विश्व शांति एवं मानवाधिकार के लिए एफ्रो-एशियन मानव सम्मान व एकता अनिवार्य : भीमसिंह

एफ्रो-एशियन मित्रता की नींव महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग और अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला ने डाली थी। प्रो. भीमसिंह ने मोटरसाइकिल पर विश्वशांति मिशन के तहत 1971 में अफ्रीकी क्षेत्रों का दौरा किया था।...

नई दिल्ली, 06 अप्रैल। एफ्रो-एशियन मित्रता, विश्व शांति व मानव गरिमा के लिए सभी को एकजुट होकर उन्नति की ओर बढ़ना आवश्यक है। एफ्रो-एशियन मित्रता की नींव महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग और अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला ने डाली थी। प्रो. भीमसिंह ने मोटरसाइकिल पर विश्वशांति मिशन के तहत 1971 में लगभग सभी अफ्रीकी क्षेत्रों का दौरा किया था। उन्होंने अपने विश्व शांति मिशन के तहत अफ्रीका महाद्वीप के जब्राल्टर से मोरक्को में प्रवेश किया और वे मोटरसाइकिल से स्पेनिश सहारा रेगिस्तान (2100 किमी.) को 20 दिन में पार करने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति हैं। दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर उन्होंने सभी अफ्रीका क्षेत्रों का दौरा किया, जिससे उनको अनुभव हुआ कि ब्लेक सुन्दर ही नहीं बल्कि प्यार के लायक होते हैं। इस बात का उल्लेख उन्होंने अपनी पुस्तक ‘मोटरसाइकिल पर विश्वशांति यात्रा‘ में भी किया है। उन्होंने अपनी अफ्रीका यात्रा के दौरान महसूस किया कि यहां कि छोटे-बड़े धनी व गरीब लोगों में प्यार, सुन्दरता और सहानुभूति है। 

महात्मा गांधी ने बीस के दशक में पश्चिमी देशों द्वारा जातिवाद के खिलाफ ‘सत्याग्रह‘ आंदोलन की शुरूआत की थी।

1967 से 1973 तक मोटरसाइकिल पर पूरी दुनिया का दौरा करने वाले प्रो. भीमसिंह ने अफ्रीका से भारत में शिक्षा प्राप्त करने आए अफ्रीकी लोगों के साथ सहानुभूति व्यक्त की और भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी से अन्तर्राष्ट्रीय शांति के लिए एफ्रो-एशियन मित्रता का संदेश देने का पुरजोर अनुरोध किया।

प्रो. भीमसिंह ने प्रधानमंत्री से भारत में पिछले सप्ताह से अफ्रीकी लोगों पर हो रही दुखद घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाने की मांग की।

प्रो. भीमसिंह ने घोषणा कि एफ्रो-एशियन मैत्री समिति सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों की एक बैठक का आयोजन करेगी, जिससे सौहर्दपूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने भारत के युवाओं, छात्रों और सभी समुदायों से पुरजोर अपील की है कि अफ्रीका के हर व्यक्ति को उसी नजर से देखें और समझें जिस नजर से और जिस दिल से महात्मा गांधी ने अपने दक्षिण अफ्रीका आंदोलन के दौरान महसूस किया था।

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