किसानों की यह मुसीबत आसमानी है या सुल्तानी?

दिगंबर
चीनी मिलें गन्ना किसानों का हजारों करोड़ बकाया दबा के बैठी हैं। सरकार उनको निर्यात सब्सिडी दे रही है, ब्याज मुक्त क़र्ज़ दे रही है, आयात पर ड्यूटी बढ़ाकर 40 फीसदी कर रही है, लेकिन इन सब के बावजूद चीनी मिल मालिक किसानों का बकाया भुगतान नहीं कर रहे हैं।

उल्टे सरकार की इन मेहरबानियों से चीनी की कीमत बढ़ गयी। जनता के लिये कड़वी गोली और सरमायादारों के लिये उपहारों की ढेर…. ऊपर से किसानों को धमकी कि इतना चीनी गोदाम में है कि अगर दो साल गन्ना नहीं हुआ तो भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा….

किसानों के मसीहा चैन की नींद सो रहे हैं, किसान बेचैन हैं… बदहाल हैं….भीतर भीतर सुलग रहे हैं….

किसानों की यह मुसीबत आसमानी है या सुल्तानी?

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दिगंबर, लेखक जाने-माने वामपंथी विचारक हैं।

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