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लेन विस्‍टगार्ड (Lene Westgaard-Halle)- नॉर्वे की सत्‍तारूढ़ नॉर्वेजियन कंजरवेटिव पार्टी की प्रवक्‍ता और एनर्जी एण्‍ड एनवॉयरमेंट पॉलीटीशियन हैं।

कोयला छोड़ अक्षय ऊर्जा की तरफ जाने की मुहिम का झंडाबरदार बना नॉर्वे

नॉर्वे (Norway) ने बिजली पैदा करने के लिये कोयले के बजाय सौर तथा वायु जैसे अक्षय ऊर्जा विकल्‍पों (Renewable energy options) पर अरबों डॉलर खर्च करने की पेशकश की है। यह साफ ऊर्जा (Clean energy) की तरफ दुनियावी स्‍तर पर कदम बढ़ाये जाने को लेकर एक नयी उम्‍मीद जगाती है। हो सकता है कि इस कदम से आने वाले वक्‍त में दुनिया का अक्षय ऊर्जा बाजार कुलांचे भरता हुआ नयी बुलंदियों को छू ले।

नॉर्वे के इस प्रस्‍ताव के अगले जून में कानून की शक्‍ल ले लेने की उम्‍मीद है। सत्‍तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी (Ruling conservative party) इसकी हिमायत करने वाली नीति को पिछले साल ही मंजूरी दे चुकी है। इसका नतीजा यह होगा कि नॉर्वेजी ऑयल फंड अपने वैश्विक ट्रिलियन डॉलर पोर्टफोलियो के 2 प्रतिशत के बराबर हिस्‍से को सौर, वायु और अक्षय ऊर्जा की अन्‍य परियोजनाओं में निवेश करेगा। यह रकम 20 अरब डॉलर से ज्‍यादा होगी।

एक नजरिये से देखें तो ऑयल फंड (Oil funds) को लेकर होने जा रहा यह बदलाव एक चतुराई भरा वित्‍तीय फैसला है। साथ ही यह जलवायु परिवर्तन (Climate change) से निपटने के लिये जरूरी भी है। ऐसे लोग जो इस बदलाव को लेकर खौफज़दा हैं, उन्‍हें इसे एक मौके के तौर पर लेते हुए बैठकर देखना चाहिये कि चीजों के साथ-साथ धन का भी रुख किस तरफ जा रहा है।

इस फैसले को वित्‍तीय लिहाज से ठोस साबित करने की अनेक वजहें मौजूद हैं।

मल्‍टी-ट्रिलियन डॉलर अक्षय ऊर्जा मूलभूत ढांचे का मजबूत बाजार( thriving multi-trillion dollar renewables infrastructure market) पहले से ही मौजूद है और यह लगातार बढ़ भी रहा है। साफ ऊर्जा की कीमतों में हो रही नाटकीय गिरावट, इससे जुड़ी प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रही तरक्‍की और लगातार निवेश, यह पक्‍के तौर पर जाहिर करता है कि वायु और सौर ऊर्जा के जरिये नॉर्वे के लोगों को वैसे ही निरन्‍तर और ज्‍यादा मुनाफे वाले नतीजे हासिल होंगे, जैसे कि उन्‍हें अन्‍य फंड (many other funds )से मिलते हैं।

इसके उलट,  कोयला बिजली उत्‍पादन का क्षेत्र डूब रहा है- एक जहरीले निवेश में नये अंकुर फूट रहे हैं। इसलिये नहीं कि इसका कोई भविष्‍य है, बल्कि सिर्फ इसलिये कि जिन लोगों ने इस क्षेत्र में भारी निवेश किया है वे इससे निकलने से पहले आखिरी डॉलर तक को जैसे-तैसे निभा लेना चाहते हैं।

वे इस क्षेत्र से निकल भी रहे हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में काम कर रहे थिंक टैंक आईईईएफए के अनुसार 100 से ज्‍यादा वित्‍तीय संस्‍थानों ने कोयले से बनने वाली बिजली क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं के लिये कर्ज देने पर पाबंदी लगा दी है। कोल पॉवर परियोजनाओं को रदद् करने के मामले में अमेरिका सबसे आगे है। यहां तक कि जापान ने भी कोयले से चलने वाली बिजली परियोजनाओं को बढ़ावा देने के अपने नये रुख से कदम पीछे खींच लिये हैं।

जापान ने नये कोल प्‍लांट बनाने और मौजूदा संयंत्रों को बेहतर बनाने का काम रोक दिया है। इसके लिये जापान के पर्यावरण मंत्री योशियाकी हरदा को उनकी नयी नीति के लिये शुक्रिया अदा किया जाना चाहिये। कभी दुनिया में भविष्‍य का प्रमुख कोल पॉवर बाजार माने जा रहे दक्षिण कोरिया ने भी कोयले से चलने वाली नयी बिजली परियोजनाओं को अनुमति देना बंद कर दिया है।

ब्‍लूमबर्ग और कई दूसरी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नॉर्वेजी सरकार की नई प्रस्तावित कसौटी से आरडब्ल्यूई, ग्लेनकोर, बीएचपी बिलिटन, एंग्लो अमेरिका, साउथ 32, सुमितोमो और यूनिपर समेत जानी-मानी कम्‍पनियों से करीब 4.2 अरब डॉलर निकल जाएंगे। नॉर्वे सरकार द्वारा कोल पॉवर संयंत्रों को हतोत्‍साहित करने के लिये 2015 में लागू की गयी नीति को और सख्‍त किया जा रहा है, ताकि उन बची हुई बड़ी कम्‍पनियों को बाहर किया जा सके जो कोयले से अक्षय ऊर्जा की तरफ आने में बहुत सुस्‍ती दिखा रही हैं।

और यह बात सिर्फ कोयले पर ही लागू नहीं होती।

बीएनपी परिबास एसेट मैनेजमेंट (450 अरब डॉलर एयूएम) के मार्क लुईस ने आगाह किया है कि अक्षय ऊर्जा का क्षेत्र तेल और गैस उद्योग के मुनाफे को जरूर प्रभावित करेगा।

जनसम्‍पर्क और गोलबंदी से यह मामला टाला नहीं जा सकेगा। वहीं कार्बन को ‘पकड़ने और उसे एक जगह रखने’ के वादे बेहद चुनौती भरे साबित हुए हैं। बिजली क्षेत्र से जुड़े कारोबारों को वित्‍तीय बर्बादी से बचाने के लिये बस एक ही रास्‍ता बचा है, वह है जीवाश्‍म ईंधन से निकलकर सही मायनों में अक्षय ऊर्जा की तरफ बढ़ जाना।

नॉर्वेजी ऑयल फंड ने अपने कुछ विदेशी निवेश को शेल तथा एक्‍सॉन जैसी तेल तथा गैस की बड़ी कम्‍पनियों में बनाये रखने का फैसला किया है। खासतौर से नॉर्वे द्वारा अपने मालिकाना हक वाली प्रमुख तेल कम्‍पनी एक्विनॉर के जरिये इन गिरते हुए बाजारों को दोहरा भाव दिये जाने की वजह से ये सम्‍पत्तियां पर्यावरणीय और वित्‍तीय दोनों ही लिहाज से हमारे लिये मुसीबत बनती जा रही हैं।

नोर्जेस बैंक ने चेतावनी की घंटी पहले ही बजा दी है। उसने आगाह किया है कि अगर ऑयल फंड दूसरे देशों में तेल और गैस की हिस्‍सेदारी नहीं खरीदता है तो इससे उसके 40 अरब डॉलर बचे रहेंगे। ऐसा लगता है कि खरीद के इस चलन के खत्‍म होने में बस कुछ ही वक्‍त बचा है।

एक कभी न बदलने वाली सच्‍चाई यह है कि जलवायु परिवर्तन हमारी वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था को आकार दे रहा है और अक्षय ऊर्जा विकल्‍पों में ही हमारा वित्‍तीय भविष्‍य बसा है। नॉर्वे ने इस तरफ बढ़ते हुए आगे निकलने की कोशिश शुरू की है। वह जितनी तेजी से आगे बढ़ेगा, उसे उसका उतना ही ज्‍यादा फायदा मिलेगा। बिजली उत्‍पादन के परम्‍परागत तरीकों और संयंत्रों पर अटके रहने के बजाय हमारे देश को अपनी दौलत का इस्‍तेमाल ऐसी चीजों में करना चाहिये जो हमारे भविष्‍य को आकार दे सकें। एक ऐसा भविष्‍य जो वित्‍तीय और सामाजिक लिहाज से लगातार खुशहाली लाये।

यह एक ऐसा कदम है जो दुनिया के ऊर्जा बाजार को हमेशा के लिये बदल देगा। ऐसे निवेशक और सरकारें जो ऊंची पूंजीगत आमदनी और अपने भविष्‍य को तरजीह देती हैं, वे नॉर्वे के नक्‍शेकदम पर चलने में ही समझदारी मानेंगी।

लेखिका लेन विस्‍टगार्ड (Lene Westgaard-Halle)- नॉर्वे की सत्‍तारूढ़ नॉर्वेजियन कंजरवेटिव पार्टी की प्रवक्‍ता और  एनर्जी एण्‍ड एनवॉयरमेंट पॉलीटीशियन हैं।

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