ट्रम्प विश्व शांति के लिए खतरा - भीमसिंह

ट्रम्प विश्व शांति के लिए खतरा - भीमसिंह

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता, लंदन विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त एवं राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन व फिलस्तीनी प्रेजिडेंट यासिर अराफात के महान दोस्त ने आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों, अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन, फ्रांस, रशियन फेडरेशन एवं चीन गणराज्य से संयुक्त राज्य अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा व्हाइट हाउस से दिये जाने वाले हिटलर जैसे नारों से हुई विस्फोटक स्थिति पर ध्यान देने की अपील की। 

प्रो. भीमसिंह ने अपनी अपील में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को अपनी युद्ध शब्दावली का बड़ी देखभाल और सावधानी के साथ प्रयोग करने के लिए समझाने का आग्रह किया।

प्रो. भीमसिंह ने फिलस्तीन के विभाजन पर एक पुस्तक भी लिखी है, जो राष्ट्रसंघ द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका और इंग्लैंड में यहूदी समुदाय को खुश करने के लिए की गयी एक ऐतिहासिक भयंकर भूल है, इस प्रकार 1948 में फिलस्तीन का विभाजन कर इजरायल को एक यहूदी राज्य बनाया गया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव सं. 181 का सभी स्थायी सदस्यों ने समर्थन किया था। यह केवल भारत और ईरान (शाह शासन के अन्तर्गत) थे जिन्होंने फिलस्तीन के विभाजन का विरोध किया था। विश्वभर के बुद्धिजीवियों, विचारकों और शांति-प्रेमियों ने भारत के इस कदम की सराहना की थी। 1947 में भारत में राजनीति अस्तित्व का यह एक बड़ा परीक्षण था।

सुरक्षा परिषद ने कई प्रस्तावों को पारित किया, जिसमें 242 व 338 और अन्य अनेक प्रस्तावों में इजरायल को निर्देश दिया गया था कि फिलस्तीन की कब्ज़ायी गयी जमीन को खानी करे, जिस पर इजरायल ने 1948 और 1967 में कब्जा किया था। इजरायल राष्ट्रसंघ के अधीन है और उसे संयुक्त राष्ट्र महासभा का सदस्य फिलस्तीन राज्य के समर्थन के लिए सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। यह संदेश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पहुंचना चाहिए, जिन्हें व्हाइट हाऊस में उनके नए सलाहकारों और सहायकों ने शायद सही ढंग से बताया नहीं है। 

प्रो. भीमसिंह ने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से राजनीतिक विचारकों, इतिहासकारों को इस स्थिति अर्थात फिलस्तीन और इजरायल को सलाह एवं सूचना लेने की अपील की है। फिलिस्तीन राज्य संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त है। 1948 तक इजरायल फिलस्तीन के एक हिस्सा था। प्रो. भीमसिंह ने कहा है कि वे 1967 के बाद कई बार फिलिस्तीन और इजराइल में सभी क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं और कहा कि वह आश्वस्त हैं कि यहूंदी समुदाय फिलस्तीनी मुस्लिमों के खिलाफ नहीं है। फिलस्तीन और इजराइल की गरिमा और पूर्ण सुरक्षा के लिए सहअस्तित्व अनिवार्य है।

प्रो. भीमसिंह ने कहा कि वे इजरायल के प्रधानमंत्री नेतनयाहू को भी व्यक्तिरूप जानते हैं, जिनका उन्होंने दूरदर्शन के लिए यरूशलम में 1992-93 में इंटरव्यू लिया था। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नेतनयाहू भी आज विश्व की वर्तमान स्थिति को समझने की कोशिश और साहसपूर्वक फिलिस्तीन के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के सभी प्रस्तावों को सम्मान के साथ स्वीकार करेंगे, मध्य-पूर्व में शांति तभी संभव है जब इजरायली नेतृत्व शांति और फिलिस्तीन के लोगों को मानव गौरव साथ जीने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा।

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