Environment and climate change

अमन चैन के मुल्क में खून की नदियां क्या बुझा पायेंगी सूखे की चपेट में तैंतीस करोड़ इंसानों की प्यास?

विश्व पर्यावरण दिवस (#HappyWorldEnvironmentDay) के खास मौके में हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र (Industrial areas of Himachal Pradesh) की दशा पर एक नजर

हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के बद्दी बरोटीवाला नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 3000 छोटी- बड़ी फैक्ट्रियां हैं जिसमें टैक्सटाइल, फार्मा, फूड-प्रोसेसिंग, कास्मेटिक आदि मुख्य हैं। इस औद्योगिक क्षेत्र में सतुलज नदी की सहायक नदी सरसा व 4-5 छोटे नाले बहते हैं।

भारत की ज्यादातर आबादी पेयजल की पर्याप्त आपूर्ति के लिए तरस रही है। स्थिति यह है कि 10 राज्यों में 254 जिले सूखा प्रभावित हैं। करीब 33 करोड़ लोग सूखे की मार झेल रहे हैं।

इससे पहले 2002 में देश को इससे भी अधिक सूखे को झेलना पड़ा था। तब कुल 383 जिले सूखे की चपेट में आये थे।

हिमाचल में बिलासपुर की समाधि में कैद है सतलज तो मरी हुई गंधाती ब्यास अभी पंजाब के दोआब में मरती खपती बह रही है। उत्तराखंड में बाधित हैं पवित्रतम गंगाजल की अनंतधारा।

देवभूमि के दोनों हिस्से ऊर्जा प्रदेश हैं।

देश की नदियों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कब्जा!

विश्व वन्यजीव कोष के अनुसार विश्व की दस बड़ी नदियों पर सूखने का खतरा मंडरा रहा है। मौत की दहलीज पर खड़ी नदियां… पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, जीव-जंतु, मानव और जानवर सभी अपने अस्तित्व के संकट की चपेट में तड़प रहे हैं।

ऊर्जा की खपत इतनी प्रबल है कि तमाम जलधाराओं का गला घोंट रहे हैं हम और हालात ये हैं कि देश में तैंतीस करोड़ लोग सूखे की चपेट में हैं।

इस पर तुर्रा यह कि धर्म और जात पांत के नाम हिंसा बेलगाम है तो अंध राष्ट्रवाद मनुष्यता और सभ्यता के खिलाफ हैं और मौसम बदल रहा है। जलवायु बदल रहा है।

कोलकाता में काल बैशाखी का अता पता नहीं है। सुंदरवन के खिलाफ अतिक्रमण का सिलसिला तेज है और छह ऋतुओं के इस प्रदेश में वंसत लापता है और हवाएं लू में तब्दील हैं तो पानियों में प्राण नहीं।

तमाम तीर्थ स्थल हानीमून स्पाट हैं। कैलास मानसरोवर तक मुक्त बाजार की धमक है।

ब्रहमपुत्र के मुहाने ग्लेशियरों में परमाणु धमाके हैं।

भारत ही नहीं, यह संपूर्ण महादेश अभूतपूर्व जलसंकट के मुहाने हैं।

जलयुद्ध की तैयारियां जोरों पर है।

तेल नहीं, अब लड़ाई जल के लिए है।

मराठवाड़ा में जल स्तर तीन फीसद भी बाकी नहीं है।

भूगर्भीय जलस्रोत सूख रहे हैं और हमने हिमालय के ग्लेशियरों की हत्या कर दी है।

केदार जल प्रलय और नेपाल भूकंप के बाद बंगाल और बांग्लादेश के चार करोड़ लोगों के लिए महाभूकंप की चेतावनी बजरिये मौत का वारंट जारी है।

भूकंप के झटके बार-बार सिंह द्वार पर दस्तक दे रहे हैं और सिरहाने मौत घात लगाये बैठी है।

न जाने किस क्षण फिर सुनामी की बारी है।

देवादिदेव महेश्वर की जटाओं में फिर नहीं है कोई गंगा कैद अभी, उस गंगा को कैद हमने किया है।

स्वर्ग से निकली थीं जो जलधाराएं, उसे हमने कोला में बदल दिया है और उसमें तमाम रसायन जहरीला घोल दिया है।

पवित्र गंगाजल की शपथ हम मिथ्या लेते हैं।

तमाम वैदिकी होम यज्ञ क्रिया कर्म मिथ्या हैं क्योंकि हमने गंगा की हत्या कर दी है।

धर्म और धर्मोन्माद की अर्थव्यवस्था ने इस पृथ्वी के महाविनाश के लिए दसों दिशाओं में अश्वमेधी घोड़े दौड़ा दिये हैं और जमीन का हर टुकड़ा कुरुक्षेत्र है।

हर पल, पल-पल हम अपने ही स्वजनों का वध कर रहे हैं।

आजादी के पहले राष्ट्रनेताओं और कवियों का हर संबोधन अखंड भारत के तैतीस करोड़ नागरिकों को समर्पित था तो हिंदुओं के देव देवियों की संख्या भी थी वही तैतीस करोड़।

स्वामी विवेकानंद से लेकर रवींद्रनाथ नरनारायण को मान रहे थे ईश्वर तो संजोगवश हमारे पुरखों का सौंदर्यबोध और गणित के मुताबिक अखंड भारत के नागरिक तैंतीस करोड़ तो देव देवी भी फिर वहीं तैतीस करोड़।

इसका आशय यह कि जिस हिंदू धर्म के अनुयायी हैं इस देश के बहुसंख्य लोग, उस धर्म के मुताबिक तैतीस करोड़ का यह नागरिक समाज ही इस भारत तीर्थ का असली देवमंडल है चाहे आस्था और पहचान से वे हिंदू हों या न हों।

संजोगवश आज खंडित भारत में फिर वे ही तैंतीस करोड़ नागरिक सूखे की चपेट में हैं। देव देवी कहां हैं, किस हाल में हैं, हम नहीं जानते।

अमन चैन के मुल्क में खून की नदियां क्या बुझा पायेंगी सूखे की चपेट में तैंतीस करोड़ इंसानों की प्यास?

गर्मी का प्रकोप : 250 से ज्यादा ज़िले सूखे की चपेट में

ख़बरों के मुताबिक सूखे से प्रभावित राज्यों के लिए केन्द्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय में केन्द्र सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इन राज्यों में मनरेगा समेत कई विशेष प्रावधान किए गए हैं, तो जलाशयों में मौजूद पानी के प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

देश के 10 राज्यों में 250 से ज्यादा ज़िले सूखे की चपेट में हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाली तैंतीस करोड़ आबादी यानी देश की कुल आबादी का लगभग 25 फीसदी हिस्सा सूखे से प्रभावित है।

यह सूचना केंद्र ने विभिन्न राज्यों से मिली जानकारी के आधार पर दी है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया है कि मौजूदा वित्त वर्ष में मनरेगा के लिए आवंटित 38 हज़ार, 500 करोड़ रुपए के बजट में से 19 हज़ार, 555 करोड़ रुपए सूखा प्रभावित राज्यों को जारी किए जा चुके हैं। केंद्र ने सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों के कर्ज़ लौटाने की सीमा को भी बढ़ाने का निर्णय किया है।

सुप्रीम कोर्ट एक गैरसरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें सूखा प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को तेज़ी से सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

सूखे और बारिश की कमी के चलते देश भर में कई जलाशयों में पानी की कमी हो रही है। कई जगहों पर पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। केंद्रीय जल आयोग ने कहा कि जहां भी पानी कमी हो रही है, वहां बेहतर प्रबंध की जरुरत है।

मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में पूरे देश में तापमान बढ़ेगा और ज्यादातर इलाकों में तापमान 44 डिग्री के पार जा सकता है। बढ़ती गर्मी में मौसम विभाग ने लोगों को हीट स्ट्रोक से बचने की सलाह दी है।

सबिता बिश्वास

About Palash Biswas

पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए "जनसत्ता" कोलकाता से अवकाशप्राप्त। पलाश जी हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

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