बिरला के अखबार का संपादक होने से बेहतर है रिपोर्टर बनना

हेमन्त तिवारी
आज भाई दीपक शर्मा (आज तक) ने लिखा है कि अम्बानी के खिलाफ देश के किसी अखबार की खबर लिखने की हिम्मत नहीं। सच ही कहा। केजरी के खुलासे के बाद की कवरेज से ये साबित भी हुआ।

कल देश के यशस्वी पत्रकार और पंडित नेहरु के अखबार नेशनल हेराल्ड के पहले संपादक K Ramarao की किताब The Pen As My Sword के विमोचन पर UP Press Club में वक्ताओं ने उनसे जुड़े संस्मरण सुनाए और बताया कि K Ramarao की एक जेब में सम्पादकीय और दूसरी में इस्तीफा रखा होता था। गाँधी जी के सेवाग्राम में जब K Ramarao लखनऊ के साथी इशरत अली से मिले थे तो हाल पूछने पर जवाब दिया था कि बिरला के अखबार का संपादक होने से बेहतर है रिपोर्टर बन कर कहीं काम करना। उन दिनों K Ramarao बिरला के अखबार की संपादकी को ठुकरा कर लाहौर के एक अखबार के लिए रिपोर्टिंग कर रहे थे। इस मौके पर राज्यपाल बी एल जोशी और समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव मौजूद थे।

गौरतलब यह भी है कि वहां लखनऊ के किसी प्रमुख अखबार के संपादक ने इस यशस्वी पत्रकार की जयंती पर अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं कराई।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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