सांप्रदायिक हिंसा के मुख्यअभियुक्त योगी के मुख्यमंत्री बनते ही सहअभियुक्तों के हौसले बुलंद- रिहाई मंच

गोरखपुर सांप्रदायिक हिंसा मुख्य अभियुक्त योगी के सहअभियुक्त वाईडी सिंह वादी परवेज परवाज पर झूठा मुकदमा दर्ज कराने की फिराक में - रिहाई मंच...

लखनऊ 18 अप्रैल 2017। रिहाई मंच ने आरोप लगाया है कि योगी आदित्यानाथ के मुख्यमंत्री बनते ही उनके पर चल रहे आपराधिक मामलों में पैरवी करने वालों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश शुरू हो गई है।

रिहाई मंच द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में मंच महासचिव राजीव यादव ने आरोप लगाया है कि 2007 के गोरखपुर सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमें में योगी के साथ सहअभियुक्त और पूर्व विधान परिषद सदस्य वाईडी सिंह ने मुकदमें के वादी वरिष्ठ पत्रकार व सद्भावना मंच के संयोजक परवेज परवाज पर दबाव बनाने के लिए गोरखुपर सीजेएम के सामने याचिका दायर कर परवेज परवाज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। योगी आदित्यनाथ के साथ सांप्रदायिक हिंसा के सहआरोपी वाईडी सिंह ने याचिका में आरोप लगाया है कि परवेज परवाज ने 2007 दंगे की योगी के भाषण की जो सीडी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है वह फर्जी है।

अपनी इस याचिका में उन्होंने परवेज परवाज पर यह भी आरोप लगाया है कि वे एक साम्प्रदायिक व्यक्ति हैं जिन्होंने सद्दाम हुसैन की फांसी का विरोध किया था।

इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि परवेज परवाज ने दंगा किया है और कई दुकानों में लूट-पाट की है, लेकिन उन्होंने अपनी याचिका में एक भी ऐसी दुकान या दुकान मालिक का नाम नहीं बताया है, जिसमें उनके मुताबिक परवेज परवाज ने लूटपाट की है।

यहां गौरतलब है कि 2015 में वाईडी सिंह की तरफ से परवेज परवाज के खिलाफ ऐसी ही एक याचिका गोरखपुर सीजेएम के सामने लगाई गई थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। अब इस नए याचिका में उन्होंने इसका भी जिक्र किया है कि इससे पहले 2015 में उनकी यही याचिका खारिज हो चुकी थी और अब वो फिर से याचिका लगा रहे हैं।

रिहाई मंच महासचिव ने कहा है कि ऐसी याचिकाओं के जरिए योगी आदित्यनाथ के ऊपर दर्ज मुकदमों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। 2007 गोरखपुर सांप्रदायिक हिंसा को लेकर परवेज परवाज और सामाजिक कार्यकर्ता असद हयात एडवोकेट के द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष एक रिट याचिका दायर की गई थी। वाईडी सिंह योगी आदित्यनाथ के साथ उसी मुकदमें में अभियुक्त हैं जिसकी सीबीसीआईडी जांच में हीला-हवाली पर 29 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन हफ्ते में सरकार से इस सवाल पर अपना जवाब रखने का निर्देश दिया था कि सरकार ने अब तक इस मामले में जांच की अनुमति क्यों नहीं दी।

राजीव यादव ने कहा कि योगी के साथ दंगे के सहअभियुक्त वाईडी सिंह द्वारा अपनी याचिका मंे यह कहना कि इससे पहले उनकी याचिका खारिज हो चुकी है और अब वे इसे दुबारा लगा रहे हैं, साबित करता है कि मुख्यअभियुक्त योगी के मुख्यमंत्री बनने से सहअभियुक्त के हौसले बुलंद हो गए हैं और वे अदालत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

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