गधों की मौत बनकर आया चीन, दुनिया भर में बेरहमी से मारे जा रहे हैं गधे

चीनी दवा के लिए दुनिया भर में बेरहमी से मारे जा रहे हैं गधे, 6-7 साल में गधों के सींग की तरह गायब हो जाएंगे गधे...

गधों की मौत बनकर आया चीन, दुनिया भर में बेरहमी से मारे जा रहे हैं गधे

 

चीनी दवा के लिए दुनिया भर में बेरहमी से मारे जा रहे हैं गधे, 6-7 साल में गधों के सींग की तरह गायब हो जाएंगे गधे

नई दिल्ली, 12 फरवरी। क्या आप सोच सकते हैं कि एक दिन जब आप नींद से जागें और आप के घर और शहर के सभी वाहन, गाड़ी गायब हो गए हों, या फिर उन के सभी पार्ट्स जैसे टायर इंजन निकल दिए गए हों। आप के लिए आने-जाने का कोई साधन न बचा हो। स्कूल  जाना, ऑफिस के लिए  समय पर पहुँचना , खाने पीने के सामान जुटाना सब दूभर हो जाए।

जी हाँ, यह अकल्पनीय है परन्तु सत्य है।

हाल ही में तंज़ानिया के ग्रामीण समुदाय में ठीक यही हुआ, लेकिन वे महँगे वाहन - कारें या मोटर गाड़ियां  नहीं, बल्कि गधे थे।

तंज़ानिया में ग्रामीणों ने एक सुबह उठ कर देखा कि उन के मेहनती कामकाजी पशु चोरी हो चुके हैं जिन्हें मार कर उनकी खाल निकली जा चुकी है।

वो एक बहुत ही बहुत भयानक एवं वीभत्स दृश्य था। गधों के लिए एक भीषण दर्दनाक मौत दे दी गई थी।

दरअसल चीन दुनिया भर में गधों की मौत बनकर सामने आया है। गधों की खाल का वैश्विक व्यापार, दुनिया भर के लोगों की आजीविका व गधा कल्याण पर प्रभाव डाल रहा है।

इस संबंध में डंकी सैंक्च्युरी यूके ने एक चौंकाने वाली व गधों की पीड़ा बयां करती रिपोर्ट अंडर द स्किन (Under the skin )जारी की है, जो बताती है कि वैश्विक व्यापार में एक चीनी पारंपरिक दवा ejiao इजाओ की मांग पूरी करने के लिए उनकी खाल के लिए उन्हें बेरहमी से मारा जा रहा है।

ejiaoडंकी सैंक्च्युरी यूके के सीईओ माइक बेकर Mike Baker ने एक वक्तव्य जारी किया है, जिसमें बेकर ने कहा कि ये सिर्फ एक उदाहरण है गधों की चमड़ी के व्यापार का। गधों के व्यापार का सीधा असर उन के कल्याण एवं गरीब  ग्रामीणों की रोज़ी रोटी पे पड़ रहा है। वर्तमान में गधों की चमड़ी की माँग बेहद निर्मम है जिस का एक हिस्सा चीनी दवाई एजीआओ बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है , जो गधो पें आश्रित गरीब समुदाय के लिए घातक है और वो अपना आसरा खो रहे हैं !

बेकर के मुताबिक

“हमारी ये रिपोर्ट इस स्तब्ध कर देने वाली है, जो विश्वव्यापी व्यापार जो कि इस उत्पाद के लिए किया जा रहा है, का खुलासा करती है।“

माइक बेकर कहते हैं कि गधों की तेज़ी से घटती जनसँख्या और गधों पे आश्रित गरीब समुदाय के आजीविका के साधन को बचाने के लिए कदम उठाना अनिवार्य है जो पशु एवं मनुष्यों दोनों के कल्याण के हित में है।

इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुख्य कर्ता-धर्ता व डंकी सैंक्च्युरी यूके के प्रोग्राम मैनेजर एलेक्स मेयर्स ने तंजानिया के एक बाजार डोडोमा का जिक्र करते हुए कहा है कि तंजानिया का यह बाजार गधों के कत्ल का बिचौलिया बन गया है।

एलेक्स के मुताबिक तंजानिया सरकार के नियम के मुताबिक वहां के दो स्लाटर हाउस में प्रतिदिन 40 गधों को मारे जाने की अनुमति है। इसलिए इस बाजार से खरीदे गए गधे स्लाटर हाउस में अपनी मौत आने का इंतजार करते हैं। लेकिन दुखद यह है कि लगभग 6 या 7 गधे प्रतिदिन स्लाटर हाउस जाने से पहले ही मर जाते हैं।

अंडर द स्किन रिपोर्ट गधों के इस व्यापार, जो दुनिया भर में ब्राजील से पाकिस्तान तक गरीब समुदायों को सीधा मार रहा है, चौंकाने वाले तथ्य सामने लाती है।

रिपोर्ट बताती है कि इजाओ की मांग पूरी करने के लिए दस मिलियन गधों को कत्ल करने के लिए दुनिया भर से आउटसोर्स किया जा रहा है। और इस व्यापार के निशाने पर इस समय गरीब व विकासशील देश, खासकर अफ्रीकी देश निशाने पर हैं।

रिपोर्ट बताती है कि अप्रीका, एशिया व दक्षिणी अमेरिकी देशों से बड़े पैमाने पर गधे उनकी खाल के लिए खरीदे जा रहे हैं, चोरी किए जा रहे हैं और कत्ल किए जा रहे हैं।

यह व्यापार वैध व अवैध दोनों तरीके से किया जा रहा है।

रिपोर्ट बताती है कि गधों के इस व्यापार ने गरीब देशों में गधों की कीमतों में भारी इजाफा कर दिया है जिसके चलते गरीब लोग अब नए गधे नहीं खरीद सकते।

रिपोर्ट के मुताबिक तंजानिया में वर्ष 2010 में एक गधे की कीमत 50,000 टश (तंजानियन मुद्रा) होती थी, जो इस व्यापार की नज़र लगने के बाद 1,90,000 टश हो चुकी है।

जबकि उनकी खाल,  450,000 TSH (£ 160) पर बेचा जा रहा है।

डंकी सैंक्च्युरी इंडिया की कम्युनिकेशन मैनेजर रश्मि शर्मा ने बताया कि डंकी सैंक्च्युरी इंडिया के पशु चिकित्सक डॉ. सुरजीत कुमार अभी इस रिपोर्ट को सामने लाने वाले एलैक्स मेयर के साथ तंजानिया का दौरा करके वापस लौटे हैं।

डॉ. सुरजीत नाथ ने बताया कि तंजानिया में प्रतिदिन एक स्लाटर हाउस में 300 गधे तक अवैध रूप से कत्ल किए जा रहे हैं। यदि यही रफ्तार जारी रही तो एक वर्ष में लगभग 80 या 85 हजार गधे तंजानिया में मार दिए जाएंगे और 6 या7 साल में तंजानिया में गधे, गधों के सींग की तरह गायब हो जाएंगे। 

क्या है इजाओ

इजाओ एक कठोर जैल है, जो गर्म पानी अथवा एल्कोहल में मिलाकर भोजन या पेय में प्रयोग किया जाता है। यह सौन्दर्य प्रसाधनों जैसे फेस क्रीम में भी प्रयोग किया जाता है।

चीन के मध्य वर्ग में हाल के वर्षों में पारंपरिक दवाओं जैसे गैंडों के सींग, शेर के अंगों के साथ ही इजाओ की मांग तेजी से बढ़ी है।

चीन की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के मुताबिक यह विश्वास किया जाता है कि रक्त संचार में सुधार, प्रजनन समस्याओं की दवा व एनिमिया के उपचार हेतु एक रक्त टॉनिक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में इजाओ की मांग में नाटकीय ढंग से बढ़ोत्तरी हुई है।

तेजी से घट रही है गधों की आबादी

1990 के दशक तक गधों की खाल की आपूर्ति चीन में अपने देश से ही की जाती थी। लेकिन पिछले तीन वर्षों में इजाओ की मांग में बेतहाशा वृद्धि हुई है जिसके चलते चीन की अर्थव्यवस्था में बूम आया है।

20 वर्ष पहले चीन में गधों की आबादी 11 मिलियन थी जो अब घटकर 6 मिलियन रह गई है।

गधे और गधों की खाल का अफ्रीका व अन्य देशों से बड़े पैमाने पर चीन के लिए निर्यात हो रहा है।

गधे उनके मालिकों द्वारा वैध तरीके से बेचे जाते हैं, जबकि बड़ी संख्या में गधे चोरी हो रहे हैं।

कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं, जिनके मुताबिक मिस्र से दस हजार गधे चीन को निर्यात किए गए। जबकि मिस्र की सरकार इससे इंकार करती है। जाहिर बात है कि सरकार के इंकार के बाद गधे तस्करी के जरिए चीन भेजे जा रहे हैं।

दो देशों बुरकिना फासो और नाइज़र, जो कि चीनी व्यापारियों के निशाने पर थे, ने गधों की खाल व गधों के निर्यात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। 

सभी चित्र डंकी सैंक्च्युरी यूके  से साभार

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।