उदारीकरण की लीक पर चलने वाला जनविरोधी बजट : ​माकपा

बजट में पिछली बार की तरह ही थोथे वादे तो है, लेकिन इन्हें पूरा करने की कोई नीतिगत प्रतिबद्धता नहीं दिखती....

 

रायपुर, 06 मार्च। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश बजट को केन्द्र के नक़्शे-कदम पर उदारीकरण की लीक पर चलने वाला जनविरोधी बजट करार दिया है, जिसके केन्द्र में पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना तो है, लेकिन गांव-गरीब-कर्मचारियों की कोई चिंता नहीं है. बजट के बढ़े आकार का उपयोग किसानों को बोनस देने, कर्मचारियों को 7वां वेतनमान देने और प्रदेश में रिक्त एक लाख से ज्यादा सरकारी पदों को भरने तक के लिए नहीं किया गया है, जिससे आम जनता की क्रय-शक्ति में वृद्धि हो सकती थी.

आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा कि बजट में पिछली बार की तरह ही थोथे वादे तो है, लेकिन इन्हें पूरा करने की कोई नीतिगत प्रतिबद्धता नहीं दिखती. कृषि बजट में वृद्धि के दावे के बाद भी हकीकत यही है कि प्रदेश के किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर न तो समर्थन मूल्य देने की चिंता है, न बोनस देने की और न ही मनरेगा का बकाया भुगतान करने व मजदूरी में वृद्धि करने की. शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र को निजी हाथों को सौंपने की नीति बदस्तूर जारी है. स्वास्थ्य बीमा प्रति परिवार 50000 रूपये करने की घोषणा तो पिछले बजट में ही की गई थी, जिसे पूरा नहीं किया गया और इस बार भी पूर्ण होने की कोई गारंटी नहीं. कृषि संकट इतना गहरा है कि किसान आत्महत्या कर रहे हैं और बजट इससे उबरने का कोई रास्ता नहीं दिखाता.

माकपा ने कहा है कि पिछले वर्ष देश में केवल 1.35 लाख नए रोजगारों का ही सृजन हुआ, लेकिन यह बजट प्रदेश में 16 लाख रोजगारों के सृजन का दावा करता है. बजट में नोटबंदी से उपजी हताशा से निपटने की कोशिश में स्मार्ट फोन वितरण की योजना रखी गई है, जो वास्तव में अंबानी ​​और अन्य इंटरनेट कंपनियों को 1600 करोड़ रूपये से ज्यादा का ​​सीधा फायदा पहुंचाएगी.

पराते ने कहा है कि कैग की रिपोर्ट बताती है कि सरकारी स्तर पर कितना भ्रष्टाचार फैला हुआ है और इस पर रोक की कोई कोशिश भी नहीं है.

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