इतिहास के डब्बे में बंद हुए जीतन राम मांझी

उड़ती खबर है जीतन राम मांझी ने विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव लाने से पहले ही इस्तीफा दे दिया
जीतन राम मांझी ने ‘भाजपा-आरएसएस’ से हाथ मिलाने की वही गलती दोहराने की कोशिश की जो गलती पिछले अट्ठारह सालों से श्री नितीश कुमार और शरद यादव करते चले आ रहे थे
उड़ती खबर है कि श्री जीतन राम मांझी ने विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव लाने से पहले ही इस्तीफा दे दिया है। मुझे श्री मांझी के प्रति पूरी हमदर्दी है। वह दलितों की मुखर आवाज बनकर अभी उभर ही रहे थे, कि उन्हें कुचल दिया गया। जदयू-राजद के अंदर सामंती, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले विधायकों के समूह को यह सब बर्दाश्त होना नागवार गुजरा था, क्योंकि जदयू-राजद के सामाजिक आधार उन्हें इसकी इजाजत नहीं देता। वे भली-भाँति समझते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में सिर्फ नीतीश-लालू जैसे भोले-शिव शंकर जी ही उनकी नैया पार लगा सकते हैं या फिर भागकर भाजपा का दामन थामना होगा?
जाहिर है श्री मांझी ने अंदरूनी लड़ाई में ‘हाशिये पर खड़े समाज का प्रमुख सामाजिक शत्रु ; ‘भाजपा-आरएसएस’ से हाथ मिलाने की वही गलती दोहराने की कोशिश की जो गलती पिछले अट्ठारह सालों से श्री नितीश कुमार और शरद यादव करते चले आ रहे थे। यह मांझी के आख़िरी राजनीतिक पड़ाव पर राजनीतिक भटकाव को दिखाता है।
श्री मांझी को यह समझना चाहिए कि बड़ी लड़ाई को सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर पर व्यापक जन-लामबंदी के बिना कभी भी अकेले नहीं जीता जा सकता…
अखिलेश चंद्र प्रभाकर
[author image=”https://scontent-atl.xx.fbcdn.net/hphotos-xfp1/v/t1.0-9/1780877_1387348728201577_1713384174_n.jpg?oh=09388ececc732add8898c9f0ad675dad&oe=55826F20″ ]अखिलेश चंद्र प्रभाकर, निदेशक- तीसरी दुनिया का सामाजिक नेटवर्क्स[/author]