... तो वसुंधरा का मुख्यमंत्री पद से हटना टल जाएगा?

वसुंधरा का जादू कायम है.... नरेन्द्र मोदी के लिए अब वसुंधरा को हटाना आसान नहीं होगा...

... तो वसुंधरा का मुख्यमंत्री पद से हटना टल जाएगा?

तेजवानी गिरधर

जयपुर। राजनीति में प्रति पल बदलते समीकरणों के बीच धौलपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को शानदार जीत दिलवाने के बाद क्या श्रीमती वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री पद से हटने की अफवाहों पर विराम लगेगा? यह सवाल बदले-बदले हालात के कारण राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषया बना हुआ है।

असल में इस चुनाव से पूर्व पिछले दिनों मीडिया में यह खबर आम हो गई थी कि श्रीमती वसुंधरा को मुख्यमंत्री पद से हटा कर केन्द्र में विदेश मंत्री बनाया जाएगा। उनके स्थान पर वरिष्ठ भाजपा नेता ओम माथुर को मुख्यमंत्री सौंपे जाने की चर्चा थी। हालांकि इसकी पुष्टि न होनी थी और न ही हुई, मगर जिस प्रकार मीडिया में बार-बार यह खबर उछल रही थी, यह आम धारणा सी बन गई थी कि जल्द ही वसुंधरा को मुख्यमंत्री पद से हटाया जा रहा है।

हाल ही में ओम माथुर के राजस्थान प्रवास के दौरान जिस प्रकार उनके समर्थकों ने उनका स्वागत किया, उससे भी इस धारणा को बल मिला। माथुर ने भी खंडन नहीं किया और यही कहा कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, वे उसका बखूबी निर्वहन करेंगे।

अब जबकि वसुंधरा ने धौलपुर में पार्टी को शानदार जीत दिलवाई दी है तो यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या अब भी उनकी सीट को खतरा है?

यहां यह कहने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती कि उन्होंने इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिया था। अपनी पूरी ताकत इसमें झौंक दी थी। हालांकि विधानसभा में उनके पास जितना बंपर बहुमत हासिल है, इस चुनाव में जीत कर एक सीट और हासिल करना उनके लिए कत्तई जरूरी नहीं था, फिर भी उन्होंने जीतने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। वे चाहती थीं कि इस जीत से यह साबित हो जाए कि उनका दबदबा अब भी कायम है, लोग भले ही चर्चा कर रहे हों कि भाजपा की लोकप्रियता का ग्राफ गिरा है।

वसुंधरा समर्थक भाजपाइयों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए अब वसुंधरा को हटाना आसान नहीं होगा। उनकी बात में दम भी है, कि जब तीन साल बाद भी वसुंधरा का जादू कायम है तो उन्हें हटाने का क्या औचित्य है। जहां तक स्वयं वसुंधरा का सवाल है तो वे कभी नहीं चाहेंगी कि उन्हें राजस्थान से जाना पड़े। इसके लिए वे एड़ी चोटी का जोर लगा देंगी। बहुत अधिक दबाव आने पर ही समझिये कि वे केन्द्र में जाने को तैयार होंगी।

दूसरी ओर वसुंधरा के हटने का इंतजार कर रहे भाजपाई मानते हैं कि मात्र एक सीट पर जीतने का तो कोई मसला ही नहीं है। असल मोदी की दूरगामी योजना है और वे आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वसुंधरा को हटाना चाहते हैं। जैसी कि चर्चा है कि अगले चुनाव में जनता भाजपा को पलटी खिला देगी, वे इस संभावना को पूरी तरह से समाप्त कर देना चाहते हैं। उनकी मंशा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में केवल उनके नाम पर ही लड़ा जाए, जिससे जीतने के बाद अपनी पसंद से मुख्यमंत्री बना सकें।

बहरहाल, बहुत जल्द ही साफ हो जाएगा कि क्या राजस्थान में सत्ता का हस्तांतरण वसुंधरा से माथुर या और किसी और को होगा। इसकी वजह ये है कि इस प्रकार के परिवर्तन के लिए यही उपयुक्त समय है। पार्टी में ऊर्जा भरने व नई जाजम बिछाने के लिए कम से कम एक-डेढ़ साल तो चाहिए ही। यदि अभी परिवर्तन नहीं हुआ तो बाद में होना मुश्किल हो जाएगा। देखते हैं क्या होता है?

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।
क्या महिलाओं को शांति से जीने का अधिकार नहीं