लोकसभा संग्राम : मायावती के सामने सहमे-सहमे से दिखे सपा कंपनी के अखिलेश यादव

राज्य मुख्यालय लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी)। दो सियासी दलों के मिलन ने देश की सियासी फ़िज़ा (Country's political fiasco,) का माहौल ही बदल दिया है देश की सियासत में यह गठबंधन (alliance) चर्चा का केन्द्र (Center of discussion) बन गया है। बसपा-सपा के गठबंधन होने की घोषणा (BSP-SP announces coalition alliance) होने के लिए लखनऊ के ताज होटल में देश भर के मीडिया का ध्यान लगा था। जैसे ही घड़ी की सुई 12:00 की और बढ़ी वैसे ही गठबंधन के दोनों नेता पत्रकारों के सामने थे। संवाददाताओं से खचाखच भरे हॉल में दोनों में सबसे पहले मायावती ने बोलना शुरू किया, लेकिन सपा कंपनी के सीईओ अखिलेश यादव का फ़ेस रीडिंग (Akhilesh Yadav's face readings) देखने लायक थी, ऐसे सहमे-सहमे से लग रहे थे जैसे वह सपा के मालिक न होकर बसपा के कार्यकर्ता हों। वो ही मायावती से डरा या सहमा रहता है कि कही पार्टी से निकाल न दे। हालाँकि बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपाईयों द्वारा जून 1995 में गेस्ट हाउस कांड का दो बार ज़िक्र किया कि हमने वह भूलकर देशहित में सपा के साथ जाने का फ़ैसला लिया। वहीं मायावती ने प्रसपालो के नेता शिवपाल सिंह यादव को मोदी की भाजपा के हाथों का खिलौना बताया, जबकि इससे पहले मायावती ने अखिलेश से कहा था कि अपने परिवार के झगड़े को निपटाओ और अब मोदी की भाजपा के लिए काम करने वाला बता दिया है। सियासत में इसी तरह होता है जब वह काम का नहीं होता तो उसमें कीड़े निकाल दिए जाते हैं, जैसे मायावती ने निकाले है। ख़ैर इस गठबंधन से मोदी की भाजपा की नींद तो हराम हो ही गई।

यह बात सच है इस गठबंधन में जो सीटों का बँटवारा हुआ है बराबर-बराबर का, उसमें एक बात यह भी है सपा कंपनी को जो 38 सीटें मिली हैं उसी में से अन्य दलों को भी सीटें दी जाएंगी, क्योंकि दो सीटें तो ऐसी हैं जहाँ यह गठबंधन अपने प्रत्याशी ही नहीं उतारेगा अमेठी और रायबरेली, जहाँ से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी व यूपीए चेयरमैन सोनिया गांधी चुनाव लड़ेंगे। बाक़ी जो दो सीट बची हैं वह लोकदल के लिए छोड़ी गईं यही समझा जा रहा है, लेकिन यह बाद में तय होगा कि और कौन-कौन दल इस गठबंधन में शामिल होंगे। जो अन्य दल शामिल होंगे उनको सपा कंपनी सीटों में से सीट देंगे। ऐसा ही लग रहा है।

अब यह तो आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा कि कौन-कौन दल इस गठबंधन का हिस्सा होने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि लोकदल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी व अपना दल (एस) को भी शामिल किया जा सकता है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि ये प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरु-चेला की नींद उड़ाने वाली है। गेस्ट हाउस कांड से ऊपर उठकर देशहित को ऊपर रख कर व्यापक जनभावनाओं के अनुरूप यह गठबंधन किया है। हमारे गठबंधन से देश में उम्मीद जगी। बेईमानी से भाजपा ने यूपी में सरकार बनाई है, भाजपा को आगे आने से रोकने के लिए हम पहले ही उपचुनावों में गठबंधन कर चुके हैं। कांग्रेस के कार्यकाल में घोषित इमरजेंसी थी, अब भाजपा के शासनकाल में अघोषित इमरजेंसी है। नोटबन्दी और GST से जनता की कमर टूट गयी है। लखनऊ गेस्ट हाउस कांड से ऊपर जनता का हित रक्खा है। बीजेपी एण्ड कम्पनी को रोकना हमारा लक्ष्य है

मायावती ने साफ कहा कि कांग्रेस से गठबंधन नहीं होगा। कांग्रेस का वोट कभी किसी दूसरे दल को ट्रांसफर नहीं होता। 1996 में हमने और 2017 में अखिलेश यादव ने समझौता करके देख लिया। भाजपा और कांग्रेस सरकार में रक्षा सौदों में ख़ूब घोटाले हुए, बोफोर्स से कांग्रेस गयी थी, राफेल से भाजपा सरकार जाएगी। 1977 की तरह होगा आगामी लोकसभा चुनाव। हमारा गठबंधन भाजपा को उत्तर प्रदेश से रोक देगा, अगर वोटिंग मशीन में गड़बड़ी नहीं हुई तो हम जीतेंगे। हमारा गठबंधन फाइनल, 4 जनवरी को हमने दिल्ली में मीटिंग की थी। गठबंधन की भनक लगते ही भाजपा ने सपा अध्यक्ष को फंसाने के लिए खनन में नाम उछाला, हम हर स्तर पर अखिलेश यादव के साथ हैं। यूपी में लोकसभा की कुल सीटें 80 हैं। बसपा- 38 , सपा – 38 पर लड़ेगी 2 सीटें हमने छोड़ दी हैं, और 2 कांग्रेस के लिए छोड़ दी हैं।

अखिलेश यादव ने कहा कि जातिवाद का चरम काल है भाजपा का कार्यकाल। शरीफों का जीना मुहाल, फर्जी एनकाउंटर किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश जातीय प्रदेश बन गया, इलाज से पहले और मुकदमा दर्ज करने से पहले यहाँ जाति पूछी जा रही है। आगामी चुनाव में सपा बसपा मिलकर यूपी से भाजपा का सफाया करेंगे। भाजपा के अहंकार के विनाश के लिए सपा-बसपा का मिलना जरूरी था। भाजपा ने जब मायावती पर अशोभनीय टिप्पणी की थी तभी मैंने गठबंधन का मन बना लिया था, भाजपा के अहंकार को खत्म करने लिए ये गठबंधन जरूरी था। सपा कार्यकर्ता समझ लें कि आज से मायावती का अपमान हमारा अपमान है अब अगर भाजपा का कोई नेता मायावती का अपमान करता है तो वह हमारा अपमान कर रहा है। आगामी चुनाव में सपा-बसपा मिलकर यूपी से भाजपा का सफाया करेंगे।

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