ये चव्‍हाण वो चव्‍हाण

यह सियासत भी अजब शै  है, जिसने भी की दामन काला और दागदार हो ही जाता है। काजल की कोठरी है। दाग तो लगते ही हैं। कांग्रेस ने बड़े दावों और सोच-समझ के साथ महाराष्ट्र की गद्दी पर पृथ्वीराज चव्हाण की ताजपोशी ये सोचकर की थी कि अशोक चव्हाण की वजह से भ्रष्टाचार के जो दाग कांग्रेस के दामन पर लगे हैं, उन्हें पृथ्वीराज चव्हाण धो देंगे और उनसे किसी को परेशानी नहीं होगी क्योंकि उनका नाम ही पृथ्वीराज चव्हाण है। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने बहुत सीना ठोंक कर दावा किया था कि महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री बेदाग होगा। लेकिन यह सियासत है, यहां जिसकी ताजपोशी होती है उसके गड़े मुर्दे पहले उखड़ते हैं। अब आरोप पृथ्वीराज चव्हाण पर लग रहे हैं।  मामला 2003 का बताया जा रहा है और आरोप हैं कि पृथ्वीराज चव्हाण ने सस्ते फ्लैट लेने के लिए गलत दस्तावेज सौंपे थे।
अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट के तहत महाराष्ट्र  के मुख्यमंत्री ने 2003 में ये फ्लैट पृथ्वीराज चव्हाण को एलॉट किया था। एक निजी समाचार टीवी चैनल ने दावा किया है कि उसके पास जो कागजात हैं उसके अनुसार लगता है कि इस फ्लैट को पाने के लिए पृथ्वीराज ने कई तरह के झूठ बोले। चैनल के मुताबिक झूठ ये कि चव्हाण ने फ्लैट लेने के लिए खुद को आमदार यानि महाराष्ट्रका एमएलए बताया था जबकि उस वक्त वो मध्‍यप्रदेश में थे।
एक और झूठ ये कि चव्हाण ने ये फ्लैट पाने के लिए तब अपनी सालाना कमाई सिर्फ 76,000 रु बताई थी जबकि एक सांसद को साल भर में कितनी सैलरी मिलती है ये सब जानते हैं।
दरअसल,  महाराष्ट्र अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट के तहत मुख्यमंत्री विशेष कोटा में पांच फीसदी फ्लैट कम कीमत पर अलॉट कर सकते हैं लेकिन स्कीम के तहत पिछले सोलह साल में करीब 85 फीसदी फ्लैट नेताओं या उनके रिश्तेदारों को ही बांटे गए। चैनल का दावा है कि कुल मिलाकर अगर भक्ति पार्क की फाइल की जांच की जाए तो यहां भी भ्रष्टाचार के दलदल यहां भी मिलेंगे और कीचड़ के कुछ छींटे पृथ्वीराज चव्हाण पर भी गिरेंगे।
वैसे इस चैनल के सर्वेसर्वा भारतीय जनता पार्टी के एक नेता के छात्र राजनीति के साथी रहे हैं, ऐसे में हो सकता है कि आरोप दुर्भावनापूर्ण भी हों, लेकिन आरोप तो लग ही गए। अब कांग्रेस की दिक्कत यह है कि वह ईमानदार आदमी कहां से लाए? अब अगर ईमानदार आदमी भाजपा के यहां मिलते हैं तो वह कुछ दिन के लिए कांग्रेस को उधार दे दे। वैसे बंगारू लक्ष्मण और सुधांशु मित्तल के बारे में भाजपा भी नहीं बता रही कि वह कौन सी टकसाल है जहां ईमानदार राजनेता तैयार किए जाते हैं? वैसे कारगिल शहीदों के ताबूत घोटाले पर क्या विचार है गडकरी जी का?

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