्सर्जन में कटौती कि जाए, तो हम ग्लोबल स्तर पर इसे प्राप्त नहीं कर पाएंगे।”

नेट जीरो लक्ष्य वाले देशों के कुल 61% ग्लोबल उत्सर्जन में से 68% ग्लोबल सकल घरेलू उत्पाद का (पीपीपी के संबंध में) और ग्लोबल जनसंख्या का 52% हिस्सा हैं। सरकारों को यह भी जाहिर करना चाहिए कि रिपोर्ट लेखक, रिपोर्टिंग तंत्र, प्रकाशित योजनाओं और विश्वसनीय अंतरिम लक्ष्यों के द्वारा अपने वायदों का समर्थन करें। अब 124 देश जो समर्पित हैं या नेट जीरो कार्बन एम्मिशन का विचार करते हैं, और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश जो इस तरह के लक्ष्य नहीं रखते वो माइनॉरिटी में हैं और अलग-थलग से दिखते हैं, ऐसा देखा गया है।

होने वाला है COP 26 जलवायु शिखर सम्मेलन

ग्लासगो में COP 26 जलवायु शिखर सम्मेलन की अगुवाई में, नेट जीरो कार्बन एम्मिशन लक्ष्य प्राप्त करने वाली संस्थाओं की संख्या पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और पेरिस समझौते के तहत 2030 तक जलवायु परिवर्तन को ‘सुरक्षित’ सीमा के भीतर रखने में मदद करने की उनकी क्षमता पर ध्यान दिया जाएगा। (जिसे राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान या एनडीसी के रूप में जाना जाता है)। हालांकि रिपोर्ट में यह भी रिकॉर्ड किया गया है कि यदि देशों के अंतरिम लक्ष्य हैं, तो नेट जीरो कार्बन एम्मिशन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए ये अंतरिम लक्ष्य कितने अनुकूल या माफ़िक हैं, यह जानने के लिए जानकारी हासिल करने की आवश्यकता है।

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में नेट ज़ीरो पॉलिसी रिसर्चर के सह-लेखक केट कुलेन ने कहा,

“लक्ष्य निर्धारण पहला कदम है और इनका उपयोग शुरुआती बिंदु के रूप में किया जाना चाहिए, देशों, राज्यों और कंपनियों ने विशेष रूप से उत्सर्जन में कटौती की योजना कैसे विकसित की है, ये महत्वपूर्ण है कि ये कम से कम समय में हासिल हो ।

“इस तरह से काम करके ग्लोबल स्तर पर नेट जीरो कार्बन एम्मिशन लक्ष्यों के लिए बेसलाइन निर्धारित करना बहुत ज़्यादा महत्वपूर्ण होगा, ताकि यह बेहतर तरीके से ट्रैक पर रहे और इसका ठीक से अंदाज़ा भी लग सके, और यह भी मापने के लिए मानदंड विकसित करने में मदद करें कि योजनाएं कितनी ज़बरदस्त हैं। नेट शून्य पहले से ही एक उपयोगी लेंस है जिसके माध्यम से हम जलवायु ठीक करने में होने वाले परिवर्तन की प्रगति देख सकते हैं; मजबूत निगरानी, मूल्यांकन और आकलन इसे बेहतर बनाने में मदद करेंगे।”

स्मिथ स्कूल ऑफ एंटरप्राइज और एनवायरनमेंट, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सह-लेखक डॉ स्टीव स्मिथ ने कहा,

“नेट जीरो कार्बन एम्मिशन केवल एक स्पष्ट और सरल लक्ष्य नहीं है, यह तापमान में वृद्धि को रोकने के लिए आज कि वैश्विक जरूरत है। नेट ज़ीरो टार्गेट सबसे अधिक उपयोगी होते हैं, जब वे निकट-अवधि के लिए किये जाएँ, साफ़ सुथरी योजनाओं, रिपोर्टिंग और अन्य गवर्नेंस तंत्र पर ध्यान भी केंद्रित रहे जो इस पर कार्य करने वालों को सही ट्रैक पर रहने में मदद करेंगे।”

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