स्टेट बैंक ने माना, नोटबंदी के कारण गिरी जीडीपी दर

SBI की मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्या कांति घोष ने कहा, "हमारा मानना है कि नोटबंदी के कारण विकास दर पर अल्पकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।"...

एजेंसी

 

नोटबंदी के कारण जीडीपी दर 6 फीसदी से नीचे : रपट

मुंबई, 22 फरवरी। देश के सार्वजनिक क्षेत्र के अग्रणी बैंक ने स्वीकार किया है कि नोटबंदी के कारण चालू वित्त वर्ष (2016-17) की तीसरी तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास छह फीसदी से कम होने का अनुमान है, हालांकि अर्थव्यवस्था में नकदी की वापसी तेजी से हो रही है।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रपट में आज यह जानकारी दी गई है।

एसबीआई की इकोरैप रपट में कहा गया है,

"हमने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी के छह फीसदी से कम 5.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। चौथी तिमाही में ही यह पटरी पर लौट पाएगी और 6.4 फीसदी रहेगी। हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 17 में कुल मिलाकर जीडीपी की रफ्तार 6.6 फीसदी रहेगी।"

एसबीआई की मुख्य आर्थिक सलाहकार (आर्थिक अनुसंधान विभाग) सौम्या कांति घोष ने कहा,

"हमारा मानना है कि नोटबंदी के कारण विकास दर पर अल्पकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि दीर्घकालिक अवधि में विकास दर बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी।"

तीसरी तिमाही के अनुमान में नोटबंदी के दो महीने भी शामिल हैं, जिससे पता चलता है कि नवंबर और दिसंबर के महीनों में अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने कहा कि अच्छी खबर यह है कि वित्त वर्ष 2017-18 में पुनर्मुद्रीकरण के बाद अगर मांग वापस जोर पकड़ती है तो विकास दर तेज होगी।

घोष ने कहा कि अब स्थिति लगभग सामान्य है और फरवरी अंत तक करीब 70 फीसदी नकदी का पुर्नमुद्रीकरण कर दिया गया है।

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने वित्त वर्ष 2016-17 में जीडीपी विकास दर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 में यह 7.9 फीसदी थी।

घोष ने कहा,

"अगर हम सीएसओ के वर्तमान अनुमान के हिसाब से चलें तो तीसरी और चौथी तिमाही में जीडीपी की दर क्रमश: 6.1 प्रतिशत और 7.8 प्रतिशत होगी, जो असंभव है। क्योंकि तरलता में कमी के झटके से उपभोक्ता खर्च में तेज गिरावट आई है।"

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।
क्या मौजूदा किसान आंदोलन राजनीति से प्रेरित है ?