अरुण माहेश्वरी

अरुण माहेश्वरी, प्रसिद्ध वामपंथी चिंतक हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

जनतंत्र के काल में महलों के षड़यंत्रों वाली दमनकारी राजशाही है फासीवाद, महाराष्ट्र ने साबित किया

Ajit Pawar after oath as Deputy CM

जनतंत्र के काल में महलों के षड़यंत्रों वाली दमनकारी राजशाही है फासीवाद, महाराष्ट्र ने साबित किया महाराष्ट्र के वर्तमान घटना-क्रम के खास सबक  Special lessons of current events of Maharashtra फासीवाद जनतंत्र के काल में महलों के षड़यंत्रों वाली दमनकारी राजशाही है, महाराष्ट्र में यह सत्य फिर एक बार नग्न रूप में सामने आया है। ऐसा साफ लगता है कि …

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मोदी के गुब्बारे में सुई चुभो दी शिव सेना ने – महाराष्ट्र में भारतीय राजनीति का टूटता हुआ गतिरोध 

uddhav thackeray

मोदी के गुब्बारे में सुई चुभो दी शिव सेना ने – महाराष्ट्र में भारतीय राजनीति का टूटता हुआ गतिरोध  महाराष्ट्र में कांग्रेस तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेताओं के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रहे बैठक के दौर के बाद शिव सेना के साथ गठबंधन सरकार बनने के आसार बढ गए हैं। आज इस संबंध में घोषणा की …

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महाराष्ट्र में शिवसेना एनसीपी की सरकार !

uddhav thackeray

महाराष्ट्र में शिवसेना एनसीपी की सरकार ! सिद्धांत और व्यवहार की इस अनोखी गुत्थी पर एक नोट A note on the unique kink of theory and practice अभी जब हम यह लिख रहे हैं, कांग्रेस कार्यसमिति महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी की सरकार को समर्थन देने, न देने के सवाल पर किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचने के लिये मगजपच्ची कर रही है। यह …

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#AyodhyaVerdict : राजनीति के सामने कानून का आत्म-समर्पण

The Supreme Court of India. (File Photo: IANS)

#AyodhyaVerdict : राजनीति के सामने कानून का आत्म-समर्पण #AyodhyaVerdict : आधुनिक समाज के विवेक को नहीं, कब्जे की वास्तविकता को सर्वोच्च न्यायालय ने तरजीह दी है बाबरी मस्जिद रामजन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें Highlights of Supreme Court’s decision on Babri Masjid Ramjanmabhoomi dispute न्याय, सद्भाव, मानवीय मर्यादा और सभी धार्मिक विश्वासों के प्रति समानता के …

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अगला हफ़्ता सुप्रीम कोर्ट के नाम होगा, हमें न्याय और सत्य की  स्वतंत्र भूमिका का इंतज़ार रहेगा

The Supreme Court of India. (File Photo: IANS)

अगला हफ़्ता सुप्रीम कोर्ट के नाम होगा, हमें न्याय और सत्य की  स्वतंत्र भूमिका का इंतज़ार रहेगा The next week will be in the name of the Supreme Court, we will wait for the independent role of justice and truth भ्रष्ट मुख्यमंत्री येदीयुरुप्पा जैसे ही दिखाई दे रहे थे वकील हरीश साल्वे सुप्रीम कोर्ट का जज दूध पीता बोध-शून्य बच्चा …

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कायरता छोड़ो, आगे बढ़ो उद्धव ठाकरे, जनता तो मोदी-शाह को ठुकरा चुकी है

uddhav thackeray

कायरता छोड़ो, आगे बढ़ो उद्धव ठाकरे, जनता तो मोदी-शाह को ठुकरा चुकी है क्या शिव सेना इतिहास की चुनौती को स्वीकार कर आगे बढ़ेगी या बीजेपी के दरवाज़े पर बंधे पालतू जीव की भूमिका अपनायेगी ! महाराष्ट्र के हाल के विधानसभा चुनाव परिणामों (Maharashtra’s recent assembly election results) पर हमारी पहली प्रतिक्रिया यह थी कि “महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना की जीत …

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संविधान, कोर्ट और विचारधारा : अगर जज बन गए साल्वे तो संविधान तेरा क्या होगा ?

Karan Thapar Harish Salve talk on The Wire

संविधान, कोर्ट और विचारधारा : शुद्ध मिथ्याचारी और हंसी के पात्र प्रतीत हो रहे थे साल्वे Karan Thapar’s conversation on The Wire with well-known constitutional expert Harish Salve about Kashmir, Article 370, the federal structure of the Indian state and fundamental rights of the citizen. आज ही ‘द वायर’ पर कश्मीर, धारा 370, भारतीय राज्य का संघीय ढांचा और नागरिक …

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कश्मीर बताता है कि भारत सुरक्षित हाथों में नहीं विक्षिप्त जुनूनी तत्वों की गिरफ्त में है !

Narendra Modi new look

कश्मीर बताता है कि भारत सुरक्षित हाथों में नहीं विक्षिप्त जुनूनी तत्वों की गिरफ्त में है ! कश्मीर बताता है कि भारत कैसे विक्षिप्त जुनूनी तत्वों की गिरफ्त में है ! मोदी दिन प्रतिदिन कश्मीर की पूरी बर्बादी की कहानी रच रहे हैं। ओफ ! कश्मीर अब पूरी तरह से एक जुनूनी ताकतवर व्यक्ति की विध्वंसकता का शिकार बन चुका …

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क्या भारत अध्यात्म की भूमि है या धार्मिक कट्टरपंथियों का यातना-गृह ?

Has India slid into an irreversible Talibanization of the mind

प्रसिद्ध भाषाशास्त्री जी एन देवी (G.N. Devy) बीती दो अक्तूबर से उपवास पर हैं। वे भारत के, खास तौर पर महाराष्ट्र, बंगाल, तमिलनाडू, केरल, गुजरात और पंजाब के भारतीय नवजागरण के क्षेत्र के नौजवानों से पूछ रहे हैं कि क्या वे शादी के वक्त जाति और धर्म के बंधनों को भूलने के लिये तैयार हैं ? जिस दिन उन्हें कम …

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कश्मीर के लॉक डाउन को दो साल खींचना चाहते हैं मोदी ! जुनूनी मनोरोगी ग़ुरूर में जीया करता है

Amit Shah Narendtra Modi

कश्मीर किधर ! ऐसा लगता है कि मोदी कश्मीर के लॉक डाउन (Kashmir lock down) को कम से कम दो साल तक चलाना चाहते हैं। उन्हें आज़ाद भारत के इतिहास में सबसे सख़्त और साहसी प्रशासक का ख़िताब हासिल करना है और वह इंदिरा गाँधी के 19 महीने के आपातकाल को मात दिये बिना कैसे संभव होगा ! साहसी दिखने का …

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भारत में चल रहे कानून के वास्तविक चरित्र को परिभाषित करेगा बाबरी मस्जिद-राममंदिर मामला

The Supreme Court of India. (File Photo: IANS)

सर्वोच्च न्यायालय में बाबरी मस्जिद विवाद पर अभी लगातार सुनवाई (Continuous hearing on the Babri Masjid dispute in the Supreme Court) चल रही है। इस देश में एनआरसी की जंग को छेड़ने वाले अभी के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई की पांच सदस्यों की संविधान पीठ इसमें लगी हुई है। मुख्य न्यायाधीश नवंबर महीने में सेवा-निवृत्त होने वाले हैं। वे इसके …

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कॉरपोरेट जगत के चौकीदार नाकारा मोदी ने देश को भारी संकट में डाल दिया है

Arun Maheshwari अरुण माहेश्वरी, लेखक प्रख्यात वाम चिंतक हैं।

चाकर रहसूं, बाग लगासूं नित उठ दर्शन पासूं। श्याम ! मने चाकर राखो जी ! कॉरपोरेट भक्त सरकार की आर्त विनती 19 सितंबर 2019 के दिन को भारतीय पूंजीवाद के इतिहास के ऐसे स्वर्णिम दिन (Golden days of the history of Indian capitalism) के रूप में याद किया जायेगा जब भारत के कॉरपोरेट जगत ने अपनी ताकत का भरपूर परिचय …

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कॉरपोरेट के सामने मोदी जी की सारी हेकड़ी ढीली हो गई, चाबुक सिर्फ गरीब पर

Gautam Adani and Narendra Modi

भारत के कॉरपोरेट (Corporate of india) के सामने मोदी जी की सारी हेकड़ी ढीली हो गई है। पिछले कई दिनों से वित्त मंत्रालय में कॉरपोरेट के लोगों का जो ताँता लगा हुआ था, वह असरदार साबित हुआ है। पिछले बजट तक में कॉरपोरेट को कोई छूट नहीं देने का जो रौब गाँठा गया था, वह अब पानी-पानी हो चुका है। …

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एनआरसी : भारत में न्याय का प्रहरी ही न्याय के अघटन का कारण साबित हो रहा

citizenship amendment bill 2019 NRC.jpg

नई दिल्ली के इंडियन सोसाइटी आफ़ इंटरनेशनल लॉ (Indian Society of International Law in New Delhi) में इसी 8 सितंबर को एक ‘जन पंचायत’ बैठी जिसमें असम में नागरिकता के सवाल (citizenship questions in Assam) पर भारत के कई प्रमुख पूर्व न्यायाधीशों और क़ानून जगत के विद्वानों ने हिस्सा लिया। विचार का विषय था नागरिकता को लेकर इस विवाद की …

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जब तक मोदी की सर्वाधिकारवादी राजनीति को पराजित नहीं किया जाता, डूबती जाएगी अर्थव्यवस्था

Gautam Adani and Narendra Modi

मोदी जी समझते हैं कि वे जितना कहते हैं, लोग उतना ही समझते हैं। कहने वाले और सुनने वाले के बीच दूसरे ऐसे अनेक अनुभव काम करते रहते हैं जो कहे गये शब्द अपने अर्थ को प्राप्त करें, उसके पहले ही उनकी राह को भटका देते हैं। वे नहीं जानते कि कैसे राजनीतिक साजिशों, सरकारी तंत्र के बेजा प्रयोग से …

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प्रोफेसर रोमिला थापर का जाहिल शासकों द्वारा अपमान ज्ञान के जगत के अपमान से कम नहीं है

Professor Romila Thapar's books,

प्रोफ़ेसर रोमिला थापर (Professor Romila Thapar) से जेएनयू प्रशासन ने उनका सीवी, अर्थात् उनके अकादमिक कामों का लेखा-जोखा माँगा है ताकि वह उनको दिये गये प्रोफ़ेसर एमिरटस के पद पर पुनर्विचार कर सके। Eminent historian and Padma Bhushan awardee Romila Thapar has been reportedly asked by the Centre to submit her CV so that it can consider if she can …

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रिजर्व बैंक के रिजर्व कोष पर पंजा मारकर मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था की कब्र खोद दी

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Nation on the occasion of 73rd Independence Day from the ramparts of Red Fort, in Delhi on August 15, 2019

रिजर्व बैंक के रिजर्व कोष पर सरकार का पंजा (Government’s paw on Reserve Bank’s Reserve Fund) : सरकार ने खुद को ही नि:स्व किया है रिजर्व बैंक से अंतत: एक लाख छियत्तर हज़ार करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने लेकर दिवालिया हो रही निजी कंपनियों के तारणहार की भूमिका अदा करने और चंद दिनों के लिये अपने खुद के वित्त में …

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मोदी की तुगलकी नीतियों की देन है मंदी और डूबती अर्थव्यवस्था

Narendra Modi An important message to the nation

मंदी और राजनीति-शून्य आर्थिक सोच की विमूढ़ता Recession and Politics – Zero Economic Widening अति-उत्पादन पूँजीवाद के साथ जुड़ी एक जन्मजात व्याधि है। इसीलिये उत्पादन की तुलना में माँग हमेशा कम रहती है। यही वजह है कि पूंजीवाद में हर एक चक्र के बाद एक प्रकार की संकटजनक परिस्थिति सामने आती ही है। लेकिन पूँजीवाद के इस चक्रिक संकट की चर्चा …

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मोदीजी की बेहाल अर्थनीति और जनता सांप्रदायिक विद्वेष और ‘राष्ट्रवाद’ का धतूरा पी कर धुत्त !

Narendra Modi new look

आर्थिक तबाही को सुनिश्चित करने वाला जन-मनोविज्ञान ! Public psychology that ensures economic destruction चुनाव में मोदी की भारी जीत लेकिन जनता में उतनी ही ज्यादा ख़ामोशी ! मोदी जीत गये, भले जनता के ही मत से, लेकिन विडंबना देखिये कि वही जनता उनकी जीत पर स्तब्ध है ! 2019 में मोदी की जीत सांप्रदायिक और राष्ट्रवादी उन्माद में होश …

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द ग्रेट हैक : लोगों को जोड़ता नहीं, तोड़ता है फेसबुक का जुकरबर्ग !

Full review of Netflix's The Great Hack

आंख खोलने वाली फिल्म — द ग्रेट हैक (The Great Hack on Netflix)… Netflix’s The Great Hack Brings Our Data Nightmare to Life आज नेटफ्लिक्स (Netflix) पर दो घंटे का एक प्रकार का वृत्त चित्र देखा — The Great Hack (द ग्रेट हैक)। 2016 में ट्रंप के चुनाव और फिर इंगलैंड में ब्रेक्सिट पर हुए जनमत-संग्रह में डाटा विश्लेषण (Data …

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अमेरिकी आज भी अपनी जेब में चेकबुक रखता है और भारत में डिजिटल भुगतान (क्रिप्टो करेंसी) पर जोर !

Arun Maheshwari अरुण माहेश्वरी, लेखक प्रख्यात वाम चिंतक हैं।

क्रिप्टो करेंसी और राज्य Crypto currency and state देखते-देखते क्रिप्टो करेंसी (Crypto currency), अर्थात् तमाम राष्ट्रीय सरकारों की जद से मुक्त ऐसी सार्वलौकिक करेंसी के चलन पर विचार और क्रिया का सिलसिला शुरू हो गया है जो मुद्रा को क्रय-विक्रय के लेन-देन में मध्यस्थता (Intermediation in the sale and transaction of currency) की अपने मूलभूत भूमिका के अतिरिक्त उस पर …

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स्वतंत्रता दिवस : हिटलरशाही के प्रतिरोध की राजनीति साधनी होगी

Arun Maheshwari अरुण माहेश्वरी, लेखक प्रख्यात वाम चिंतक हैं।

आज़ादी की 73वीं सालगिरह (73rd anniversary of independence) पर सभी मित्रों को हार्दिक बधाई । आज का दिन अपने देश की एकता और अखंडता के प्रति अपनी निष्ठा को दोहराने का दिन है। आज उन सभी देशवासियों को गले लगाने का दिन है जिनके मन वर्तमान शासन की विभाजनकारी नीतियों और अन्यायपूर्ण दमन के कारण दुखी है। आज खास तौर …

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मोदीजी उन्माद के बल पर राष्ट्र का निर्माण नहीं, सिर्फ विध्वंस ही किया जा सकता है, अरुण माहेश्वरी का पीएम को खत

Narendra Modi An important message to the nation

स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रधानमंत्री जी के नाम एक खुला पत्र An open letter to the Prime Minister before Independence Day आदरणीय प्रधानमंत्री जी, कल रात हम काफी देर तक ‘नेटफ्लिक्स‘ पर सीरिया और गाजा के बारे में वृत्त चित्रों (Documentaries about Syria and Gaza on ‘Netflix’) को देख रहे थे। आतंक, हत्या, खून-खराबे और भारी गोला-बारूद के बीच वहां …

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क्या ये पुण्य प्रसून का संघी था, जो बाहर आ गया ?

Punya Prasun Bajpai

पुण्य प्रसून क्यों किसी ‘उद्धारकर्ता‘ के झूठे अहंकार में फंस रहे है ? —अरुण माहेश्वरी कल रात ही धारा 370 को हटाये जाने के बारे में पुण्य प्रसून वाजपेयी की लंबी, लगभग पचास मिनट की वार्ता (Punya Prasoon Bajpai’s long, nearly fifty-minute talk about the removal of Article 370) को सुना। अपनी इस वार्ता में उन्होंने घुमा-फिरा कर, कश्मीर के …

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यह कश्मीर को भारत में मिलाने का नहीं, उससे अलग करने का निर्णय है

Narendra Modi new look

यह कश्मीर को भारत में मिलाने का नहीं, उससे अलग करने का निर्णय है कश्मीर संबंधी जो धाराएँ भारतीय जनतंत्र और संघीय ढाँचे का सबसे क़ीमती गहना थी, उन्हें उसके शरीर से नोच कर बीजेपी हमारे जनतंत्र को विपन्न और बदसूरत बना रही है। कश्मीर की जनता के साथ तो यह ऐसी बदसलूकी है कि यदि इसी तरह चलता रहा …

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मोदीराज में अर्थ-व्यवस्था के विध्वंस के लिये बारूद का व्यापक जाल बिछा दिया गया लगता है

Arun Maheshwari अरुण माहेश्वरी, लेखक प्रख्यात वाम चिंतक हैं।

वित्त सचिव सुभाष गर्ग (Finance Secretary Subhash Garg) को केंद्र में रख कर शुरू हुए विवादों का जो चारों ओर से भारी शोर सुनाई दे रहा है, वह इतना बताने के लिये काफी है कि भारत की अर्थ-व्यवस्था और वित्त-प्रबंधन के केंद्रों पर अब पूरी तरह से ऐसी राष्ट्र-विरोधी ताक़तों का क़ब्ज़ा हो चुका है, जो इस अर्थ-व्यवस्था के पूरे …

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मोदी जी के संघी साथियों के दिमाग की उपज से हमारी अर्थ-व्यवस्था का गला घुट रहा है

Arun Maheshwari अरुण माहेश्वरी, लेखक प्रख्यात वाम चिंतक हैं।

सुभाष गर्ग गये, पर अर्थनीति का क्या ? कल ही सरकार के एक और प्रमुख आर्थिक सलाहकार, आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग (Economic Affairs Secretary Subhash Garg) की बेहद अपमानजनक ढंग से विदाई हो गई। कहते हैं कि यह काम आरएसएस (RSS) के कथित स्वदेशीवादियों, ‘स्वदेशी जागरण मंच’ (Swadeshi Jagran Manch) ने कराया है। ये ‘स्वदेशीवादी’ विदेशी मुद्रा में …

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अर्थव्यवस्था के लिए संकट बन चुके हैं मोदी, जाने के पहले भारत की सार्वभौमिकता को बेच कर जायेंगे

Narendra Modi An important message to the nation

अर्थ-व्यवस्था के भारी संकट के लिये मोदी निजी तौर पर ज़िम्मेदार है आज भारत की समग्र राजनीतिक परिस्थितियाँ अनपेक्षित न होने पर भी कुछ अजीब सी बन चुकी है। वरिष्ठ मीडिया पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी इधर की अपनी कांग्रेस-केंद्रित निजी वार्ताओं में प्रकारांतर से इसी की चर्चा कर रहे हैं। परिस्थिति यह है कि मोदी तो खुद डूबेंगे ही, पर …

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अरुंधति रॉय और डॉ. राम विलास शर्मा की आँखों से गांधी और अंबेडकर देखना

अरुंधति रॉय की किताब 'एक था डॉक्टर और एक था संत', (Arundhati Roy's book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant)

विमर्शमूलक विखंडन और कोरी उकसावेबाजी में विभाजन की रेखा बहुत महीन होती है अरुंधति रॉय की किताब ‘एक था डॉक्टर और एक था संत‘, (Arundhati Roy’s book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant) की समीक्षा अरुंधति रॉय की किताब ‘एक था डॉक्टर और एक था संत‘, (Arundhati Roy’s book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant,) लगभग एक सांस में ही …

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बैंकिंग प्रणाली पर संकट और हमारी दिशाहीन सरकार

Arun Maheshwari अरुण माहेश्वरी, लेखक प्रख्यात वाम चिंतक हैं।

वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री, दोनों पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उनके घर पर जा कर मिलें। 5 जुलाई को बजट पेश होगा। इसके ठीक पहले मनमोहन सिंह से इनकी मुलाक़ात के उद्देश्य को आसानी से समझा जा सकता है। अर्थ-व्यवस्था के सारे संकेतक बहुत नकारात्मक दिखाई दे रहे हैं। एनबीएफसी के संगीन हालात ने पहले से अपने बढ़ते हुए एनपीएज …

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भारतीय अर्थव्यवस्था : अमरीका देख रहा है भारत को वेनेज़ुएला बनाने की सारी सामग्री इकट्ठी हो चुकी हैं

Arun Maheshwari अरुण माहेश्वरी, लेखक प्रख्यात वाम चिंतक हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था और कुछ चिंताजनक सोच Indian economy and some worrisome thinking नई दिल्ली, 23 जून 2019 : भारत की अर्थव्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरबीआई बोर्ड की बैठक ((Meeting of the Reserve Bank of India Board) ) में स्वयं आरबीआई गवर्नर ((Reserve Bank of India Governor) ) ने यह स्वीकार किया है। उधर ईरान …

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शुद्ध रूप से एक विधवा की प्रेम कथा है, प्रणय-प्रेम गाथा है मनीषा कुलश्रेष्ठ का उपन्यास ‘मल्लिका’

Manisha Kulshreshtha's novel 'Mallika'

भारतेन्दु बाबू के प्रणय-प्रेम की एक कथा — ‘मल्लिका‘ आज मनीषा कुलश्रेष्ठ का हाल में प्रकाशित उपन्यास ‘मल्लिका’ (Manisha Kulshreshtha’s novel ‘Mallika’) पढ़ गया। मल्लिका, बंकिम चंद्र चटोपाध्याय की ममेरी बहन, बंगाल के एक शिक्षित संभ्रांत घराने की बाल विधवा (child widow)। तत्कालीन बंगाली मध्यवर्ग (Bengali middle class) के संस्कारों के अनुरूप जीवन बिताने के लिये काशी को चुनती है। …

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‘हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान’ : एक फासिस्ट और नाजी परिकल्पना, जिसने मनुष्यता को सिवाय तबाही और बर्बादी के कुछ नहीं दिया

Arun Maheshwari अरुण माहेश्वरी, लेखक प्रख्यात वाम चिंतक हैं।

हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान‘ की पूरी परिकल्पना (Whole hypothesis of ‘Hindi, Hindu, Hindustan‘) एक काल्पनिक और वैचारिक निर्मिति है। इसके मूल में है हिन्दू फासीवाद की विचारधारा (ideology of Hindu fascism)। इसका वस्तुनिष्ठ आधार सिर्फ इतना सा है कि भारत में हिंदू धर्म के मानने वालों का बहुमत है। अन्यथा आज के भारत की एक ठोस भौगोलिकता के बावजूद यहां के …

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एक पूर्वाग्रह-ग्रस्त अव्यवस्थित विचार-बुद्धि के उदाहरण राम चंद्र गुहा

आज के टेलिग्राफ़ में रामचंद्र गुहा का लेख (Ramchandra Guha’s article in the Telegraph) है – ‘शाश्वत बुद्धिमत्ता’ (Timeless Wisdom)। इस लेख के मूल में है 14 वीं सदी के अरबी विद्वान इब्न खल्दुन का एक कथन (statement of Ibn Khaldun) जिसमें वे कहते हैं कि ‘राजनीतिक वंश परंपरा में तीसरी पीढ़ी के आगे तक राजनीतिक प्रभाव और साख नहीं …

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मार्क्सवाद सर्वशक्तिमान है

Karl Marx

लेनिन ने मार्क्स के बारे में अपने प्रसिद्ध निबंध ‘मार्क्सवाद के तीन स्रोत तथा तीन संघटक तत्व’ (1913) में लिखा था कि “मार्क्स की प्रतिभा इस बात में निहित है कि उन्होंने उन प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध किये, जिन्हें मानवजाति के प्रमुखतम चिंतक पहले ही उठा चुके थे।” और इसी क्रम में उन्होंने लगभग धर्मशास्त्र की भाषा का प्रयोग करते …

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वाम नेतृत्व को अपना खोल पलटने की ज़रूरत है

Arun Maheshwari अरुण माहेश्वरी, लेखक प्रख्यात वाम चिंतक हैं।

1996 में, जब ज्योति बसु को प्रधानमंत्री बनाने के प्रस्ताव (proposal to make Jyoti Basu Prime Minister) को सीपीआई(एम) की केंद्रीय कमेटी (Central Committee of CPI (M)) ने ठुकरा दिया था, तब से लेकर आज तक के सीपीएम के नेतृत्व ने पार्टी को और पूरे वामपंथ को राजसत्ता के लिये संघर्ष से अलग कर दिया है। इसी नेतृत्व के 2008 …

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मार्क्सवादी प्रगतिशीलों की वैचारिक विक्षिप्तता : जातिवादी अस्मिताएँ पूंजीवाद के विरुद्ध कभी संघर्ष के मजबूत आधार नहीं बन सकतीं

Arun Maheshwari अरुण माहेश्वरी, लेखक प्रख्यात वाम चिंतक हैं।

बहुलता के हुड़दंगी परिदृश्य में से तानाशाही के सही प्रत्युत्तर की तलाश लखनऊ के हिंदी के आलोचक वीरेन्द्र यादव (Hindi critic Virendra Yadav) की फेसबुक टाइमलाइन पर 22 मई को श्री लक्ष्मण यादव की एक पोस्ट पर हमारी नजर पड़ी जिसमें उन्होंने लिखा था — “Virendra Yadav ने एक पोस्ट में रामचरितमानस को गीता, मनुस्मृति, बंच ऑफ थाट के साथ …

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एग्जिट पोल के संकेत उनकी सच्चाई से कहीं ज़्यादा अवसादकारी हो सकते हैं

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

हमारे जैसे जिन सब लोगों ने यह उम्मीद लगाई थी कि इस बार के चुनाव में मोदी शासन से मुक्ति बिल्कुल संभव होगी, एग्जिट पोल (Exit Polls) से उन सबमें स्वाभाविक रूप से  गहरी निराशा पैदा हुई है। हम जैसों के एक बड़े हिस्से में 2014 के वक़्त भी कम निराशा पैदा नहीं हुई थी। लेकिन विगत पाँच सालों के …

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2019 चुनावी परिदृश्य पर एक शुद्ध दार्शनिक चर्चा : मोदी की बुरी हार सुनिश्चित है

Why Modi Matters to Indias Divider in Chief

2019 चुनावी परिदृश्य पर एक शुद्ध दार्शनिक चर्चा (A pure philosophical discussion on the 2019 election scenario); परिस्थिति के जीवंत भेदाभेदमूलक स्वरूप में मोदी का कोई स्थान संभव नहीं है जब से 2019 के चुनाव की प्रक्रिया (Process of election of 2019) शुरू हुई, जीत के लक्ष्य को पाने के लिये सभी प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के बीच परिदृश्य में व्याप्त भेदों …

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विद्या-भंजकों का प्रदर्शन; यह बंगाल की अस्मिता पर भाजपा का हमला है

Chittorgarh: BJP chief Amit Shah addresses during a public meeting in Chittorgarh, Rajasthan, on Dec 3, 2018

कल अमित शाह (Amit Shah) जब मध्य कोलकाता के धर्मतल्ला (Dharmatullah of central Kolkata) से उत्तरी कोलकाता में विवेकानंद के निवास (residence of Vivekananda in North Kolkata) तक ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ रवाना हुए उसी समय यह साफ़ नजर आ रहा था कि यह चुनावी रोड शो नहीं, बंगाल के खिलाफ भाजपा का एक रण-घोष है। बंगाल …

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गुंडई के बल पर बंगाल विजय का दिवस्वप्न देख रही भाजपा बुरी तरह से फँस गई है, खाता भी न खुलेगा

Why Modi Matters to Indias Divider in Chief

बंगाल में चुनाव पर एक सामान्य चर्चा A general discussion on election in Bengal –अरुण माहेश्वरी बंगाल में चुनाव के परिणामों (Election results in Bengal) के बारे में लिखने की कोई इच्छा न होते हुए भी एक बात कहने से अपने को रोक नहीं पा रहा हूँ कि यहाँ बीजेपी को एक सीट भी मिलना मुश्किल है। वाम की सीटों …

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हताश मोदी भाजपा के बुरे दिनों का संकेत देने लगे हैं

Narendra Modi An important message to the nation

प्रसिद्ध मनोविश्लेषक जॉक लकान (French psychoanalyst Jacques Lacan) ने आदमी में हताशा की गति ( Dialectics of Frustration) का एक चार्ट बनाया था जिसमें बताया गया था कि किसी में भी इसका सूत्रपात अपनी शक्ति को गँवाने (castration) की कल्पना से होता है और वही आदमी में हताशा का वास्तविक रूप ले लेती है, हताश आदमी (Desperate man) के मन …

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भारतीय राजनीति से मोदी की अंतिम विदाई का चुनाव होगा 2019

Narendra Modi An important message to the nation

पेशेवर राजनीतिक विश्लेषणों (Professional political analyzes) की समस्या है कि वे समग्र राजनीतिक परिदृश्य (Overall political scenario) में अलग-अलग ताक़तों की पृथक उपस्थिति को देखने पर इतना अधिक बल देने लगते हैं कि उन्हें इन सबके एक समग्र परिदृश्य में उपस्थिति के कारणों पर विचार करना बेकार लगने लगता है। दरअसल इस परिदृश्य का यदि कोई एक सच है तो …

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एक अशिक्षित नेतृत्व से भारत को मुक्त करने का समय आ गया है

Narendra Modi An important message to the nation

आदमी के गठन में उसके इर्द-गिर्द के लोगों की उससे की जाने वाली अपेक्षाओं की बड़ी भूमिका होती है। आतंकवादियों की सोहबत (organization of terrorists) में रहने वाला आदमी हमेशा अपने आतंकवादी मित्रों की अपेक्षाओं में ही खरा उतरने की कोशिश करता रहता है। इस प्रकार निकट के लोगों की नज़रें आदमी की सूरत (appearance of the man) को तैयार …

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चौथे राउंड के बाद चुनाव परिणामों के सटीक अनुमान का एक सूत्र जो ऑटिज्म पीड़ित चौकीदार को कर देगा बेहोश !

Narendra Modi An important message to the nation

लोकसभा चुनाव 2019 : चुनावी परिदृश्य पर एक सोच दिन रात खुद ही मोदी-मोदी (Modi-Modi) रटने वाले आत्म-मुग्ध मोदी (Self-enchanted Modi) इतने आत्मलीन हो गये हैं कि उनमें बाकी दुनिया का अवबोध ही लुप्त हो गया है। खुद को ही निरखना आदमी के लिये मौत है। मृत के लिये ही खुद के बाहर कुछ नहीं होता। यही आत्मलीनता की बीमारी …

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आज की ये 4 बड़ी खबरें जिन्हें पढ़कर कोई भी भला आदमी सिहर उठेगा कैसे मोदी ने पूरे भारत को सड़ा दिया है

Narendra Modi An important message to the nation

भारत की अभी क्या स्थिति है (What is the situation of India), इसे आज के ‘टेलिग्राफ़’ (Telegraph India) की ख़बरों से जाना जा सकता है। चारों ओर झूठ और धोखाधड़ी का ऐसा साम्राज्य हो गया है कि देश की सभी सर्वोच्च और पवित्र माने जाने वाली संस्थाएँ पूरी तरह से कलंकित दिखाई देने लगी है। –अरुण माहेश्वरी ‘टेलिग्राफ़’ में सबसे …

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साफ़ दिखाई देने लगी है मोदी की पराजय… मोदी की सूरत बदहवासी में कैसी दिखाई देने लगी है !

Narendra Modi An important message to the nation

 जिस बात का दो साल पहले ही अनुमान लगाया जा सकता था कि अब फिर मोदी के लौट कर आने की संभावना नहीं रही है, समय बीत चुका है, वह अब हर बीतते दिन के साथ साफ़ तौर पर उभर कर सामने आने लगा है। जब तीन साल उन्होंने हवाबाज़ी में और नवाबी में ही बिता दिये तो आगे के …

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कुछ भी कर लो, 2019 में मोदी की हार मुमकिन ही नहीं सुनिश्चित है

Narendra Modi new look

फेसबुक (Facebook) पर मित्र शम्भुनाथ शुक्ल (Shambhunath Shukla) जी ने ‘नया इंडिया’ (Naya India) अखबार में वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर व्यास (senior journalist Harishankar Vyas) की एक लंबी टिप्पणी यह कहते हुए साझा कि कि मैं ‘नया इंडिया‘ के निष्कर्ष से सहमत नहीं हूँ, लेकिन चुनाव में वोटर के नज़रिये को समझने में हरिशंकर व्यास ने अब तक कभी ग़लती तो …

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क्यों फिसल रहे हैं अमित शाह के पैर और मोदी की जुबान

Modi go back

क्यों फिसल रहे हैं अमित शाह के पैर और मोदी की जुबान Amit Shah’s feet and Modi’s slip of tongue उफ्फ ये फिसलनें ! -अरुण माहेश्वरी चंद रोज पहले ‘वाशिंगटन पोस्ट’ (Washington Post) ने हिसाब लगा कर बताया था कि ट्रंप ने अपने शासन के पिछले 558 दिनों में कुल 4229 बार झूठी बातें कही हैं। अर्थात् प्रतिदिन 7.6 झूठ। …

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आरबीआई और जेटली विवाद : जरूरत है अर्थनीति के पूरे सोच को समस्याग्रस्त बनाने की

Arun Jaitley,

आरबीआई और जेटली विवाद : जरूरत है अर्थनीति के पूरे सोच को समस्याग्रस्त बनाने की -अरुण माहेश्वरी रिजर्व बैंक और सरकार के बीच वाक् युद्ध का एक नया नाटक शुरू हुआ है। रिजर्व बैंक के एक उप-राज्यपाल ने आरबीआई की स्वायत्तता को एक ऐसे पवित्र स्थान पर रखा है मानो वित्त बाजार की सारी समस्याओं की जड़ में इस स्वायत्तता …

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चुनावी मोड में मोदी : अब उनकी गांठ में झूठ और कुछ और जुमलों के अलावा कुछ बचा नहीं

Election Mode Modi chunavi mod men Arun Maheshwari चुनावी मोड में मोदी : अब उनकी गांठ में झूठ और कुछ और जुमलों के अलावा कुछ बचा नहीं

चुनावी मोड में मोदी : अब उनकी गांठ में झूठ और कुछ और जुमलों के अलावा कुछ बचा नहीं ‘चुनावी मोड‘ में जनतंत्र-प्रेमियों का दायित्व —अरुण माहेश्वरी कल ही ‘एबीपी न्यूज‘ (ABP News) चैनल पर पुण्य प्रसून वाजपेयी (Punya Prasoon Bajpai) कह रहे थे — मोदी अब चुनावी मोड में आ चुके हैं। इसे सही रूप में कहा जाए तो …

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फिर पाकिस्तान की शरण में भाजपा-आरएसएस ! जिन्ना ने एक पाकिस्तान बनाया ये भारत के टुकड़े-टुकड़े करके छोड़ेंगे

Asylum of Pakistan BJP RSS in shelter of Pakistan

अरुण माहेश्वरी जब भी कोई महत्वपूर्ण चुनाव आता है, भाजपा-आरएसएस के लोग भारत को छोड़ पाकिस्तान पर पिल पड़ते हैं। पैसठ साल पहले आरएसएस के बारे में अमेरिकी अध्येता जे ए कुर्रान( जूनियर) ने अपने शोध-प्रबंध का अंत इसी बात से किया था कि ‘भारत में आरएसएस का भविष्य काफी हद तक पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों पर निर्भर …

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टर्की से मोदी के डाक टिकट का रहस्य जानिये… तुर्की ने मोदी को दुनिया का सबसे बड़ा नेता नहीं कहा

Narendra Modi An important message to the nation

अरुण माहेश्वरी टर्की से मोदी के डाक टिकट का रहस्य जानिये। यह मोदी की किसी उपलब्धि का सम्मान नहीं है। 2015 में जी-20 की बैठक में वहाँ जितने देशों के राष्ट्र प्रमुख उपस्थित हुए थे, उन सबका अभिनंदन करते हुए जो डाक टिकट जारी किये गये, उनमें ही एक टिकट मोदी का भी था। मोदी पर इस डाक टिकट को …

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समय जैसा है, उसे ही लिखा जाए….संदर्भ प्रेमचंद का प्रयाण दिवस

Munshi Premchand

(प्रेमचंद की तत्वमीमांसा और लेखक के पुनर्संदर्भीकरण की ज्ञान मीमांसा ) प्रेमचंद का प्रयाण दिवस पर विशेष अरुण माहेश्वरी उपन्यास सम्राट प्रेमचंद : 1880 में जन्म ; 20वीं सदी के प्रारंभ के साथ लेखन का प्रारंभ ; और 1936 में मृत्यु की लगभग आखिरी घड़ी तक लेखन का एक अविराम सिलसिला। हिंदी के उपन्यास सम्राट। उपन्यास विधा : अनुभव और …

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#DeMonetisation – गहरी मंदी आयेगी, मंदी का अर्थ उस अनुपात में अर्थ-व्यवस्था की हत्या

Arun Maheshwari अरुण माहेश्वरी, लेखक प्रख्यात वाम चिंतक हैं।

#DeMonetisation – गहरी मंदी आयेगी, और मंदी का अर्थ ही है उस अनुपात में अर्थ-व्यवस्था की हत्या पी चिदंबरम ने बिल्कुल सही कहा है कि नये नोट छापने में जो पंद्रह से बीस हज़ार करोड़ का ख़र्च होगा, सरकार इस क़दम से अगर उतनी आमदनी नहीं कर सकती है तो इस क़दम से राष्ट्र को सीधा नुक़सान होगा। सरकार अगर …

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