सैफुल्लाह एनकाउंटर फर्जी कहने पर मौलाना आमिर रशादी पर मुकदमा कायम

 

रणधीर सिंह सुमन

सैफुल्लाह के एनकाउंटर को आमिर रशादी ने उसको फर्जी बताया था और कानपुर जाकर अ बतक उस केस से संबंधित पकड़े गये लोगों के परिवारवालों से मुलाकात भी की थी। इसलिए राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष आमिर रशादी मदनी के खिलाफ कानपुर में एफआईआर दर्ज की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रशादी पर लखनऊ में हाल में मारे गए संदिग्ध आतंकी सैफुल्ला के परिवार वालों को कथित तौर पर भड़काने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) दलजीत चौधरी ने कानपुर में एसएसपी को रशादी के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया था। वहीं, उलेमा कौंसिल के दफ्तर पर पुलिस पहुँच कर आमिर रशादी का इंतज़ार कर रही है।

आमिर रशादी ने कहा था कि आतिफ के घर में तीन दिन तक कानपुर के एसपी सिटी किस कानून के तहत पूछताछ कर रहे थे। उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा था कि अगर एसपी सिटी को तुरंत निलंबित नहीं किया गया, तो वो उत्तर प्रदेश को बंद करा देंगे।

आमिर रशदी ने ये भी कहा था कि सैफुल्ला के पिता बयान बदलना चाहते हैं, लेकिन बहुत दबाव होने की वजह से डरे हुए हैं।

ज्ञातव्य है कि उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी ने कहा कि सैफुल्लाह का एनकांउटर फर्जी है। आतंकी सैफुल्लाह नहीं है, आतंकी तो सरकार है।

उन्होंने ये भी आरोप लगाया था कि पुलिस वालों ने सैफुल्लाह को घर के अंदर बंधक बना रखा था।

शुक्रवार दोपहर मौलाना आमिर रशदी मदनी सैफउल्लाह, इमरान और आतिफ के घर पहुंचे। उन्होंने सभी के परिजनों से अलग-अलग बात की। केवल इमरान के घर पर ताला लगा होने के कारण परिजनों से बात नहीं हो सकी। सभी के परिवारों से मिलने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा, सैफउल्लाह का एनकाउंटर फर्जी है। आतंकी वह नहीं आतंकी सरकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस वालों ने सैफउल्लाह को घर के अंदर बंधक बना रखा था।

वहीँ, दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश की जागरूकता की नई मिसाल भी देखने को मिली लखनऊ में हुए कथित आतंकी सैफुल्ला के मुठभेड़ के बाद प्रदेश में हाई अलर्ट कर दिया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स केमुताबिक संदिग्धों की तलाश में तेलंगाना एटीएस के चार जवान सिविल ड्रेस में इटावा पहुंचे हुए थे। बताया जा रहा है कि इटावा पुलिस ने तेलंगाना एटीएस के तीन जवानों को संदिग्ध समझकर उन्हे हवालात में डालकर उनकी जमकर धुनाई कर दी। तेलंगाना एटीएस के आईजी तक मामले की जानकारी पहुँचने के बाद यूपी के आला अधिकारियों के हाथ पाव फूले, जिसके बाद उन्हे छोड़ा गया।

इटावा में संदिग्ध आतंकियों की सूचना पर पिछले 15 दिनों से तेलंगाना एटीएस के चार जवान डेरा जमाये हुए थे। बताया जा रहा है कि एटीएस जवानों को ठीक से हिन्दी नहीं आती, जिसके चलते मंगलवार देर रात बाइक सवार तीन जवानों को कुछ स्थानीय लोगों ने शक के आधार पर रोक लिया और उनकी भाषा ना समझ पाने के चलते उन्हे आतंकी समझकर पिटाई कर दी और मामले की सूचना पुलिस को दे दी। जो पुलिस आतंकवादी और एटीएस के कर्मचारी में अंतर नही समझ पाती है वह कानून और व्यवस्था किस तरह से कायम रखती है। वह भी इस उदहारण को देखने के बाद जनता को समझना चाहिए।

मध्य प्रदेश ट्रेन विस्फोट के तुरंत बाद जिस तरह से पुलिस ने कार्रवाई की है, वह अद्भुत है। अभी तक लखनऊ में सर्राफा व्यवसाई के यहाँ हुई लोट का आज तक पता लगाने में असमर्थ है या यूँ कहें कि दिल्ली पुलिस नजीब का आजतक पता नही लगा पायी है।

एग्जिट पोल में भाजपा की सरकार आने की बात आते ही नौकरशाही का भगवाकरण सम्बन्धी विचार पैदा होने शुरू हो गये हैं। एनकाउंटर जब भी कोई होता है तो उसकी स्वत: मजिस्ट्रेटी जांच शुरू हो जाती है। अगर पुलिस की मुठभेड़ सही है तो मजिस्ट्रेटी जांच क्यूँ की जाती है लेकिन हर मुठभेड़ में मरने वाले व्यक्ति के सम्बन्ध में मजिस्ट्रेटी जांच का प्राविधान है इसलिए आमिर रशादी के ऊपर वाद कायम करने का कोई औचित्य नहीं है, लेकिन आने वाली संभावित सरकार के लिए अपनी अभी से भक्ति साबित करना मजबूरी है।

लोकतंत्र में किसी भी घटना या किसी कार्य की जांच की मांग लोकतान्त्रिक व्यवस्था का अंग है और यह किसी तरह से अपराध नहीं है। अभी कुछ दिन पूर्व भाजपा के स्टार प्रचारक मोदी ने चुनाव आयोग के सभी निर्देशों का उल्लंघन करते हुए रोड शो बनारस में किया, जबकि धारा 144 सीआरपीसी लगी हुई थी, पांच व्यक्तियों को एक साथ जाना मना था, लेकिन जब कार्रवाई करने की बात आई तो मंदिर दर्शन का नाम देकर प्रशासन ने हाथ खींच लिए थे।

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