सारे पाप चुनाव की गंगोत्री में धुल जाते हैं, सन्दर्भ मुलायम-बेनी की तू-तू, मैं-मैं

मुलायम-बेनी की बयानबाजी : जेठानी – देवरानी का लतियाव- पितियाव
 रणधीर सिंह सुमन

 उत्तर प्रदेश की राजनीतिक भूमि पर कब्जा करने और उसे बचाने को लेकर समाजवी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव व उनके अनुयायियों तथा केन्द्रीय मन्त्री बेनी प्रसाद वर्मा के बीच वाक् युद्ध जारी है। इस वाक् युद्ध में मुलायम खेमा कमजोर पड़ रहा है इसलिये वह भद्दी-भद्दी गालियों का प्रयोग करने पर उतर आया है। स्तर यह हो गया है कि एक मुलायम अनुयायी ने बेनी प्रसाद को तस्कर कहा व राकेश वर्मा के हारने की बात को कहा जा रहा है। जबकि बेनी ने कहा कि डिम्पल भी तो हार गयी थीं। वहीं बेनी की बातों की गवाही में आज केन्द्रीय मन्त्री अजित सिंह भी मैदान में उतर आये हैं और उन्होंने मुलायम सिंह के ऊपर कई आरोप लगा दिये हैं।

मुलायम सिंह ने काँग्रेस को धोखेबाज़ व मक्कार कहा है जबकि मुलायम सिंह यादव ने तो लोगों को धोखा देने का कार्य हमेशा किया है। वी पी सिंह, ममता बनर्जी को तो इन्होंने धोखा दिया ही था और जिस कम्युनिस्ट पार्टी ने क्रान्तिकारी मोर्चा बनाकर मुलायम सिंह यादव को प्रदेश स्तर का नेता बनाया था उसी पार्टी को धोखा देते हुये उसका विलय कुछ नेताओं को खरीद फरोख्त कर समाजवादी पार्टी में किया था। आज जब बेनी प्रसाद उनकी पोल खोलने पर तुल गये हैं तो तस्कर हैं बेहूदा हैं, मानसिक सन्तुलन खो बैठना जैसे अल्फाजों को बयान का हिस्सा समाजवादी पार्टी बना रही है

सपा नेताओं के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नजदीकी रिश्ते हैं। इस बार उन्होंने काँग्रेस के रणनीतिकारों को भी नहीं बख्शा और कहा कि वर्ष 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में यदि अल्पसंख्यकों का आरक्षण तथा बाटला हाउस काण्ड की जाँच पुन: खोल दी गयी होती तो नतीजे कुछ और होते।

बेनी बाबू ने कहा, “मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों के साथ धोखा किया है और उनका असली चेहरा उजागर किये बिना मैं चुप बैठने वाला नहीं हूँ, चाहे मुझे इसकी कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।”

केन्द्रीय मन्त्री ने कहा कि यदि काँग्रेस मुसलमानों को 4.5 फीसदी आरक्षण तथा बाटला हाउस काण्ड के मुद्दे से पीछे नहीं हटी होती तो परिणाम कुछ और होते। वर्मा ने यह भी कहा कि यदि इस बार भी काँग्रेस ने वही गलती की तो फिर उसे नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुलायम उत्तर प्रदेश में काँग्रेस को हमेशा नीचे रखना चाहते हैं और इसीलिये उन्होंने पर्दे के पीछे भाजपा के साथ ‘डील’ कर रखी है। वर्मा ने कहा कि वर्ष 2003 में 135 विधायकों के साथ मुलायम प्रदेश में सिर्फ इसीलिये सरकार बना सके क्योंकि उन्हें तत्कालीन प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी का आशीर्वाद प्राप्त था। इसी तरह वर्ष 1990 में मुख्यमन्त्री रहते मुलायम ने विहिप नेता अशोक सिंघल को इसलिये अयोध्या जाने दिया ताकि साम्प्रदायिक उन्माद भड़के और इसका फायदा उन्हें मिलता।

बेनी ने कहा कि मुलायम ने गुजरात में इसीलिये प्रत्याशी उतारे, ताकि मुस्लिम मतों का विभाजन हो सके और नरेन्द्र मोदी फिर मुख्यमन्त्री बन सकें। मायावती की पार्टी के बावत पूछे जाने पर वर्मा ने कहा कि वह बसपा में नहीं जा रहे हैं, क्योंकि यदि वहाँ जायेंगे तो घुटकर मर जायेंगे।

सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि बेनी प्रसाद वर्मा हद दर्जे तक बड़बोले हो गये हैं। वह इस तरह के बयान दे रहे हैं, जिसका सच्चाई से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। उन्होंने कहा कि बेनी के बेटे राकेश वर्मा पिछले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी जमानत तक नहीं बचा पाये थे और उससे पहले हुये चुनाव में खुद बेनी की भी यही दुर्गति हुयी थी।

चौधरी ने कहा बेनी को मुलायम के अहसानों को भूल जाने वाला अहसान फरामोश व्यक्ति बताते हुये कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में जनता उन्हें पूछेगी भी नहीं और उनके बेबुनियाद बयानों का खामियाजा काँग्रेस को भुगतना पड़ेगा।

सपा के राष्ट्रीय महासचिव राम आसरे कुशवाहा ने आरोप लगाया कि केन्द्रीय इस्पात मन्त्री का मानसिक संन्तुलन बिगड़ चुका है और उन्हें इलाज की सख्त जरूरत है। वर्मा की केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल से बर्खास्तगी की माँग करते हुये उन्होंने कहा कि मीडिया और अन्य लोगों को वर्मा के बयानों का संज्ञान नहीं लेना चाहिये। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे व्यक्ति को केन्द्र में मन्त्री बनाया गया है।

बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव शुरू से ही अल्पसंख्यकों के साथ धोखाधड़ी करते रहे हैं। उन्होंने भाजपा के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी की तारीफ यूँ ही नहीं की है। बल्कि 2003 में प्रदेश में भाजपा की इनायत से सपा की सरकार प्रदेश में बनी थी। वर्मा ने कहा कि बाबरी मस्जिद को बचाने के नाम पर भी सपा मुखिया ने अल्पसंख्यकों के साथ छल किया था।

उन्होंने कहा वर्ष 1990 में 29 अक्टूबर की रात को मुलायम सिंह यादव ने टेलीफोन कर मुझसे एक तरफ तो यह कहा था कि यह सुनिश्चित करो कि अयोध्या में कारसेवक न पहुँच पायें, वहीं दूसरी तरफ विश्व हिन्दू परिषद नेता अशोक सिघंल को अयोध्या भिजवा दिया।

वर्मा ने कहा जब मैंने सिंघल के अयोध्या पहुँचने के बारे में यादव से पूछा तो उन्होंने बताया था कि अगर सिंघल नहीं पहुँचते तो गर्मी नहीं आती और यह भी साफ किया कि तत्कालीन एडीजी राम आसरे ने भी इस बात की मुझसे पुष्टि की थी। वर्मा ने परोक्ष रूप से यह भी आरोप लगाया कि मुलायम सिंह यादव और भाजपा के रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं यह बात दीगर है कि वह बाहर से एक-दूसरे की आलोचना करते हैं।

केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मन्त्री अजित सिंह ने कहा कि मुलायम को बोलने से पहले सोच लेना चाहिये कि वह क्या बोल रहे हैं, क्योंकि वह सुबह कुछ बोलते हैं और शाम को कुछ और। अजित पर जवाबी हमला करते हुये समाजवादी पार्टी के महासचिव राम आसरे कुशवाहा ने बेनी प्रसाद वर्मा के साथ-साथ उन्हें भी गद्दार करार दे दिया है। अजित सिंह ने मेरठ में कहा, ‘मुलायम सिंह बार-बार काँग्रेस और केन्द्र सरकार पर अशोभनीय टिप्पणी करके मास्टर जी से छात्र बन रहे हैं। उन्हें चाहिये कि वह राजनीति प्रजातन्त्र के हित में करें, स्वार्थ की राजनीति से वशीभूत होकर बयानबाजी न करें।’

प्रदेश सरकार थ्री सी यानी कैश, क्राइम व कास्टिज्म को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव से कहा कि यदि वह एक रात बागपत या मेरठ के किसी गाँव में बितायें तो विकास कार्य की पोल खुल जायेगी। प्रदेश में तबादला उद्योग चल रहा है।

दरअसल पूँजीवादी राजनीति में जनता का ध्यान हटाने के लिये इस तरह के हथकण्डे चुनाव से पूर्व प्रारम्भ किये जाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक चैनल से लेकर प्रिन्ट मीडिया तक इन्ही बातों को उछाल-उछाल कर जनता का ध्यान महँगाई, बेरोजगारी, उत्पीड़न, कानून व्यवस्था से हटाने का करता है। इस तरह इन सब के पाप चुनाव की गंगोत्री में धुल जाते हैं।

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