अखिलेश सरकार का खेल - थर्मल_बैकिंग के जरिये पूंजी घराने लूट रहे सरकारी खजाना

इस वर्ष जनवरी तक 250 करोड़ यूनिट सस्ती बिजली पैदा कर रहे हमारे सरकारी बिजली घरों से जानबूझ कर नहीं बनाई और अम्बानी व बजाज की कंपनियों से मंहगी दरों पर खरीद कर करीब 1200 करोड़ की चपत सरकारी खजाने को लगी...

 

#राजनैतिक_माफियाओं को सजा दें

#बिजली परियोजनाओं में ठेका प्रथा के जरिये भ्रष्टाचार को किया गया है संस्थाबद्ध

लखनऊ। अगर आप अखिलेश सरकार के विकास और 24 घंटे बिजली देने के वादे पर भरोसा कर रहे हैं तो थोड़ा सावधान हो जाएं, क्योंकि उत्तर प्रदेश में थर्मल बैकिंग के जरिये रिलायंस/बजाज जैसे पूंजी घरानों ने राजनैतिक माफियाओं से मिल कर सरकारी खजाने की बड़े पैमाने पर लूट की है।

यह आरोप जयकिसान आन्दोलन (स्वराज अभियान) के राष्ट्रीय सह संयोजक अजीत सिंह यादव, वर्कर्स फ्रंट, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर व वर्कर्स फ्रंट, उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री राजेश सचान ने एक संयुक्त वक्तव्य में लगाया है।

तीनोंनेताओं ने कहा कि थर्मल बैकिंग यानि सरकारी बिजली परियोजायें जितना बिजली पैदा कर सकती हैं, उसको सरकार के हस्तक्षेप पर जानबूझ कर कम उत्पादन पर चलाना और यहां तक की उन्हें बंद कर पूंजी घरानों से मंहगी दरों पर बिजली खरीद कर सरकारी खजाने की लूट करना है।

उन्होंने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में जनवरी तक 250 करोड़ यूनिट सस्ती बिजली पैदा कर रहे हमारे सरकारी बिजली घरों से जानबूझ कर नहीं बनाई गयी और इसको अनिल अम्बानी व बजाज की बिजली कंपनियों से मंहगी दरों पर खरीद कर तकरीबन 1200 करोड़ की चपत सरकारी खजाने को लगी।

थर्मल बैकिंग के जरिये सरकारी खजाने की लूट अभी भी जारी है और राजनैतिक माफिया पूंजीघरानों से मिलकर एक बड़े बिजली घोटाले को अंजाम दे रहे हैं। दरअसल यह खेल सरकारी बिजली घरों को बर्बाद कर उन्हें पूंजी घरानों के हाथों बेंच देने के लिए किया जा रहा है। इन सरकारी बिजली घरों को बर्बाद करने की साजिश ठेका प्रथा के जरिये भी की जा रही है। यहां दसियों साल से काम कर रहे मजदूरों को ठेका कंपनियों/बिचैलियों के जरिये काम पर रखा गया है पर असल में उनसे काम ठेका कंपनिया नहीं बल्कि प्लांट के इंजीनियर व अधिकारी ही कराते है, ऐसे में इन बिचैलियों की कोई जरूरत ही नहीं है।

वक्तव्य में कहा गया है कि राजनैतिक माफिया व बड़े अधिकारी ठेका प्रथा के जरिये भ्रष्टाचार को संस्थाबद्ध कर सरकारी खजाने को लूट रहे हैं। प्रदेश में 10 हजार मेगावाट से अधिक बिजली की जरूरत रहती है और यह डिमांड 15 हजार मेगावाट तक पहुंच जाती है। हमारे सरकारी ताप बिजली घर अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, पारीक्षा व पनकी में कुल मिला कर 6 हजार मेगावाट बिजली बनाने की क्षमता है। अगर अनपरा सी, ऊंचाहार व टांडा जैसे सरकारी बिजली घरों को बेचा न गया होता व ओबरा, हरदुआगंज, पनकी के पुराने बिजली घरों का जीर्णोद्धार कर पूरी क्षमता से चलाया जाता तो हमें बिजली खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ती। 

बता दें कि अनपरा‘डी’ सहित अनपरा प्लांट से पैदा होने वाली बिजली की लागत(ईधन इत्यादि का खर्च) 2 रू0 से कम है। सरकार रिलायंस से 5.50 रू0 बजाज एनर्जी से 6.82रू0, ललितपुर से 4.83 रू0, जेपी के बारा प्लांट से 4.32 रू0 की मंहगी दरों से बिजली खरीदी जा रही है और बिजली संकट बढ़ने के साथ ही यह बिजली खरीद 18 रू0 प्रति यूनिट की जाती है, जिसकी कीमत अंततः जनता को चुकानी पड़ती है।

वक्तव्य में कहा गया है कि जाहिर है कि राजनैतिक माफिया पूंजी घरानों से मिलकर न सिर्फ सरकारी खजाने को लूट रहे हैं बल्कि जनता की जेब पर भी डाका डाल रहे हैं। आइपीएफ व स्वराज अभियान थर्मल बैकिंग के इस बिजली घोटाले व ठेका प्रथा के खिलाफ शुरू से ही आवाज उठा रहे हैं। हमारा मानना है कि यह लूट बंद होनी चाहिये और ठेका प्रथा बंद कर सभी ठेका मजदूरों की नौकरी पक्की हो।

तीनों नेताओं ने बताया कि ओबरा विधानसभा क्षेत्र में स्वराज अभियान समर्थित आइपीएफ ने राजनीतिक माफियाओं को सजा देने के लिए और नये राजनैतिक विकल्प के लिए हिंडालको के मजदूर कृपाशंकर पनिका को चुनाव में प्रत्याशी बनाया है। हम थर्मल बैकिंग के जरिये अनिल अम्बानी -बजाज जैसे पूंजी घरानों द्वारा राजनीतिक माफियाओं से मिलकर की जा रही खजाने की लूट को राजनैतिक मुद्दा बना रहे हैं।

उन्होंने सभी से अपील की है कि इस अभियान को हर स्तर पर समर्थन करें।

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