सीरिया पर हमले के बाद रूस और अमरीका आमने-सामने, अमरीका पर आईएस की मदद का आरोप

रूस के प्रधान मंत्री मेदवेदेव का कहना है कि अमरीका दुनिया के सबसे ख़तरनाक आतंकवादियों के ख़िलाफ़ लड़ने वालों का साथ देने के बजाए, उन्हीं पर हमला कर रहा है।...

नई दिल्ली, 09 अप्रैल। रूस और सीरियाई सरकार के बीच दोस्ती के बढ़ते हाथ..लोगों को मौत के कुएं में धकेल रहे हैं। आरोप है कि रूस की सीरिया में बढ़ती दखलअंदाजी लगातार बेगुनाहों की मौत की वजह बन रही है। बीती 6 से 7 अप्रैल की रात को अमरीकी विध्वंसक युद्धपोतों रॉस और पोर्टर ने होम्स के एक उपनगर में बने हुए सीरियाई वायुसैनिक अड्डे ’शैरत’ पर 59 टोमाहॉक क्रूज मिसाइलों से हमला किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमरीकी रक्षा मन्त्रालय पेण्टागन ने अपने इस हमले की सफ़ाई देते हुए कहा कि बशार असद की सेना द्वारा इद्लिब प्रान्त के निवासियों पर जो रासायनिक हमला किया गया था, यह हमला उसकी ’आनुपातिक प्रतिक्रिया’ है यानी यह हमला भी उसके बराबर का ही हमला है।

उधर रायासनिक हमले के बाद मातम मनाते लोगों की चीखें अभी शांत भी नहीं हुई थी कि रूस ने एक बार फिर सरकार की शह पर इदलिब में हवाई हमला किया। इस हमले में 18 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्लेन के जरिए की गई हमले का तरीका, जगह, विमानों के उड़ने का तरीका और हथियारों को देखते हुए यही माना जा रहा है कि इस हमले के पीछे रूस की ही साजिश है और इसके लिए सीरियाई सरकार ने उनको पूरा समर्थन भी दिया।

बता दें कि सीरिया का इदलिब शहर पूरी तरह से विद्रोही गठबंधन के नियंत्रण में है..जिसकी मुखालिफत हमेशा ही सीरियाई सरकार करती आ रही है...इससे पहले भी इदलिब में रासायनिक हमला किए जाने का आरोप था, जिसमें करीब 100 लोगों की मौत हुई थी और 400 लोग घायल हुए थे।

दूसरी तरफ रूस के प्रधान मंत्री दिमित्री मेदवेदेव ने ट्रम्प सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि सीरिया पर अमरीकी मिसाइल हमले के कारण, रूस और अमरीका के बीच सीधा टकराव संभव है।

मेदवेदेव का कहना था कि अमरीका दुनिया के सबसे ख़तरनाक आतंकवादियों के ख़िलाफ़ लड़ने वालों का साथ देने के बजाए, उन्हीं पर हमला कर रहा है।

रूस के प्रधान मंत्री ने उल्लेख किया कि ट्रम्प प्रशासन ने राष्ट्र संघ की अनुमति के बिना सीरिया के ख़िलाफ़ सैन्य कार्यवाही करके अंतरराष्ट्रीय क़ानून का घोर उल्लंघन किया है।

इससे पहले रूसी राष्ट्रपति ने सीरिया पर अमरीकी मिसाइल हमले की निंदा करते हुए वाशिंग्टन को चेतावनी दी थी।

रुसी मीडिया के अनुसार रूस के राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पिसकोफ़ ने कहा — रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन का मानना है कि अमरीकी हमला एक सार्वभौम देश के ऊपर किया गया ऐसा हमला है, जो नकली बहानों से अन्तरराष्ट्रीय कानूनों को भंग करता है।

उन्होंने ज़ोर दिया कि सीरियाई सेना के पास रासायनिक बम नहीं हैं। 2016 में ही सँयुक्त राष्ट्र संघ के रासायनिक हथियार निषेध संगठन (राहनिस) के नियन्त्रण में सीरिया के पास उपस्थित सभी रासायनिक हथियारों को नष्ट किया जा चुका है।

दिमित्री पिस्कोफ़ ने बताया — पूतिन का मानना है कि इस बात की पूरी उपेक्षा से कि यह रासायनिक हमला आतंकवादियों ने किया होगा, सीरिया में स्थिति बिगड़ रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि रूस अब अमरीका की इस कार्रवाई पर विचार करने के लिए सँयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तुरन्त बैठक बुलाने की मांग करेगा, लेकिन अमरीका के ख़िलाफ़ कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा।

अब आगे क्या होगा

रूसी विश्लेषकों का मानना है कि अमरीकी नौसेना का यह हमला एक ही बार की जाने वाली कार्रवाई है। कुछ साल पहले अमरीका के वर्तमान राष्ट्रपति ट्रम्प ने सीरिया के ख़िलाफ़ अमरीका की हमलावर नीतियों की कड़ी आलोचना की थी और यह कहा था कि इसके अमरीकी सरकार के लिए गम्भीर परिणाम होंगे।

रूसी विश्लेषकों का कहना है कि रूस सीरिया में अमरीकी हमले के जवाब में आतंकवादी गिरोह ’इस्लामी राज्य’ (आईएस) के ख़िलाफ़ की जा रही कार्रवाइयों में अमरीका के साथ सहयोग करना बन्द कर सकता है।


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