वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के अनुसार दिल्ली में गाजीपुर सर्वाधिक प्रदूषित

गाजीपुर इलाके में गंभीर वायु प्रदूषण, स्थानीय लोगों ने की स्वास्थ्य परामर्श की मांग...

वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के अनुसार दिल्ली में गाजीपुर सर्वाधिक प्रदूषित

 

 

दिल्ली, 5 फरवरी,2017। सेंटर फॉर इन्वारॉन्मेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) ने गाजीपुर, दिल्ली के निवासियों के साथ एक सामुहिक  जन संवाद आयोजित किया।

यह आयोजन गाजीपुर में कचरा फेंकने की जगह के आसपास के निवासियों की समस्याओं को उजागर करने के लिए मौन विरोध के रूप में हुआ। ये समस्या खुले में कचरा जलाने से वायु गुणवता बिगडने की वजह से हो रहीहै।

स्थानीय निवासियों ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन से फौरन कार्रवाई करने का अनुरोध किया और ‘‘जहरीली हवा और कब तक’’ नारे को सामूहिक स्वीकृति प्रदान की।

गाजीपुर में कचराघर के पास खुले में कचरा जलाने के प्रभाव को इस बात से समझा जा सकता है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिल्ली के विभिन्न इलाकों में लगाए गए वायु गुणवत्ता निगरानी केन्द्रों में अधिकतम औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई ) आनंद विहार में दर्ज किया गया जो गाजीपुर के निकट है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र,दिल्ली की सरकार से वायु गुणवत्ता के बारे में नगर के प्रत्येक वार्ड में लोगों को दैनिक स्तर पर सूचित करने का अनुरोध करते हुए सीड ने ‘’हेल्प दिल्ली ब्रेथ’’ अभियान के अंतर्गत सैकड़ों स्कूली बच्चों के सहयोग से एक लाख से अधिक हस्ताक्षर एकत्र किए हैं।  दिल्ली के माननीय स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने अगस्त 2016 में विभिन्न स्कूलों के युवा स्वयंसेवकों एवं सीड प्रतिनिधियों के साथ बैठक में उपरोक्त मांग पर कार्रवाई करने का  आश्वासन दिया था। हालांकि जाड़े का मौसम करीब करीब समाप्त होने पर है और महानगर को नवंबर और दिसंबर में कुछ बेहद प्रदूषित दिनों को झेलना पडा है, परन्तु स्वास्थ्य परामर्श के बारे में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।

सीड की प्रोग्राम ऑफिसर डिंपी सुनेजा ने बताया,

‘‘कचरा जमा करने की जगहें आसपास रहने वाले लोगों  के लिए नुकसानदेह होती हैं। कचरे को नियमित तौर पर जलाने से आसपास की हवा में जहरीली गैस और पीएम2.5 उल्लेखनीय रूप से मिलती है, जिससे हवा आसपास के निवासियों के स्वास्थ्य के लिए अतिशय हानिकारक हो जाती है।’’

सुश्री सुनेजा ने जोड़ा कि

‘‘प्रदूषण को नियंत्रित करने और जहरीली हवा के प्रभाव से निपटने के लिए यद्यपि अनेक कार्रवाइयों की जरूरत है, इस दिशा में पहला कदम लोगों को स्वास्थ्यगत जोखिम के निरोधक उपायों के बारे में बताना है। स्वास्थ्यगत परामर्श जारी किया जाना न केवल गाजीपुर, बल्कि समूचे महानगर के लिए जरूरी है। ’’

इस आयोजन में उपस्थित गाजीपुर के निवासी मो. कासिम ने कहा,

‘‘धुआं, धुल और प्रदूषण के बीचो-बीच में रहना हमारे लिए सामान्य बात हो गई है, लेकिन मैं अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भयभीत हूं। इस इलाके के बच्चे अक्सर बीमार होते है। हमारे पास उचित इलाज कराने के साधन और उपाय नही हैं, हमारी समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता। स्वच्छ हवा पाना हमारा बुनियादी अधिकार है और हम उससे भी वंचित कर दिए गए है। यह सही समय है कि सरकार को हमे बचाने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए।”

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