प्रधानमंत्री की घास छील खेती

लोकतंत्र में जनता जनार्दन जी को पटाने के लिए क्या-क्या नहीं होता। कोईएक नाम भी तो नहीं है इनका। आध्यात्मिक विचारवान के लिए यह जनता जनार्दन जी हैं तो भौतिकपन वालों के लिए आम आदमी। अदालत में जनहित याचिका हैं।

अखबार में बाबूजीनुमा कार्टून हैं।यह कभी गलत नहीं होते। यह और बात है कि यह गलतियों के भंडार हैं। इन्हें कभी कोई दोष नहीं देता। यह भी दोषियों को अपना समर्थन देते हैं। इनकी गरीबी के बल पर लोग अमीर हो जाते हैं।
अपनी गरीबी मिटाने के लिए यह तुरंत बिक भी जाते हैं।
सब कुछ इनके नाम पर होता है। इनके पास कुछ नहीं होता।यह जब आम होते हैं तो आम के आम और गुठली के दाम होते हैं। जब यह गुठली के दाम होते हैं तो सभ्य लोगों की जबान में कंज्यूमर कहलाते हैं। संस्कृत में अनुवाद हो कर उपभोक्ता हो जाते हैं। इनमें से काफी लोग भूखे रहते हैं, पर खूब खाने वाले इन्हें पेटू भी कहते हैं।कभी इन्हें ग्राहक माना जाता था। जब से गांधी जी ने कह दिया कि ग्राहक कभी गलत नहीं होता, तब से इन्हें कोई ग्राहक मानने के लिए तैयार नहीं है। सिर्फ सरकार इन्हें जगाने के लिए बहुत सारे नारों में से एक और नारा देती है, ‘जागो ग्राहक जागो!’ पर यह कुंभकर्ण की नींद में सोते रहते हैं। इनकी नींद तभी टूटती है जब कोई प्याज इनके आंसू निकालता है । प्याज का जीव धर्म ही आंसू निकालना होता है । यह कभी कभी भ्रष्टाचार भी हो जाते हैं । तब यह प्रधानमंत्री का आंसू निकालते हैं । प्रधानमंत्री के पास बहुत सारे घड़ियाल होते हैं । जिसे हम प्रधानमंत्री का आंसू समझते हैं , वह घड़ियाल का आंसू होता है । जैसे हमारे प्रधानमंत्री का घड़ियाली आंसू बहा कि वह संसद की लोकलेखा समिति में जा कर अपना आंसू पोंछ सकते हैं । पर दिक्कत यह है कि अभी तक किसी प्रधानमंत्री को लोकलेखा समिति में बुलाया ही नहीं गया है । हिसाब किताब की जांच करने वाली समिति है । प्रधानमंत्री को लगा कि वहां हाजिर हो कर अपना हिसाब किताब साफ कर लेंगे । प्रधानमंत्री को प्याज ने बहुत बड़िया
मौका दिया है । हवाई तरंगों की बेईमानी से बाहर निकलने का यही सही मौका है । अब किसान के दुख दर्द की बात करें । उन्हें तो कोई किसान मानता नहीं । पर क्या जाता है । असम से राज्य सभा सदस्य हो सकते हैं तो सियाचीन से किसान भी हो सकते हैं । वैसे भी 10 जनपथ में घास छीलने का बहुत काम किया है हमारे प्रधानमंत्री ने । दरअसल हमारे प्रधानमंत्री ने सिर्फ 10 जनपथ पर ही नहीं , विश्व बैंक में भी काफी बागवानी की है । वहीं की पेंशन खाते हैं । इंडिया के भी गुण गाते हैं । उनके राजपाट में लोग विदेश से बहुत आते हैं । ज्यादा सामान बेच कर , कम सामान खरीद कर चले जाते हैं ।हमारे ऐसे मनमोहक प्रधानमंत्री से लोग इस्तीफा मांगते हैं । आपने पद दिया कि आप इस्तीफा मांगते हो । जिसने दिया , वह तो प्रमाण पत्र देती है ।
हे इंडियावासी , पहला ढेला मुझ पर वह चलाए जिसने कभी कोई पाप नहीं किया हो – है कोई !

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